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कुंजी या एमबीडी की किताबों से पढ़ाने पर होगी कार्रवाई: शिक्षा निदेशक
Thu, 29 Oct 2026 01:42 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Thu, 29 Oct 2026 01:42 AM IST
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सोलन के सीबीएसई स्कूल धर्मपुर में शिक्षा निदेशक ने किया निरीक्षण
विद्यार्थियों के पास इतिहास व राजनीति शास्त्र की पुस्तकें न मिलने पर लगाई लताड़
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (सोलन)। प्रदेश के स्कूलों में विद्यार्थियों को कुंजी या एमबीडी की पुस्तकों से पढ़ाने वाले अध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अध्यापकों को केवल एनसीईआरटी की पुस्तकों से पढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। यह बात शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने धर्मपुर स्थित एक सीबीएसई स्कूल के निरीक्षण के दौरान कही।
निरीक्षण के दौरान शिक्षा निदेशक ने विभिन्न कक्षाओं में जाकर विद्यार्थियों से इतिहास और राजनीति शास्त्र की पुस्तकें दिखाने को कहा। विद्यार्थी संबंधित पुस्तकें नहीं दिखा सके। इस पर उन्होंने अध्यापकों के प्रति नाराजगी जताते हुए पूछा कि पुस्तकों के अभाव में पढ़ाई कैसे करवाई जा रही है। उन्होंने स्कूल प्रबंधन और अध्यापकों को भविष्य में ऐसी लापरवाही न दोहराने की चेतावनी दी।
1800 पद भरने की प्रक्रिया जारी
शिक्षा निदेशक ने सीबीएसई स्कूलों में अगले 15 दिनों के भीतर जेबीटी के पद भरने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि सीबीएसई स्कूलों में 600 और गैर-सीबीएसई स्कूलों में 1200 पद भरने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि डिटेंशन पॉलिसी के तहत पांचवीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को परीक्षा में अनुत्तीर्ण किया जा सकेगा। वहीं, बोर्ड परीक्षाओं में बैठने के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी।
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कैमरे और ऑडियो सिस्टम के बिना नहीं बनेंगे परीक्षा केंद्र
शिक्षा निदेशक ने सीबीएसई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन स्कूलों में ऑडियो सिस्टम और कैमरों की व्यवस्था नहीं होगी, वहां बोर्ड परीक्षा केंद्र नहीं बनाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 60 प्रतिशत प्राथमिक स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 20 से कम है। ऐसे में स्कूलों में नामांकन बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
मिड-डे मील में बच्चों की पसंद को प्राथमिकता
शिक्षा निदेशक ने मिड-डे मील योजना के तहत विद्यार्थियों को अंडे और केले देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भोजन में बच्चों की पसंद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही अध्यापकों से क्लर्क का काम न करवाने की बात कही। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सीबीएसई स्कूलों के अध्यापकों की समस्याएं भी सुनीं।
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विद्यार्थियों के पास इतिहास व राजनीति शास्त्र की पुस्तकें न मिलने पर लगाई लताड़
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (सोलन)। प्रदेश के स्कूलों में विद्यार्थियों को कुंजी या एमबीडी की पुस्तकों से पढ़ाने वाले अध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अध्यापकों को केवल एनसीईआरटी की पुस्तकों से पढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। यह बात शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने धर्मपुर स्थित एक सीबीएसई स्कूल के निरीक्षण के दौरान कही।
निरीक्षण के दौरान शिक्षा निदेशक ने विभिन्न कक्षाओं में जाकर विद्यार्थियों से इतिहास और राजनीति शास्त्र की पुस्तकें दिखाने को कहा। विद्यार्थी संबंधित पुस्तकें नहीं दिखा सके। इस पर उन्होंने अध्यापकों के प्रति नाराजगी जताते हुए पूछा कि पुस्तकों के अभाव में पढ़ाई कैसे करवाई जा रही है। उन्होंने स्कूल प्रबंधन और अध्यापकों को भविष्य में ऐसी लापरवाही न दोहराने की चेतावनी दी।
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1800 पद भरने की प्रक्रिया जारी
शिक्षा निदेशक ने सीबीएसई स्कूलों में अगले 15 दिनों के भीतर जेबीटी के पद भरने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि सीबीएसई स्कूलों में 600 और गैर-सीबीएसई स्कूलों में 1200 पद भरने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि डिटेंशन पॉलिसी के तहत पांचवीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को परीक्षा में अनुत्तीर्ण किया जा सकेगा। वहीं, बोर्ड परीक्षाओं में बैठने के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी।
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कैमरे और ऑडियो सिस्टम के बिना नहीं बनेंगे परीक्षा केंद्र
शिक्षा निदेशक ने सीबीएसई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन स्कूलों में ऑडियो सिस्टम और कैमरों की व्यवस्था नहीं होगी, वहां बोर्ड परीक्षा केंद्र नहीं बनाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 60 प्रतिशत प्राथमिक स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 20 से कम है। ऐसे में स्कूलों में नामांकन बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
मिड-डे मील में बच्चों की पसंद को प्राथमिकता
शिक्षा निदेशक ने मिड-डे मील योजना के तहत विद्यार्थियों को अंडे और केले देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भोजन में बच्चों की पसंद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही अध्यापकों से क्लर्क का काम न करवाने की बात कही। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सीबीएसई स्कूलों के अध्यापकों की समस्याएं भी सुनीं।