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Solan News: अर्की के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती से जनता बेहाल, जुगाड़ से चल रही व्यवस्था
Sat, 18 Jul 2026 11:38 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sat, 18 Jul 2026 11:38 PM IST
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जयदेव ठाकुर, जघून। अर्की
ग्राउंड रिपोर्ट
अर्की (सोलन)। अर्की विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में हर साल गर्मियों और बरसात के मौसम में बार-बार लगने वाले बिजली के कटों से स्थानीय लोग परेशान हैं। विद्युत बोर्ड की लचर व्यवस्था और ढीली कार्यशैली के कारण ग्रामीणों में रोष है। लोगों का कहना है कि बरसात में मौसम खराब होने पर तो बिजली गुल होती ही है, लेकिन मौसम सामान्य रहने पर भी साल के बारह महीने अघोषित कट लगना आम बात हो गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, जब से क्षेत्र में बिजली पहुंची है, तब से यह समस्या वैसी ही बनी हुई है। विभाग हर बार मरम्मत और रखरखाव का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेता है, जबकि धरातल पर कर्मचारी सिर्फ जुगाड़ू व्यवस्था के सहारे लाइनें चला रहे हैं। तकनीक के इस दौर में भी पुराने ढर्रे पर चल रही बिजली व्यवस्था के खिलाफ अब ग्रामीण सरकार और प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं। लोगों की मांग है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक स्थापित कर बाधारहित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
इनसेट
गर्मियों में समय रहते काम नहीं करता विभाग
गांवों में हर रोज बिजली के लंबे कट लगना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अर्की के ग्रामीण क्षेत्रों में आज तक बिजली व्यवस्था का कोई आधुनिकीकरण नहीं हुआ। बिजली की लाइनें जंगलों और खेतों के ऊपर से गुजरती हैं, जो पेड़ों से टकराकर आए दिन बंद हो जाती हैं। यह कार्य गर्मियों में समय रहते पूरा हो जाना चाहिए ताकि जनता परेशान न हो।
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रमेश ठाकुर (पूर्व अध्यक्ष, ब्लॉक कांग्रेस अर्की)
इनसेट
काम ठप, पर समय पर आ जाता है बिल
गांव में बिजली जाना अब रोज का काम बन गया है। बिजली न होने से पशुओं का चारा काटने वाली मशीनें नहीं चल पातीं। दिन-रात को पंखे बंद रहने से भीषण गर्मी और मच्छरों के कारण जीना मुहाल है। बिजली भले ही आए न आए, लेकिन विभाग का बिल समय पर जरूर आ जाता है। सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
जयदेव ठाकुर (ग्रामीण, जघून)
इनसेट
ठोस कदम उठाए सरकार और बोर्ड
गर्मियों और बरसात में कट लगने से लोगों की समस्याएं दोगुनी हो जाती हैं। पंखे बंद होने से लोग गर्मी से बेहाल हैं और मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। यही नहीं, पानी की मोटर, आटा-चक्की, घास टोका करने की मशीन और फ्रिज जैसे उपकरण बंद रहने से लोगों का कारोबार और दैनिक काम पूरी तरह बाधित हो रहे हैं। विद्युत बोर्ड को ठोस कदम उठाने चाहिए।
शशिकांत शर्मा (जिला परिषद सदस्य, सूरजपुर)
इनसेट
ठप हो रहे ऑनलाइन कार्य, आधुनिक तकनीक की जरूरत
ग्रामीण इलाकों में यह समस्या पुरानी है। बिना किसी समय के लंबे कट लगने के कारण लैपटॉप, प्रिंटर और मोबाइल चार्ज न होने से लोकमित्र केंद्रों के ऑनलाइन कार्य पूरी तरह ठप हो जाते हैं। गर्मी में बिना पंखे के हालत और खराब हो जाते हैं। सरकार को गांवों में आधुनिक तकनीक के साथ बिजली के ढांचे को दुरुस्त करना चाहिए।
नगीन चंद (लोकमित्र संचालक, जयनगर)
कोट
आंधी और तकनीकी खराबी के कारण लगते हैं कट
कई बार मौसम खराब होने या तूफान चलने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के तार पेड़ों से टकरा जाते हैं। जिससे तकनीकी खराबी आ जाती है। उस फॉल्ट का पता लगाने के लिए सुरक्षा के लिहाज से मुख्य आपूर्ति को बंद करना पड़ता है। फिलहाल विभाग के पास व्यवस्था से जुड़ी अन्य कोई खामी नहीं है। बरसात के दौरान तूफान से बाधित होने वाली लाइनों को दुरुस्त करने के लिए ही कट लगाए जाते हैं।
संदीप कुमार, अधिशासी अभियंता, हिमाचल प्रदेश विद्युत बोर्ड मंडल अर्की
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अर्की (सोलन)। अर्की विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में हर साल गर्मियों और बरसात के मौसम में बार-बार लगने वाले बिजली के कटों से स्थानीय लोग परेशान हैं। विद्युत बोर्ड की लचर व्यवस्था और ढीली कार्यशैली के कारण ग्रामीणों में रोष है। लोगों का कहना है कि बरसात में मौसम खराब होने पर तो बिजली गुल होती ही है, लेकिन मौसम सामान्य रहने पर भी साल के बारह महीने अघोषित कट लगना आम बात हो गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, जब से क्षेत्र में बिजली पहुंची है, तब से यह समस्या वैसी ही बनी हुई है। विभाग हर बार मरम्मत और रखरखाव का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेता है, जबकि धरातल पर कर्मचारी सिर्फ जुगाड़ू व्यवस्था के सहारे लाइनें चला रहे हैं। तकनीक के इस दौर में भी पुराने ढर्रे पर चल रही बिजली व्यवस्था के खिलाफ अब ग्रामीण सरकार और प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं। लोगों की मांग है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक स्थापित कर बाधारहित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
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गर्मियों में समय रहते काम नहीं करता विभाग
गांवों में हर रोज बिजली के लंबे कट लगना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अर्की के ग्रामीण क्षेत्रों में आज तक बिजली व्यवस्था का कोई आधुनिकीकरण नहीं हुआ। बिजली की लाइनें जंगलों और खेतों के ऊपर से गुजरती हैं, जो पेड़ों से टकराकर आए दिन बंद हो जाती हैं। यह कार्य गर्मियों में समय रहते पूरा हो जाना चाहिए ताकि जनता परेशान न हो।
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रमेश ठाकुर (पूर्व अध्यक्ष, ब्लॉक कांग्रेस अर्की)
इनसेट
काम ठप, पर समय पर आ जाता है बिल
गांव में बिजली जाना अब रोज का काम बन गया है। बिजली न होने से पशुओं का चारा काटने वाली मशीनें नहीं चल पातीं। दिन-रात को पंखे बंद रहने से भीषण गर्मी और मच्छरों के कारण जीना मुहाल है। बिजली भले ही आए न आए, लेकिन विभाग का बिल समय पर जरूर आ जाता है। सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
जयदेव ठाकुर (ग्रामीण, जघून)
इनसेट
ठोस कदम उठाए सरकार और बोर्ड
गर्मियों और बरसात में कट लगने से लोगों की समस्याएं दोगुनी हो जाती हैं। पंखे बंद होने से लोग गर्मी से बेहाल हैं और मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। यही नहीं, पानी की मोटर, आटा-चक्की, घास टोका करने की मशीन और फ्रिज जैसे उपकरण बंद रहने से लोगों का कारोबार और दैनिक काम पूरी तरह बाधित हो रहे हैं। विद्युत बोर्ड को ठोस कदम उठाने चाहिए।
शशिकांत शर्मा (जिला परिषद सदस्य, सूरजपुर)
इनसेट
ठप हो रहे ऑनलाइन कार्य, आधुनिक तकनीक की जरूरत
ग्रामीण इलाकों में यह समस्या पुरानी है। बिना किसी समय के लंबे कट लगने के कारण लैपटॉप, प्रिंटर और मोबाइल चार्ज न होने से लोकमित्र केंद्रों के ऑनलाइन कार्य पूरी तरह ठप हो जाते हैं। गर्मी में बिना पंखे के हालत और खराब हो जाते हैं। सरकार को गांवों में आधुनिक तकनीक के साथ बिजली के ढांचे को दुरुस्त करना चाहिए।
नगीन चंद (लोकमित्र संचालक, जयनगर)
कोट
आंधी और तकनीकी खराबी के कारण लगते हैं कट
कई बार मौसम खराब होने या तूफान चलने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के तार पेड़ों से टकरा जाते हैं। जिससे तकनीकी खराबी आ जाती है। उस फॉल्ट का पता लगाने के लिए सुरक्षा के लिहाज से मुख्य आपूर्ति को बंद करना पड़ता है। फिलहाल विभाग के पास व्यवस्था से जुड़ी अन्य कोई खामी नहीं है। बरसात के दौरान तूफान से बाधित होने वाली लाइनों को दुरुस्त करने के लिए ही कट लगाए जाते हैं।
संदीप कुमार, अधिशासी अभियंता, हिमाचल प्रदेश विद्युत बोर्ड मंडल अर्की

जयदेव ठाकुर, जघून। अर्की

जयदेव ठाकुर, जघून। अर्की

जयदेव ठाकुर, जघून। अर्की