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Solan News: नगर निगम में गांवों के विलय के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध तेज
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संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने नायब तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन,सर्वेक्षण रोकने की मांग
कहा- हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद कराया जा रहा सर्वे
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। नगर निगम सोलन में नए ग्रामीण क्षेत्रों को शामिल करने के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। इस विलय के विरोध में ग्रामीणों के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने नायब तहसीलदार (सेटलमेंट) से मुलाकात की। उन्होंने एक ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र में चल रहे कथित सरकारी सर्वेक्षण को तुरंत रोकने की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना या विश्वास में लिए उनके घरों और जमीनों का गुप्त सर्वेक्षण करवा रहा है। प्रशासन के इस रवैये से पूरे क्षेत्र में नाराजगी और तनाव का माहौल है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि गांवों को नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में मिलाने के सरकारी फैसले को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। जब मामला अदालत में लंबित है, तो प्रशासन की ओर से आनन-फानन में सर्वेक्षण करवाना अनुचित है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि इस गुप्त सर्वेक्षण की आड़ में सरकार और नगर निगम प्रशासन झूठे और मनगढ़ंत आंकड़े तैयार कर सकता है। इसका उद्देश्य अदालत को गुमराह करना और अपने फैसले को सही ठहराना हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन को कोई सर्वेक्षण करना ही है, तो उसे नगर निगम के पुराने कार्यक्षेत्र में कराया जाए, न कि विवादित ग्रामीण क्षेत्रों में।
प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे इस कथित सर्वेक्षण को तुरंत स्थगित किया जाए। इस सर्वेक्षण को लेकर जारी किए गए आधिकारिक सरकारी आदेशों की प्रतियां ग्रामीणों को तुरंत उपलब्ध कराई जाएं। प्रशासन, नगर निगम के आला अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच एक संयुक्त बैठक बुलाई जाए। इस बैठक में सर्वेक्षण के वास्तविक उद्देश्य और मंशा को स्पष्ट किया जाए।
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एकतरफा सर्वे को नहीं किया जाएगा बर्दाश्त
ग्रामीण रमेश चंद धीमान, दीपक शर्मा, सतीश चंद धीमान, देवदत्त, राजेश शर्मा, रमेश कौंडल ने चेतावनी दी है कि प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर ध्यान न दिए जाने तक वे किसी भी एकतरफा सर्वेक्षण को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होती, तब तक विरोध जारी रहेगा। एक ग्रामीण ने कहा कि जब तक प्रशासन उनकी मांगों पर गौर नहीं करता और स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होती, तब तक क्षेत्र में किसी भी तरह के एकतरफा सर्वे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ग्रामीण इसका पुरजोर विरोध जारी रखेंगे।
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कहा- हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद कराया जा रहा सर्वे
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। नगर निगम सोलन में नए ग्रामीण क्षेत्रों को शामिल करने के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। इस विलय के विरोध में ग्रामीणों के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने नायब तहसीलदार (सेटलमेंट) से मुलाकात की। उन्होंने एक ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र में चल रहे कथित सरकारी सर्वेक्षण को तुरंत रोकने की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना या विश्वास में लिए उनके घरों और जमीनों का गुप्त सर्वेक्षण करवा रहा है। प्रशासन के इस रवैये से पूरे क्षेत्र में नाराजगी और तनाव का माहौल है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि गांवों को नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में मिलाने के सरकारी फैसले को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। जब मामला अदालत में लंबित है, तो प्रशासन की ओर से आनन-फानन में सर्वेक्षण करवाना अनुचित है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि इस गुप्त सर्वेक्षण की आड़ में सरकार और नगर निगम प्रशासन झूठे और मनगढ़ंत आंकड़े तैयार कर सकता है। इसका उद्देश्य अदालत को गुमराह करना और अपने फैसले को सही ठहराना हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन को कोई सर्वेक्षण करना ही है, तो उसे नगर निगम के पुराने कार्यक्षेत्र में कराया जाए, न कि विवादित ग्रामीण क्षेत्रों में।
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प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे इस कथित सर्वेक्षण को तुरंत स्थगित किया जाए। इस सर्वेक्षण को लेकर जारी किए गए आधिकारिक सरकारी आदेशों की प्रतियां ग्रामीणों को तुरंत उपलब्ध कराई जाएं। प्रशासन, नगर निगम के आला अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच एक संयुक्त बैठक बुलाई जाए। इस बैठक में सर्वेक्षण के वास्तविक उद्देश्य और मंशा को स्पष्ट किया जाए।
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एकतरफा सर्वे को नहीं किया जाएगा बर्दाश्त
ग्रामीण रमेश चंद धीमान, दीपक शर्मा, सतीश चंद धीमान, देवदत्त, राजेश शर्मा, रमेश कौंडल ने चेतावनी दी है कि प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर ध्यान न दिए जाने तक वे किसी भी एकतरफा सर्वेक्षण को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होती, तब तक विरोध जारी रहेगा। एक ग्रामीण ने कहा कि जब तक प्रशासन उनकी मांगों पर गौर नहीं करता और स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होती, तब तक क्षेत्र में किसी भी तरह के एकतरफा सर्वे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ग्रामीण इसका पुरजोर विरोध जारी रखेंगे।