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जिस बंकर में ठहरे थे, उसके पास गिरी मिसाइल, आसपास हो चुकी थी तबाही
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। यूक्रेन के कीव में फंसे शिल्ली रोड सोलन के शिवम रविवार देर रात सकुशल घर पहुंचे। शिवम ने बताया कि जब वह कीव में फंसे थे तो 250 भारतीय विद्यार्थियों के साथ एक बंकर में रहे। उनके बंकर के पास एक मिसाइल भी गिरी जिस वजह से उनका बंकर कंप गया था।
खाने-पीने का सामान काफी महंगा हो गया था। भारत ने यूक्रेन के पक्ष में कुछ बयान नहीं दिया तो वहां के लोग काफी आक्रामक हो चुके थे। उन्होंने बताया कि कीव रेलवे स्टेशन पर पहुंचे तो वहां के लोगों ने उन्हें खींच कर ट्रेन से उतार दिया और खुद चढ़ गए।
इस वजह से उनकी ट्रेन छूट गई। एक बस वाला उन्हें और उनके साथियों को बस से रोमानिया बॉर्डर पर ले जाने को तैयार हो गया। वह उनसे ढाई लाख रुपये नकद मांग रहा था। सभी ने बड़ी मुश्किल से राशि इकट्ठा की। उसके बाद वह रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचे।
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शिवम ने बताया कि रोमानिया बॉर्डर पर बहुत अधिक ठंड थी तापमान माइनस में था लेकिन वह वहां अपने आप को सुरक्षित महसूस कर रहे थे। आखिर भारत सरकार ने फ्लाइट उपलब्ध करवाई और वह सकुशल घर वापिस पहुंचे।
शिवम के पिता डॉ. खेमराज शुक्ला आयुष विभाग से सेवानिवृत्त हो चुके है। वह अपने बेटे को चिकित्सक बनाना चाहते थे। भारत में मेडिकल क्षेत्र में सीटें कम होने से उन्हें मजबूरन बेटे को यूक्रेन भेजना पड़ा।
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सोलन। यूक्रेन के कीव में फंसे शिल्ली रोड सोलन के शिवम रविवार देर रात सकुशल घर पहुंचे। शिवम ने बताया कि जब वह कीव में फंसे थे तो 250 भारतीय विद्यार्थियों के साथ एक बंकर में रहे। उनके बंकर के पास एक मिसाइल भी गिरी जिस वजह से उनका बंकर कंप गया था।
खाने-पीने का सामान काफी महंगा हो गया था। भारत ने यूक्रेन के पक्ष में कुछ बयान नहीं दिया तो वहां के लोग काफी आक्रामक हो चुके थे। उन्होंने बताया कि कीव रेलवे स्टेशन पर पहुंचे तो वहां के लोगों ने उन्हें खींच कर ट्रेन से उतार दिया और खुद चढ़ गए।
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इस वजह से उनकी ट्रेन छूट गई। एक बस वाला उन्हें और उनके साथियों को बस से रोमानिया बॉर्डर पर ले जाने को तैयार हो गया। वह उनसे ढाई लाख रुपये नकद मांग रहा था। सभी ने बड़ी मुश्किल से राशि इकट्ठा की। उसके बाद वह रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचे।
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शिवम ने बताया कि रोमानिया बॉर्डर पर बहुत अधिक ठंड थी तापमान माइनस में था लेकिन वह वहां अपने आप को सुरक्षित महसूस कर रहे थे। आखिर भारत सरकार ने फ्लाइट उपलब्ध करवाई और वह सकुशल घर वापिस पहुंचे।
शिवम के पिता डॉ. खेमराज शुक्ला आयुष विभाग से सेवानिवृत्त हो चुके है। वह अपने बेटे को चिकित्सक बनाना चाहते थे। भारत में मेडिकल क्षेत्र में सीटें कम होने से उन्हें मजबूरन बेटे को यूक्रेन भेजना पड़ा।