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ईएसआई अस्पताल परवाणू में इलाज मिलने की गारंटी नहीं

Mon, 13 Jun 2016 11:28 PM IST
ब्यूरो, परवाणू, सोलन
ब्यूरो, परवाणू, सोलन Updated Mon, 13 Jun 2016 11:28 PM IST
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Unsystem in parwanoo hospital
ईएसआई परवाणू में इलाज की गारंटी नहीं। भारी भीड़ के चलते यहां सुबह पर्ची बनाने से लेकर चिकित्सक को दिखाने तक पूरा दिन निकल जाता है। - फोटो : अमर उजाला

ईएसआई परवाणू में इलाज की गारंटी नहीं। भारी भीड़ के चलते यहां सुबह पर्ची बनाने से लेकर चिकित्सक को दिखाने तक पूरा दिन निकल जाता है। शाम तक बारी आएगी या नहीं यह तय नहीं। लोग भरी गर्मी में दिन भर इलाज के लिए खड़े रहते हैं। वहीं उद्योगों से दो घंटे का अवकाश लेकर आए कर्मचारी पूरा दिन गंवाते हैं। उन्हें दिहाड़ी से भी हाथ धोना पड़ता है और दिन भर की परेशानी अलग से झेलनी पड़ती है रही सही कसर सिफारिश वाले पूरी कर देते हैं। आम लोगों को जहां लंबी कतारों में खड़ा किया जाता है, वहीं विशेष लोगों को जल्द देखकर वापस भेज दिया जाता है। रोजाना 700 से अधिक की ओपीडी वाले अस्पताल में व्यवस्था नाकाफी है। ऐसे में लोगों को इलाज के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने ईएसआई अस्पताल में चिकित्सकों के पद सृजित करने की मांग उठाई है। साथ ही अस्पताल के विस्तारीकरण की मांग भी की है।

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लाइव
समय सुबह नौ बजे। स्थान परवाणू ईएसआई अस्पताल। सुबह से ही लोग लंबी कतारों में पर्ची बनाने के लिए एकत्र हो गए। काउंटर एक ही जगह होने के चलते रश बढ़ने लगा। लेकिन पर्ची बनाने वालों की स्पीड कम थी। करीब दस बजे के बाद लंबी कतार लग गई। महज एक डॉक्टर ओपीडी में बैठा था। बाकी राउंड पर या ओटी पर थे। इस दौरान जैसे-जैसे पर्ची बनती गई, वैसे वैसे ओपीडी के बाहर भीड़ एकत्र हो गई। पूछने पर पता चला की यहां रोजाना भारी भीड़ रहती है। कई रोगियों की दिन भर बारी नहीं आती है। उद्योगों के कर्मचारियों को पूरा अवकाश लेना पड़ता है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान होता है।
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लोगों की जुबानी
व्यवस्था दुरुस्त करें
भीम सिंह का कहना है कि यह रोज की दिक्कत है। पहले पर्ची बनाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। फिर चिकित्सक को दिखाने में पसीने छूटते हैं। यहां जल्दी बारी आने की व्यवस्था करनी चाहिए।
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पूरा दिन इंतजार
चंद्रवती का कहना है कि चिकित्सकों की कमी के कारण लंबी लाइन लगती है। इससे लोगों को भारी दिक्कत होती है। उद्योग से छुट्टी लेकर आते हैं और पूरा दिन बारी के इंतजार में लग जाता है।

पर्ची बनाने में देरी
राजू के मुताबिक कंपनी से महज दो घंटे छुट्टी मिलती है। दो घंटे पहले पर्ची बनाने में लगते हैं। बाद में चिकित्सक को दिखाने के लिए लाइनों में खड़ा होना पड़ता है। जान पहचान वाले पहले बुलाए जाते हैं। आम आदमी इंतजार करता है।

अस्पताल का करें विस्तार
रेखा का कहना है कि अस्पताल का विस्तार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यहां रोज भारी रश के कारण लोगों को बेहद परेशानी होती है। उन्हें इलाज के लिए पूरा दिन भर इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में लोगों को भारी परेशानी होती है।

संवेदनशील है मार्ग
एनएच शिमला कालका हादसों के लिए संवेदनशील है। यहां हादसे होते रहते हैं। कालका, जाबली, कोटी आदि एनएच किनारे सटे इलाकों से हादसों में घायल मरीज उपचार के लिए ईएसआई अस्पताल लाए जाते हैं। ऐसे में यहां चिकित्सकों के पद पूरे होना जरूरी है।


700 ओपीडी देखना चुनौती भरा : इंचार्ज
ईएसआई अस्पताल के इंचार्ज डॉ. विनोद कपिल का कहना है कि 7 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। इसमें दो खाली हैं और एक ने मेडिकल लीव ले रखी है। इंचार्ज समेत पांच चिकित्सक ड्यूटी पर होते हैं। एक चिकित्सक नाइट ड्यूटी पर रहता है। रोजाना 700 से अधिक की ओपीडी को देखना चुनौती भरा होता है। बावजूद इसके पूरी ओपीडी देखी जाती है। औद्योगिक नगरी परवाणू में चिकित्सक के पद सृजित किए जाने चाहिए।

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