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समुद्र मंथन से निकले विष को भगवान शिव ने पिया : पंडित हेमंत
Fri, 23 Aug 2024 11:58 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Fri, 23 Aug 2024 11:58 PM IST
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कुनिहार में भागवत कथा के दौरान कथा सुनते लोग। संवाद
समुद्र मंथन से निकले विष को
भगवान शिव ने पिया : पंडित हेमंत
कुनिहार में चल रही भागवत कथा में सुनाई समुद्र मंथन की कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार(सोलन)। कुनिहार के प्राचीन ठाकुर द्वारा मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा में कथावाचक पंडित हेमंत गर्गाचार्य ने कई प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि एक बार देवताओं और दैत्यों ने मिल कर भगवान विष्णु के निर्देशानुसार समुद्र मंथन की योजना बनाई ताकि अमृत प्राप्त किया जा सके। परंतु समुद्र मंथन के समय सबसे पहले हलाहल विष निकला था। वह विष इतना विषैला था कि उसके भीषण ताप से समस्त संसार पीड़ित हो गया। देव-दैत्य बिना पिए उसको सूंघते ही बेसुध से हो गए। तब भगवान ने अपनी शक्ति से उनको ठीक किया। देवों ने जब इस विष से बचने का उपाय पूछा तो भगवान विष्णु ने कहा कि शिवजी से प्रार्थना करें तो वे इसका हल निकाल लेंगे। भगवान शिव ने देवताओं की प्रार्थना पर हलाहल विष को पीने का निर्णय लिया। शिव ने अपने हाथों में उस विष को लिया व पी गए। किंतु उसको निगला नहीं। उन्होंने अपने गले में उसे धारण कर लिया और उनका गला नीला हो गया। इसलिए उन्हें नीलकंठ भी कहते हैं। कमेटी सदस्य प्रदीप पूरी ने बताया कि कथा का समय दोपहर 2:00 से शाम 5:00 बजे तक है। कथा विराम व आरती के बाद सभी में भोग बांटा जाता है।
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भगवान शिव ने पिया : पंडित हेमंत
कुनिहार में चल रही भागवत कथा में सुनाई समुद्र मंथन की कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार(सोलन)। कुनिहार के प्राचीन ठाकुर द्वारा मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा में कथावाचक पंडित हेमंत गर्गाचार्य ने कई प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि एक बार देवताओं और दैत्यों ने मिल कर भगवान विष्णु के निर्देशानुसार समुद्र मंथन की योजना बनाई ताकि अमृत प्राप्त किया जा सके। परंतु समुद्र मंथन के समय सबसे पहले हलाहल विष निकला था। वह विष इतना विषैला था कि उसके भीषण ताप से समस्त संसार पीड़ित हो गया। देव-दैत्य बिना पिए उसको सूंघते ही बेसुध से हो गए। तब भगवान ने अपनी शक्ति से उनको ठीक किया। देवों ने जब इस विष से बचने का उपाय पूछा तो भगवान विष्णु ने कहा कि शिवजी से प्रार्थना करें तो वे इसका हल निकाल लेंगे। भगवान शिव ने देवताओं की प्रार्थना पर हलाहल विष को पीने का निर्णय लिया। शिव ने अपने हाथों में उस विष को लिया व पी गए। किंतु उसको निगला नहीं। उन्होंने अपने गले में उसे धारण कर लिया और उनका गला नीला हो गया। इसलिए उन्हें नीलकंठ भी कहते हैं। कमेटी सदस्य प्रदीप पूरी ने बताया कि कथा का समय दोपहर 2:00 से शाम 5:00 बजे तक है। कथा विराम व आरती के बाद सभी में भोग बांटा जाता है।