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Solan News: एनएचएआई के लिए चुनौती बना चक्कीमोड़ के पहाड़ को रोकना
Fri, 02 Aug 2024 11:15 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Fri, 02 Aug 2024 11:15 PM IST
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पहाड़ से लगातार खिसक रही मिट्टी, कंक्रीट के बने डंगे भी ढहे
150 फुट ऊंचे पहाड़ को रोकने के लिए लगा रहे मात्र पांच मीटर डंगा
अब बीआरओ से लेनी होगी सलाह, तभी रुक सकेंगे पहाड़ ढहने से
एस ठाकुर
धर्मपुर(सोलन)। परवाणू-शिमला फोरलेन पर चक्कीमोड़ के पहाड़ को रोकना एनएचएआई के लिए चुनौती बनता जा रहा है। दो माह पहले एनएचएआई की ओर से पहाड़ की रोकथाम के लिए कंक्रीट के डंगे लगाए गए थे। मिट्टी वाले पहाड़ को रोकने के लिए लगाए गए डंगे बारिश में पहाड़ी दरकने से टूट चुके हैं। ऐसे में डंगों के निर्माण पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। एनएचएआई को अब डंगे लगाने के लिए दोबारा प्रस्ताव बनाना होगा। पहाड़ी को रोकने के लिए कंक्रीट के पांच मीटर ऊंचाई के डंगे लगाए जाने थे लेकिन मौके पर जो डंगे लगाए जा रहे हैं, उनकी ऊंचाई पूरी नहीं है। स्थानीय इंजीनियरों का कहना है की 150 फुट ऊंचाई वाले पहाड़ों को पांच मीटर कंक्रीट के डंगे कैसे रोक सकते हैं। इसके अलावा चक्कीमोड़ में दो तरह के पहाड़ हैं। एक पहाड़ पत्थर वाला है, जबकि दूसरा मिट्टी का है। अब मिट्टी के पहाड़ को रोकना एनएचएआई के लिए चुनौती पूर्ण कार्य रहेगा। इसके लिए एनएचएआई को लोक निर्माण विभाग के उच्च अधिकारियों या बीआरओ से सलाह लेनी होगी। यह दोनों एजेंसियां पहाड़ों पर निर्माण के लिए एक्सपर्ट हैं। इंजीनियरों का मानना है कि पहाड़ से मिट्टी को नीचे लाना होगा, जिससे पहाड़ पर फंसी मिट्टी डंगों को क्षति ना पहुंचाए।
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150 फुट ऊंचे पहाड़ को रोकने के लिए लगा रहे मात्र पांच मीटर डंगा
अब बीआरओ से लेनी होगी सलाह, तभी रुक सकेंगे पहाड़ ढहने से
एस ठाकुर
धर्मपुर(सोलन)। परवाणू-शिमला फोरलेन पर चक्कीमोड़ के पहाड़ को रोकना एनएचएआई के लिए चुनौती बनता जा रहा है। दो माह पहले एनएचएआई की ओर से पहाड़ की रोकथाम के लिए कंक्रीट के डंगे लगाए गए थे। मिट्टी वाले पहाड़ को रोकने के लिए लगाए गए डंगे बारिश में पहाड़ी दरकने से टूट चुके हैं। ऐसे में डंगों के निर्माण पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। एनएचएआई को अब डंगे लगाने के लिए दोबारा प्रस्ताव बनाना होगा। पहाड़ी को रोकने के लिए कंक्रीट के पांच मीटर ऊंचाई के डंगे लगाए जाने थे लेकिन मौके पर जो डंगे लगाए जा रहे हैं, उनकी ऊंचाई पूरी नहीं है। स्थानीय इंजीनियरों का कहना है की 150 फुट ऊंचाई वाले पहाड़ों को पांच मीटर कंक्रीट के डंगे कैसे रोक सकते हैं। इसके अलावा चक्कीमोड़ में दो तरह के पहाड़ हैं। एक पहाड़ पत्थर वाला है, जबकि दूसरा मिट्टी का है। अब मिट्टी के पहाड़ को रोकना एनएचएआई के लिए चुनौती पूर्ण कार्य रहेगा। इसके लिए एनएचएआई को लोक निर्माण विभाग के उच्च अधिकारियों या बीआरओ से सलाह लेनी होगी। यह दोनों एजेंसियां पहाड़ों पर निर्माण के लिए एक्सपर्ट हैं। इंजीनियरों का मानना है कि पहाड़ से मिट्टी को नीचे लाना होगा, जिससे पहाड़ पर फंसी मिट्टी डंगों को क्षति ना पहुंचाए।