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जाबली में पुलिस और कामगारों के बीच झड़प

Fri, 18 Sep 2015 10:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो परवाणू/धर्मपुर (सोलन)।
अमर उजाला ब्यूरो परवाणू/धर्मपुर (सोलन)। Updated Fri, 18 Sep 2015 10:57 PM IST
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जाबली पंचायत में स्थित एचपीएल एवं हिमाचल एनर्जी उद्योग के सामने श्रमिकों के शांतिपूर्वक प्रदर्शन के दौरान अचानक हिंसा भड़क उठी। इस दौरान शिमला-कालका एनएच पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर झड़प हुई। इसमें आठ लोगों को चोटें आई हैं जिसमें छह पुलिस कर्मी और दो महिला कामगार शामिल है। घायलों में दो प्रदर्शनकारी महिलाओं और दो पुलिस महिला कांस्टेबल को ईएसआई में भर्ती करवाया गया है। अन्य का प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल किया गया है।

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इस दौरान करीब 50 कामगारों को परवाणू थाना में कुछ समय तक हिरासत में रखा गया। श्रमिकों का आरोप था कि शांतिपूर्वक प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन पर लाठियां भांजी। उन्हें जबरन उठाकर घसीटते हुए खदेड़ा गया। जबकि पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। इस दौरान कुछ देर के लिए हाइवे पर यातायात भी प्रभावित रहा।
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फैक्ट्री से निकाले गए मजदूरों के समर्थन में प्रदर्शनकारी निर्देशानुसार उद्योग परिसर से 50 मीटर दूर प्रदर्शन कर रहे थे। सुबह सात बजे पुलिस ने फैक्ट्री से दूर हड़ताल कर रहे कर्मचारियों को हटाया। इसमें निर्देशों का हवाला दिया गया। इसके तहत तंबू उखाड़ दिए और कर्मचारियों को हड़ताल खत्म करने को कहा।
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इस बात की सूचना मिलते ही फैक्ट्री से करीब 3 किमी दूर जाबली के पास श्रमिक काफी संख्या में एकत्र हो गए और रैली शुरू कर दी। इस दौरान पुलिस ने आदेशों का हवाला देते हुए कर्मचारियों को समझाया, लेकिन बात नहीं बनी। इस बीच पुलिस और श्रमिकों में ठन गई और हाथापाई शुरू हो गई। उसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए सभी कर्मचारियों को खदेड़ना शुरू कर दिया। गाड़ियों में जबरन प्रदर्शनकारी भरे और थाने ले जाया गया जिससे भगदड़ मच गई।

उधर, नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों पर लाठीचार्ज करना गलत है। इसकी कड़े शब्दों में निंदा की जाती है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों पर हुए इस कायरतापूर्ण लाठीचार्ज की न्यायिक जांच होनी चाहिए। जिस निर्दयता से पुलिस प्रशासन ने महिलाओं पर लाठियां बरसाई है, उन्हें बालों से पकड़कर घसीटा है, उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी प्रदेश सरकार को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। उधर, मौके पर मौजूद पंचायत प्रधान गणेश दत्त अत्री, नरेश अत्री, बिलो नेगी, रूबीन, रमन लाल अत्री ने मामले को पुलिस द्वारा बेवजह तूल देने की बात कही गई और इसके विरोध में बाजार बंद रखा।

एटक के बैनर तले चल रही इस हड़ताल पर पुलिस की कार्रवाई को हिमाचल सरकार व प्रशासन की मिलीभगत बताते हुए एटक के प्रदेशाध्यक्ष जगदीश भारद्वाज ने कायरतापूर्ण कार्रवाई करार दिया है। उन्होंने कहा कि इसके विरोध में प्रदेश भर में एटक प्रदर्शन करेगी। इसके लिए उन्हें विभिन्न ट्रेड यूनियन व राजनीतिक दलों से भी समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह हड़ताल 2 सितंबर से चल रही है। इस बारे में एसपी, डीसी सभी को लिखा है, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।


डीएसपी परवाणू प्रमोद चौहान ने कहा कि लेबर कमिश्नर ने इस हड़ताल पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बावजूद सुबह जब वर्करों ने रोष रैली निकाली और फैक्ट्री के गेट पर बैठना चाह रहे थे उन्हें रोका गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। बिना सूचना के चक्का जाम करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि लाठीचार्ज नहीं हुआ है। कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का सर्वोपरी कर्तव्य है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ धारा 353, 332, 504, 188 और 186 के तहत मामला दर्ज किया है।

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