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हाई ड्राफट प्रोजेक्ट पर संजीदा नहीं भट्ठा मालिक
Updated Sun, 03 Jun 2018 05:03 PM IST
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काले धुएं से मुक्त नहीं हो पा रहे ईंट भट्ठे
हाई ड्राफ्ट प्रोजेक्ट पर संजीदा नहीं भट्ठा मालिक, छोड़ रहे सफेद धुआं
वायुमंडल साफ रखने में मददगार है हाईड्राफट प्रोजेक्ट
एसडी शर्मा
मैहतपुर (ऊना)।
ईंट भट्ठों की चिमनियों से निकलने वाले काले धुएं से निजात दिलाने और वायुमंडल को साफ रखने के मकसद से शुरू एक बड़े प्रोजेक्ट पर बहुत से ईंट भट्ठा मालिक संजीदा नहीं है। ऊना जिला में चल रहे ज्यादातर ईंट भट्ठे आज भी काला धुआं छोड़ रहे हैं। हालांकि, प्रदूषण विभाग ने उन सभी ईंट भट्ठा मालिकों को हाई ड्रफ्ट प्रोजेक्ट लगाने की सलाह दी थी जहां आज भी काला धुआं चिमनी छोड़ती है। इस प्रोजेक्ट को लगाने के पीछे धुएं को सफेद करना ही नहीं बल्कि भट्ठों को प्रदूषण मुक्त करना भी है। ईंट भट्ठों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए प्रोजेक्ट लगाना लाजमी बनाया गया है। इसके लिए भट्ठा मालिकों को कुछ समय दिया था लेकिन देखा गया है कि अभी भी बहुत से ईंट भट्ठों पर प्रोजेक्ट के प्रति भट्ठा मालिक संजीदगी नहीं दिखा रहे हैं। ईंट भट्ठों पर प्रोजेक्ट के लगने से निकलने वाले काले धुएं को विशेष प्रकार की पाइपलाइनों से गुजारा जाता है। इस कारण काला स्याह धुआं चिमनी से न केवल सफेद होकर आकाश में उड़ता है बल्कि कोयले के महीन कण भी हवा में नहीं उड़ते। तकरीबन 40 से 50 लाख में लगने वाले प्रोजेक्ट के प्रति राज्य सरकार और प्रदूषण बोर्ड संजीदगी दिखाए तो ईंट भट्ठों से होने वाले प्रदूषण से बड़ी राहत मिलेगी। प्रोजेक्ट लगाने से भट्ठों पर कोयले की खपत तो कम होगी, अगर ईंट भट्ठे आबादी के निकट चल रहे हैं, उनसे आम लोगों को कोई नुकसान भी नहीं होगा। जिला के इस सरहदी क्षेत्र में इस समय 18 से 20 ईंट भट्ठे चल रहे हैं जिनमें दो एक भट्ठा मालिकों ने यह प्रोजेक्ट लगाकर भट्ठों का प्रदूषणमुक्त किया है। प्रदूषण बोर्ड के अधीक्षण अभियंता डॉ. श्रवण कुमार का कहना है कि ईंट भट्ठा मालिकों को प्रोजेक्ट के प्रति संजीदगी दिखानी चाहिए। भट्ठों को चलाना है तो प्रोजेक्ट लगाना ही होगा।
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हाई ड्राफ्ट प्रोजेक्ट पर संजीदा नहीं भट्ठा मालिक, छोड़ रहे सफेद धुआं
वायुमंडल साफ रखने में मददगार है हाईड्राफट प्रोजेक्ट
एसडी शर्मा
मैहतपुर (ऊना)।
ईंट भट्ठों की चिमनियों से निकलने वाले काले धुएं से निजात दिलाने और वायुमंडल को साफ रखने के मकसद से शुरू एक बड़े प्रोजेक्ट पर बहुत से ईंट भट्ठा मालिक संजीदा नहीं है। ऊना जिला में चल रहे ज्यादातर ईंट भट्ठे आज भी काला धुआं छोड़ रहे हैं। हालांकि, प्रदूषण विभाग ने उन सभी ईंट भट्ठा मालिकों को हाई ड्रफ्ट प्रोजेक्ट लगाने की सलाह दी थी जहां आज भी काला धुआं चिमनी छोड़ती है। इस प्रोजेक्ट को लगाने के पीछे धुएं को सफेद करना ही नहीं बल्कि भट्ठों को प्रदूषण मुक्त करना भी है। ईंट भट्ठों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए प्रोजेक्ट लगाना लाजमी बनाया गया है। इसके लिए भट्ठा मालिकों को कुछ समय दिया था लेकिन देखा गया है कि अभी भी बहुत से ईंट भट्ठों पर प्रोजेक्ट के प्रति भट्ठा मालिक संजीदगी नहीं दिखा रहे हैं। ईंट भट्ठों पर प्रोजेक्ट के लगने से निकलने वाले काले धुएं को विशेष प्रकार की पाइपलाइनों से गुजारा जाता है। इस कारण काला स्याह धुआं चिमनी से न केवल सफेद होकर आकाश में उड़ता है बल्कि कोयले के महीन कण भी हवा में नहीं उड़ते। तकरीबन 40 से 50 लाख में लगने वाले प्रोजेक्ट के प्रति राज्य सरकार और प्रदूषण बोर्ड संजीदगी दिखाए तो ईंट भट्ठों से होने वाले प्रदूषण से बड़ी राहत मिलेगी। प्रोजेक्ट लगाने से भट्ठों पर कोयले की खपत तो कम होगी, अगर ईंट भट्ठे आबादी के निकट चल रहे हैं, उनसे आम लोगों को कोई नुकसान भी नहीं होगा। जिला के इस सरहदी क्षेत्र में इस समय 18 से 20 ईंट भट्ठे चल रहे हैं जिनमें दो एक भट्ठा मालिकों ने यह प्रोजेक्ट लगाकर भट्ठों का प्रदूषणमुक्त किया है। प्रदूषण बोर्ड के अधीक्षण अभियंता डॉ. श्रवण कुमार का कहना है कि ईंट भट्ठा मालिकों को प्रोजेक्ट के प्रति संजीदगी दिखानी चाहिए। भट्ठों को चलाना है तो प्रोजेक्ट लगाना ही होगा।