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सोलन अस्पताल में डॉक्टर लिख रहे बाहर की दवाएं
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सोलन। क्षेत्रीय अस्पताल में मरीजों को चिकित्सक बाहर से दवाइयां सुझा रहे हैं। इससे मरीजों को निजी दवा दुकानों से महंगे दामों पर दवाइयां खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। आलम यह है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को जेनेरिक दवाइयां नहीं लिखी जा रही हैं। इससे मरीजों को मानसिक परेशानी के साथ आर्थिक परेशानी उठानी पड़ रही है।
हालांकि सरकार के निर्देशानुसार मरीजों को निजी दवा दुकानों की बजाए अस्पताल से ही दवाइयां लिखने के निर्देश दिए हैं। अस्पताल प्रशासन ने भी चिकित्सकों को जेनेरिक दवाइयां लिखने के निर्देश दिए थे। लेकिन नियमों को दरकिनार कर अपने फायदे के लिए निजी दवा दुकानों से ही दवाई लिखने का सिलसिला जारी है। इन पर कोई भी कार्रवाई होती दिखाई नहीं दे रही है।
इससे नियमों की अवहेलना हो रही है जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने दवाइयों का स्टॉक पूरा होने और अस्पताल से ही जेनेरिक दवाइयां देने का हवाला दिया जा रहा है। इसी के साथ अस्पताल में बने दवा काउंटर सहित सरकारी दवाई की दुकान और जन औषधि केंद्र में मरीजों की भीड़ कम और निजी क्लिनिकों पर ज्यादा बढ़ने लगी है। क्षेत्रीय अस्पताल बढ़ा होने के कारण स्थानीय ही नहीं आसपास के क्षेत्रों से भी रोजाना हजारों की संख्या में मरीज अपने उपचार के लिए पहुंचते हैं। इन्हें चिकित्सक अधिकतर दवाइयां बाहर से ही लिख रहे हैं।
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जेनेरिक दवाएं लिखने के आदेश हैं : डॉ. हांडा
एसएमओ डॉ. अशोक हांडा ने बताया कि अस्पताल में तैनात चिकित्सकों को जेनेरिक दवाइयां लिखने के आदेश है। उन्होंने बताया कि यदि कोई चिकित्सक ऐसा करता है तो वह खुद का जोखिम है। उन्होंने बताया कि मरीजों को अस्पताल से ही दवाइयां दी जा रही हैं।
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हालांकि सरकार के निर्देशानुसार मरीजों को निजी दवा दुकानों की बजाए अस्पताल से ही दवाइयां लिखने के निर्देश दिए हैं। अस्पताल प्रशासन ने भी चिकित्सकों को जेनेरिक दवाइयां लिखने के निर्देश दिए थे। लेकिन नियमों को दरकिनार कर अपने फायदे के लिए निजी दवा दुकानों से ही दवाई लिखने का सिलसिला जारी है। इन पर कोई भी कार्रवाई होती दिखाई नहीं दे रही है।
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इससे नियमों की अवहेलना हो रही है जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने दवाइयों का स्टॉक पूरा होने और अस्पताल से ही जेनेरिक दवाइयां देने का हवाला दिया जा रहा है। इसी के साथ अस्पताल में बने दवा काउंटर सहित सरकारी दवाई की दुकान और जन औषधि केंद्र में मरीजों की भीड़ कम और निजी क्लिनिकों पर ज्यादा बढ़ने लगी है। क्षेत्रीय अस्पताल बढ़ा होने के कारण स्थानीय ही नहीं आसपास के क्षेत्रों से भी रोजाना हजारों की संख्या में मरीज अपने उपचार के लिए पहुंचते हैं। इन्हें चिकित्सक अधिकतर दवाइयां बाहर से ही लिख रहे हैं।
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जेनेरिक दवाएं लिखने के आदेश हैं : डॉ. हांडा
एसएमओ डॉ. अशोक हांडा ने बताया कि अस्पताल में तैनात चिकित्सकों को जेनेरिक दवाइयां लिखने के आदेश है। उन्होंने बताया कि यदि कोई चिकित्सक ऐसा करता है तो वह खुद का जोखिम है। उन्होंने बताया कि मरीजों को अस्पताल से ही दवाइयां दी जा रही हैं।