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Solan News: पांच माह बीत जाने के बाद भी पिंजौर-नालागढ़ मार्ग के नहीं खुल पाएं टेंडर

Tue, 13 Jan 2026 12:23 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 13 Jan 2026 12:23 AM IST
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Tenders for the Pinjore-Nalagarh road remain unopened even after five months.
बद्दी - नालागढ फोरलेन की खस्तहालत - संवाद।
9 बार टली टेंडर की तारीख, 113 करोड़ बढ़ी लागत, सोमवार को एनएचएआई बैठक न होने से नहीं खुले टेंडर
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अब तक डेढ़ गुना बढ़ गई लागत, काम में भी हुई एक साल की देरी
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन को जोड़ने वाले पिंजौर-नालागढ़ फोरलेन का काम राजनीति और प्रशासनिक ढुलमुल रवैये की भेंट चढ़ गया है। सितंबर माह में टेंडर प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद पांच महीने बीत जाने पर भी अब तक टेंडर नहीं खुल पाए हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इस दौरान 9 बार टेंडर खोलने की तिथियां निर्धारित की गईं, लेकिन हर बार जनता को केवल नई तारीख ही हाथ लगी। सोमवार को टेंडर खुलने की उम्मीद थी, लेकिन एक बार फिर प्रक्रिया अटक गई। इस लेटलतीफी के कारण फोरलेन की अनुमानित लागत 557 करोड़ से बढ़कर अब 670 करोड़ रुपये पहुंच गई है। यानी देरी की वजह से सरकारी खजाने पर सीधे तौर पर 113 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है। बीबीएन के स्थानीय लोगों और उद्यमियों में इस देरी को लेकर भारी रोष है। चर्चा है कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार होने के कारण केंद्र की भाजपा सरकार टेंडर प्रक्रिया में दिलचस्पी नहीं ले रही है। लोगों का कहना है कि राजनीतिक खींचतान का खामियाजा आम जनता और उद्योग जगत को भुगतना पड़ रहा है। खराब सड़कों के कारण बरसात में स्थिति इतनी भयावह हो गई थी कि ट्रक चालकों को कई किलोमीटर का लंबा चक्कर काटकर वाया नालागढ़ जाना पड़ा। एनएचएआई के प्रोजेक्ट प्रभारी असलम खान का कहना है कि एनएचएआई की कार्य समिति की बैठक न हो पाने के कारण टेंडर नहीं खुल सके हैं। फिलहाल अगली तिथि भी निर्धारित नहीं की गई है।
पटेल कंपनी ने बीच में छोड़ा था काम
बता दें कि चार साल पहले एनएचएआई ने गुजरात की पटेल कंपनी को 469 करोड़ रुपये में इसका ठेका दिया था। कंपनी को 30 महीने का समय मिला था, जिसे बाद में एक साल और बढ़ाया गया। इसके बावजूद कंपनी महज 42 फीसदी काम ही कर सकी और अंततः 6 जून को काम छोड़ दिया। 11 सितंबर को दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई थी, जो अब तक अधर में है।
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तारीख के जाल में उलझे टेंडर

प्रोजेक्ट के लिए 11 सितंबर को टेंडर लगाए गए थे, जिन्हें 31 अक्तूबर को खोला जाना था। इसके बाद जो सिलसिला शुरू हुआ, उसने हर किसी को हैरान कर दिया। अक्तूबर के बाद पहली तारीख 14 नवंबर रखी गई। 14 को टेंडर नहीं खुले, फिर 17, 24 और 27 नवंबर की तारीखें रखी गई। दिसंबर में भी 12, 19 और 27 तारीख को टेंडर टलते रहे। अंतिम उम्मीद 12 जनवरी थी, लेकिन सोमवार को भी टेंडर नहीं खुल पाए।
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कोट
एनएचएआई की कार्य समिति की बैठक न होने के कारण अभी टेंडर नहीं खुल पाए हैं। अब प्रोजेक्ट की लागत भी बढ़कर 670 करोड़ हो गई है। अगली तिथि अभी निर्धारित नहीं की गई है।-असलम खान, प्रोजेक्ट प्रभारी, एनएचएआई
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