{"_id":"5d2dff1b8ebc3e6d1a13deca","slug":"soil-test-solan-news-sml300651538","type":"story","status":"publish","title_hn":"भवन निर्माण से पहले मिट्टी के परीक्षण से गुरेज कर रहे ग्रामीण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भवन निर्माण से पहले मिट्टी के परीक्षण से गुरेज कर रहे ग्रामीण
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धर्मपुर(सोलन)। भवन निर्माण के तमाम नियमों से दूर ग्रामीण इलाकों में बहुमंजिला भवन की हद सिर्फ जमीन ही तय कर सकती है। निर्माण से पूर्व यदि मिट्टी का परीक्षण करवाया जाए तो इसका खुलासा हो सकता है कि भवन पर कितना बोझ लादा जा सकता है। जिसके लिए जमीन में पांच से सात फीट गहरा गड्ढा खोदकर मिट्टी निकाली जाती है और उसका लैब में परीक्षण किया जाता है। परिणाम के आधार पर ही निर्माण कार्य किया जा सकता है। इसके अलावा दूसरा कोई विकल्प फिलहाल मौजूद नहीं है। जिससे ग्रामीण इलाकों में बहुमंजिला भवन का प्रारूप तय हो सके। कुमारहट्टी-नाहन मार्ग पर भी यदि मिट्टी का परीक्षण किया जाता तो भवन की मंजिलें तय हो सकती थी और अतिरिक्त बोझ से बचा जा सकता था। उसके अनुसार ही भवन मालिक को अपने भवन की नींव रखनी चाहिए थी। सरकारी भवनों को बनाते समय प्राथमिकता में सबसे पहले भूमि की मिट्टी की जांच कर इमारत को खड़ा किया जाता है। लेकिन आवासीय भवनों को बनाते समय भवन मालिक इन सभी कार्य का ध्यान नहीं रखते। ग्रामीण क्षेत्र या शहरी क्षेत्र मे भी सोयल बिंयरिग कैप्स्टी नहीं करवाई जाती है। मिट्टी की जांच प्राइवेट एजेंसी के माध्यम से से करवाने में लगभग दस हजार तक खर्च आता है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय इंजीनियर की देखरेख में भवन निर्माण हो तो हादसे और कम किए जा सकते हैं। कुमारहट्टी-नाहन मार्ग पर निर्मित ज्यादातर भवनों के निर्माण से पूर्व मिट्टी का परीक्षण नहीं हुआ है। ग्रामीण इलाकों में निर्माण संबंधित नियम न होने पर भी सवाल उठ रहे हैं।
नाहन मार्ग पर छोटी नालियां भी बढ़ा रही मुसीबत
कुमारहट्टी-नाहन मार्ग पर हादसे की वजह सड़क किनारे बनी नालियां भी बनी हैं। सड़क किनारे बनी नालियों को ज्यादा गहरा नहीं किया गया है। जिसकी वजह से बारिश के दौरान इन नालियों में पानी ओवरफ्लो होता है जो सीधे ढलान की तरफ बने घरों में चला जाता है। इस पानी के बरसात में निरंतर बहते रहने की वजह से भी भवनों की नींव पर असर पड़ रहा है।
मिट्टी के परीक्षण से घटती है हादसे की संभावनाएं : टीसीपी
नगर नियोजक लीला श्याम का कहना है कि ग्रामीण इलाकों के लिए कोई नियम नहीं बने हैं। मिट्टी परीक्षण के लिए ग्रामीण बाध्य नहीं हैं। फिर भी यदि ग्रामीण भवन निर्माण से पूर्व मिट्टी का परीक्षण करवाएं तो वे इस तरह के हादसे से अपने भवन को बचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मिट्टी के परीक्षण से जमीन की क्षमता का पता लग सकता है और उसके मुताबिक निर्माण करने से हादसे की संभावना बेहद कम हो जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
नाहन मार्ग पर छोटी नालियां भी बढ़ा रही मुसीबत
कुमारहट्टी-नाहन मार्ग पर हादसे की वजह सड़क किनारे बनी नालियां भी बनी हैं। सड़क किनारे बनी नालियों को ज्यादा गहरा नहीं किया गया है। जिसकी वजह से बारिश के दौरान इन नालियों में पानी ओवरफ्लो होता है जो सीधे ढलान की तरफ बने घरों में चला जाता है। इस पानी के बरसात में निरंतर बहते रहने की वजह से भी भवनों की नींव पर असर पड़ रहा है।
विज्ञापन
मिट्टी के परीक्षण से घटती है हादसे की संभावनाएं : टीसीपी
नगर नियोजक लीला श्याम का कहना है कि ग्रामीण इलाकों के लिए कोई नियम नहीं बने हैं। मिट्टी परीक्षण के लिए ग्रामीण बाध्य नहीं हैं। फिर भी यदि ग्रामीण भवन निर्माण से पूर्व मिट्टी का परीक्षण करवाएं तो वे इस तरह के हादसे से अपने भवन को बचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मिट्टी के परीक्षण से जमीन की क्षमता का पता लग सकता है और उसके मुताबिक निर्माण करने से हादसे की संभावना बेहद कम हो जाती है।
विज्ञापन