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Solan News: नौणी विवि में 49 वोकेशनल ट्रेनर्स के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण शुरू
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इंटर्नशिप, कॅरिअर काउंसिलिंग और जॉब फेयर की प्रतिभागियों को मिलेगी जानकारी
सोलन। नौणी विश्वविद्यालय में मंगलवार से वोकेशनल ट्रेनर्स के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। यह कार्यक्रम समग्र शिक्षा, हिमाचल प्रदेश के प्रायोजन में नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशंस फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) परियोजना के तहत आयोजित किया जा रहा है। इसमें सोलन, ऊना, सिरमौर और शिमला जिलों के 49 वोकेशनल ट्रेनर्स भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रशिक्षकों को नवीनतम औद्यानिकी और कृषि आधारित व्यावसायिक जानकारी देना है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम वोकेशनल ट्रेनर्स को व्यावहारिक कौशल और प्रभावी प्रशिक्षण तकनीकों से परिचित कराएगा। इससे वे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण प्रदान कर सकेंगे। विश्वविद्यालय के विषय विशेषज्ञ प्रतिभागियों को औद्याेनिकी और कौशल विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी देंगे। प्रशिक्षण में फल उत्पादन, बाग प्रबंधन और फल-सब्जियों में टिकाऊ रोग-कीट प्रबंधन जैसे विषय शामिल हैं। फल प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, व्यावसायिक पुष्प उत्पादन और विपणन भी सिखाया जाएगा। खाद्य मशरूम की पहचान और प्रदर्शन तकनीक पर भी जोर रहेगा। इंटर्नशिप, कॅरिअर काउंसिलिंग और जॉब फेयर से संबंधित पहलुओं पर भी प्रतिभागियों को जानकारी दी जाएगी। व्याख्यानों के साथ व्यावहारिक गतिविधियां, प्रदर्शन और क्षेत्रीय भ्रमण भी होंगे।
विश्वविद्यालय के निदेशक विस्तार शिक्षा धर्मपाल शर्मा ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा की सफलता प्रशिक्षकों की दक्षता पर निर्भर करती है। बदलती तकनीक और रोजगार की आवश्यकताओं के अनुरूप वोकेशनल ट्रेनर्स का नियमित क्षमता निर्माण आवश्यक है। प्रशिक्षण के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। इनमें फल उत्पादन एवं बाग प्रबंधन प्रमुख हैं। फल एवं सब्जियों में टिकाऊ रोग एवं कीट प्रबंधन पर भी जानकारी दी जाएगी। फल प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के तरीके सिखाए जाएंगे। व्यावसायिक पुष्प उत्पादन एवं विपणन पर भी सत्र होंगे। खाद्य मशरूम की पहचान एवं प्रदर्शन तकनीक भी सिखाई जाएगी। इसके साथ ही इंटर्नशिप, कॅरिअर काउंसिलिंग और जॉब फेयर जैसे पहलुओं पर भी चर्चा होगी। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. मीना तथा सह-समन्वय डॉ. दिव्या चौधरी की ओर से किया जा रहा है।
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सोलन। नौणी विश्वविद्यालय में मंगलवार से वोकेशनल ट्रेनर्स के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। यह कार्यक्रम समग्र शिक्षा, हिमाचल प्रदेश के प्रायोजन में नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशंस फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) परियोजना के तहत आयोजित किया जा रहा है। इसमें सोलन, ऊना, सिरमौर और शिमला जिलों के 49 वोकेशनल ट्रेनर्स भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रशिक्षकों को नवीनतम औद्यानिकी और कृषि आधारित व्यावसायिक जानकारी देना है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम वोकेशनल ट्रेनर्स को व्यावहारिक कौशल और प्रभावी प्रशिक्षण तकनीकों से परिचित कराएगा। इससे वे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण प्रदान कर सकेंगे। विश्वविद्यालय के विषय विशेषज्ञ प्रतिभागियों को औद्याेनिकी और कौशल विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी देंगे। प्रशिक्षण में फल उत्पादन, बाग प्रबंधन और फल-सब्जियों में टिकाऊ रोग-कीट प्रबंधन जैसे विषय शामिल हैं। फल प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, व्यावसायिक पुष्प उत्पादन और विपणन भी सिखाया जाएगा। खाद्य मशरूम की पहचान और प्रदर्शन तकनीक पर भी जोर रहेगा। इंटर्नशिप, कॅरिअर काउंसिलिंग और जॉब फेयर से संबंधित पहलुओं पर भी प्रतिभागियों को जानकारी दी जाएगी। व्याख्यानों के साथ व्यावहारिक गतिविधियां, प्रदर्शन और क्षेत्रीय भ्रमण भी होंगे।
विश्वविद्यालय के निदेशक विस्तार शिक्षा धर्मपाल शर्मा ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा की सफलता प्रशिक्षकों की दक्षता पर निर्भर करती है। बदलती तकनीक और रोजगार की आवश्यकताओं के अनुरूप वोकेशनल ट्रेनर्स का नियमित क्षमता निर्माण आवश्यक है। प्रशिक्षण के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। इनमें फल उत्पादन एवं बाग प्रबंधन प्रमुख हैं। फल एवं सब्जियों में टिकाऊ रोग एवं कीट प्रबंधन पर भी जानकारी दी जाएगी। फल प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के तरीके सिखाए जाएंगे। व्यावसायिक पुष्प उत्पादन एवं विपणन पर भी सत्र होंगे। खाद्य मशरूम की पहचान एवं प्रदर्शन तकनीक भी सिखाई जाएगी। इसके साथ ही इंटर्नशिप, कॅरिअर काउंसिलिंग और जॉब फेयर जैसे पहलुओं पर भी चर्चा होगी। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. मीना तथा सह-समन्वय डॉ. दिव्या चौधरी की ओर से किया जा रहा है।
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