परवाणू में हिमुडा का डंगा फिर दरका, कई भवनों को खतरा
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सेक्टर-5 में हिमुडा द्वारा निर्माण स्थल के सामने बनाए डंगों में एक बार फिर दरारें आनी शुरू हो गई हैं। इस बार दरारें हिमुडा द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से बनाए जा रहे नए फ्लैटों से महज 10 फीट की दूरी पर आई हैं। यदि यहां पर आने वाले दिनों में तेज बारिश होती है तो इन दरारों के कारण भवन निर्माण के लिए लगाए बुनियादी डंगे के साथ करोड़ों रुपये का भवन भी धराशायी होने का अंदेशा है। हालांकि हिमुडा की ओर से एहतियात के तौर पर दरारों को सीमेंट से भरा जा रहा है, लेकिन यहां पर दरारें आने का सिलसिला खत्म नहीं हो रहा है। रोजाना यह दरारें बढ़ती जा रही हैं।
गौरतलब है कि शहर के सेक्टर पांच में करीब 19 करोड़ की लागत से 24 फ्लैटों का निर्माण किया जाना था। लेकिन यहां पर जैसे ही हिमुडा ने अपना निर्माण कार्य शुरू किया तो जमीन धंसनी शुरू हो गई। इसके बाद यहां पर काफी विवाद हुआ और फिर हिमुडा ने भी दबाव में आकर फ्लैटों की संख्या को कम कर दी। पिछले महीने 7 अगस्त को यहां पर एक बार फिर हादसा हुआ। यहां पर भवन निर्माण से पहले भवन के बुनियाद और सड़क के लिए लगाया डंगा गिर गया जो सीधे नीचे की ओर बने भवनों में जा गिरा। हालांकि इस हादसे में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ था, लेकिन इसके कारण 24 फ्लैट को भारी नुकसान पहुंचा।
उठाना पड़ेगा नुकसान
हादसे के बाद हिमुडा ने निर्माण कार्य में जांच के लिए चंडीगढ़ और रुड़की की एक्सपर्ट टीम से भी मुआयना करवाया था लेकिन इसकी रिपोर्ट भी अभी तक नहीं मिली है। 7 अगस्त को हुए हादसों के बाद हिमुडा ने यहां पर और जमीन न धंसे इसके लिए पूरे निर्माण स्थल में सीमेंट से रैंप बनाया था ताकि बारिश का पानी डंगे में न जा सकें। लेकिन यह कार्य भी सफल नहीं हो सका। अभी तक यहां दरारें आने का सिलसिला जारी है। दरारों के कारण यहां पर हिमुडा को कितना नुकसान उठाना पड़ेगा इसका पता आने वाले कुछ दिनों में ही चल सकेगा।
52.11 लाख का डंगा एक साल भी नहीं टिका
परवाणू के सेक्टर 5 में हिमुडा के फ्लैट निर्माण कार्य शुरू करने से पहले बुनियाद और सड़क के लिए करीब 86.91 लाख रुपये की लागत से डंगा लगाने का प्रपोजल तय हुआ था। इसमें करीब 52.11 लाख रुपये खर्चकर डंगा भी लगाया है, लेकिन इतने रुपये खर्च करने के बावजूद भी यह डंगा एक साल भी नहीं टीक सका है और धराशायी होकर नीचे गिर गया।
हिमुडा की रिपोर्ट का इंतजार
हिमुडा के अधिशासी अभियंता आरसी भाटिया ने कहा कि निर्माण स्थल में बारिश का पानी न जा सके, इसके लिए पूरे क्षेत्र में सीमेंट का रैंप तैयार किया है। इसके बाद जो दरारें आ रही हैं उसे भी तुरंत सीमेंट से भरा जा रहा है, ताकि बारिश का पानी न घुस सकें। इसके अलावा पिछले दिनों रुड़की की टेक्निकल एक्सपर्ट टीम से भी मुआयना करवाया है, जिसकी रिपोर्ट अभी नहीं आ सकी है।