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Solan News: नौणी विवि के वैज्ञानिकों ने सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति पुरस्कार जीता
Thu, 15 Feb 2024 11:50 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Thu, 15 Feb 2024 11:50 PM IST
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वारणसी विश्वविद्यालय में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति पुरस्का
बनारस हिंदू विवि वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हुआ आयोजित
प्रदेश की विभिन्न ऊंचाई पर उगने वाले नए सेब पर किया था शोध
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। नौणी विवि के वैज्ञानिकों ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी में जलवायु परिवर्तन और कृषि-पारिस्थितिकी तंत्र पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति का पुरस्कार जीता। हिमाचल प्रदेश में विभिन्न ऊंचाई पर उगने वाली पारंपरिक और नई सेब की किस्मों का फेनोथर्मल रिस्पॉन्स शीर्षक वाला पेपर डॉ. एसके भारद्वाज, डॉ. हुकम चंद, मुस्कान नेगी, लेखिका परिहार और शालिनी शर्मा द्वारा लिखा गया था। सम्मेलन के दौरान डॉ. एसके भारद्वाज और डॉ. हुकम चंद ने यह पेपर प्रस्तुत किया।
इस शोध में ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमाचल प्रदेश के कृषि-जलवायु क्षेत्र-विशिष्ट- मध्य-पहाड़ी सब ह्यूमिड, उच्च-पहाड़ी वेट टेंपरेट और उच्च-पहाड़ी शुष्क समशीतोष्ण क्षेत्र में नए और पारंपरिक सेब की किस्मों दोनों के संबंध में प्रभावी चिल यूनिट संचय और फल गुणवत्ता मानकों पर ध्यान केंद्रित किया। इस अध्ययन से संकेत मिलता है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण राज्य के इन क्षेत्रों में प्रभावी चिल यूनिट की घंटों में कमी देखी गई है।
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प्रदेश की विभिन्न ऊंचाई पर उगने वाले नए सेब पर किया था शोध
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। नौणी विवि के वैज्ञानिकों ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी में जलवायु परिवर्तन और कृषि-पारिस्थितिकी तंत्र पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति का पुरस्कार जीता। हिमाचल प्रदेश में विभिन्न ऊंचाई पर उगने वाली पारंपरिक और नई सेब की किस्मों का फेनोथर्मल रिस्पॉन्स शीर्षक वाला पेपर डॉ. एसके भारद्वाज, डॉ. हुकम चंद, मुस्कान नेगी, लेखिका परिहार और शालिनी शर्मा द्वारा लिखा गया था। सम्मेलन के दौरान डॉ. एसके भारद्वाज और डॉ. हुकम चंद ने यह पेपर प्रस्तुत किया।
इस शोध में ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमाचल प्रदेश के कृषि-जलवायु क्षेत्र-विशिष्ट- मध्य-पहाड़ी सब ह्यूमिड, उच्च-पहाड़ी वेट टेंपरेट और उच्च-पहाड़ी शुष्क समशीतोष्ण क्षेत्र में नए और पारंपरिक सेब की किस्मों दोनों के संबंध में प्रभावी चिल यूनिट संचय और फल गुणवत्ता मानकों पर ध्यान केंद्रित किया। इस अध्ययन से संकेत मिलता है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण राज्य के इन क्षेत्रों में प्रभावी चिल यूनिट की घंटों में कमी देखी गई है।
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