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श्रीमद्भागवत के आचरण से मोक्ष प्राप्ति
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
Updated Fri, 29 Apr 2016 10:53 PM IST
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सोलन में सत्संग सुनने उमड़ी लोगों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
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सोलन मुरारी मार्केट में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन आचार्य कमलकांत जी महाराज ने बताया कि पूरे सौ वर्षों के बाद भगवान श्रीकृष्ण और बलराम जी का मिलन कुरुक्षेत्र में सूर्य ग्रहण पर हुआ था। फिर अर्जुन से सुभद्रा का विवाह और भोमासुर की कथा का वर्णन किया। कहा कि जिस समय भगवान का स्वधम गमन हुआ उस समय एक प्रकाश पुंज आकाश में भ्रमण कर समाहित हो गया।
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फिर कलियुग के धर्मों का वर्णन किया और शुकदेव जी ने परीक्षित को अंतिम उपदेश दिया। उध्र, तक्षक के काटने के उपरांत परीक्षित जी को परम गति की प्राप्ति हुई। सभी श्रद्धालुओं को समझाते हुए आचार्य ने कहा कि जो सच्चे मन, लगन एवं विश्वास से भगवान के इन चरित्रों को श्रवण करता है उसकी कभी मृत्यु नहीं होती बल्कि मोक्ष की प्राप्ति होती है। आज की कथा के बाद पूर्णाहुति की गई और उसके पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन समिति द्वारा किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
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