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Solan News: ग्रसित पौधों के सबसे ऊपरी पत्ते और मध्य छल्ले में पानी या राख भरें किसान
Fri, 19 Jul 2024 11:23 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Fri, 19 Jul 2024 11:23 PM IST
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मक्की में लगने वाले सुंडी रोग को लेकर कृषि विभाग ने दिए दिशा-निर्देश
सोलन में 23,500 हेक्टेयर भूमि पर की जाती है मक्की की बिजाई
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले में सूखे के चलते मक्की की फसल में लगे फाल आर्मी वार्म (सुंडी) रोग से बचाव के लिए कृषि विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। जिला सोलन में करीब 23,500 हेक्टेयर भूमि पर मक्का की खेती की जाती है जिससे लगभग 58,750 मीट्रिक टन उत्पादन होता है। इस वर्ष फाल आर्मी वार्म रोग के प्रकोप के कारण जिला सोलन में मक्का की खेती करने वाले किसानों को परेशानी झेलनी पड़ी रही है।
कृषि विभाग के उपनिदेशक ने बताया कि नाइट्रोजन के ज्यादा उपयोग करने के कारण पौधों में रोगों और कीटों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो जाती है। इस कारण विभिन्न किस्म के रोग और कीड़े फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक लगभग 4ए750 हेक्टेयर भूमि पर 10 से 15 प्रतिशत पौधे सुंडी रोग से ग्रसित पाए गए हैं। सोलन जिले के किसानों को मक्का की फसल को फाल आर्मी वार्म के प्रकोप से बचाने के लिए अपनी फसल का नियमित सर्वेक्षण करना चाहिए। यदि खेत में 5 प्रतिशत से अधिक पौधों पर फाल आर्मी कीड़े का प्रकोप पाया जाता है तो सबसे पहले खेत की मिटटी, रेत, राख ग्रसित पौधों के सबसे ऊपरी पत्ते व मध्य छल्ले में भरें और यदि उसके बाद बारिश न हो तो पानी भर दें। ऐसा करने से सुंडियां मर जाएंगी।
इनसेट
ऐसे भी कर सकते हैं बचाव
किसान खेत में प्रकाश प्रपंच या फेरोमोन ट्रैप स्थापित करें। इसके अलावा जैविक कीटनाशकों जैसे बीटी (2 ग्राम प्रति लीटर पानी), नीम आधारित कीटनाशकों (2 मिली प्रति लीटर पानी), फफूंद आधारित कीटनाशकों मेटारहीजीयम (5 ग्राम प्रति लीटर पानी) आदि का उपयोग करें। उन्होंने बताया कि मक्का की फसल में परजीवियों जैसे ट्राइकोग्रेम्मा, कोटेशिया, टेलीनोमस आदि की संख्या बढ़ाने के लिए इनमें प्रयोगशाला में तैयार परजीवियों के अंडे छोड़ें। उन्होंने बताया कि यदि उक्त उपायों के बावजूद फाल आर्मी वार्म का प्रकोप कम नहीं होता है तो अंतिम उपाय के रूप में रसायनों जैसे स्पाईनोसैड (.3 मिली प्रति लीटर पानी), कलोरनट्रेनिलिप्रोल (0.3 मिली लीटर प्रति लीटर पानी), एमाबेक्टीन बेन्जोएट (0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी), थायोडीकार्ब (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) में मिलाकर ग्रसित पौधों के सबसे ऊपरी पत्ते व मध्य छल्ले में भरें।
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इनसेट
ये बरतें सावधानी
ग्रसित पौधों के अवशेष खेत में न छोड़ें नहीं तो आगामी फसल को नुकसान हो सकता है। यह कीड़ा 80 से ज्यादा फसलों को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने अगले साल मक्की की फसल के साथ उड़द, लोबिया आदि दाल की फसल अवश्य लगाएं क्योंकि ऐसी मिश्रित फसल में फाल आर्मी वार्म कीड़े का प्रकोप कम होता है और मक्का की फसल को नाइट्रोजन दलहन फसल से मुफ्त में प्राप्त होती है। मक्का की फसल के चारों ओर 3-4 लाइनें नेपियर घास की ट्रैप फसल के रूप में मुख्य फसल से 10 दिन पहले लगाएं ताकि वहां पर फाल आर्मी कीड़े की उपस्थिति होते ही उन्हें ट्रैप करके वहीं समाप्त कर दिया जाए।
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सोलन में 23,500 हेक्टेयर भूमि पर की जाती है मक्की की बिजाई
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले में सूखे के चलते मक्की की फसल में लगे फाल आर्मी वार्म (सुंडी) रोग से बचाव के लिए कृषि विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। जिला सोलन में करीब 23,500 हेक्टेयर भूमि पर मक्का की खेती की जाती है जिससे लगभग 58,750 मीट्रिक टन उत्पादन होता है। इस वर्ष फाल आर्मी वार्म रोग के प्रकोप के कारण जिला सोलन में मक्का की खेती करने वाले किसानों को परेशानी झेलनी पड़ी रही है।
कृषि विभाग के उपनिदेशक ने बताया कि नाइट्रोजन के ज्यादा उपयोग करने के कारण पौधों में रोगों और कीटों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो जाती है। इस कारण विभिन्न किस्म के रोग और कीड़े फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक लगभग 4ए750 हेक्टेयर भूमि पर 10 से 15 प्रतिशत पौधे सुंडी रोग से ग्रसित पाए गए हैं। सोलन जिले के किसानों को मक्का की फसल को फाल आर्मी वार्म के प्रकोप से बचाने के लिए अपनी फसल का नियमित सर्वेक्षण करना चाहिए। यदि खेत में 5 प्रतिशत से अधिक पौधों पर फाल आर्मी कीड़े का प्रकोप पाया जाता है तो सबसे पहले खेत की मिटटी, रेत, राख ग्रसित पौधों के सबसे ऊपरी पत्ते व मध्य छल्ले में भरें और यदि उसके बाद बारिश न हो तो पानी भर दें। ऐसा करने से सुंडियां मर जाएंगी।
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ऐसे भी कर सकते हैं बचाव
किसान खेत में प्रकाश प्रपंच या फेरोमोन ट्रैप स्थापित करें। इसके अलावा जैविक कीटनाशकों जैसे बीटी (2 ग्राम प्रति लीटर पानी), नीम आधारित कीटनाशकों (2 मिली प्रति लीटर पानी), फफूंद आधारित कीटनाशकों मेटारहीजीयम (5 ग्राम प्रति लीटर पानी) आदि का उपयोग करें। उन्होंने बताया कि मक्का की फसल में परजीवियों जैसे ट्राइकोग्रेम्मा, कोटेशिया, टेलीनोमस आदि की संख्या बढ़ाने के लिए इनमें प्रयोगशाला में तैयार परजीवियों के अंडे छोड़ें। उन्होंने बताया कि यदि उक्त उपायों के बावजूद फाल आर्मी वार्म का प्रकोप कम नहीं होता है तो अंतिम उपाय के रूप में रसायनों जैसे स्पाईनोसैड (.3 मिली प्रति लीटर पानी), कलोरनट्रेनिलिप्रोल (0.3 मिली लीटर प्रति लीटर पानी), एमाबेक्टीन बेन्जोएट (0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी), थायोडीकार्ब (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) में मिलाकर ग्रसित पौधों के सबसे ऊपरी पत्ते व मध्य छल्ले में भरें।
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ये बरतें सावधानी
ग्रसित पौधों के अवशेष खेत में न छोड़ें नहीं तो आगामी फसल को नुकसान हो सकता है। यह कीड़ा 80 से ज्यादा फसलों को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने अगले साल मक्की की फसल के साथ उड़द, लोबिया आदि दाल की फसल अवश्य लगाएं क्योंकि ऐसी मिश्रित फसल में फाल आर्मी वार्म कीड़े का प्रकोप कम होता है और मक्का की फसल को नाइट्रोजन दलहन फसल से मुफ्त में प्राप्त होती है। मक्का की फसल के चारों ओर 3-4 लाइनें नेपियर घास की ट्रैप फसल के रूप में मुख्य फसल से 10 दिन पहले लगाएं ताकि वहां पर फाल आर्मी कीड़े की उपस्थिति होते ही उन्हें ट्रैप करके वहीं समाप्त कर दिया जाए।