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Solan News: राज कूहल बंद, विभाग ने नहीं करवाई मरम्मत
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सात पंचायतों की 1200 हेक्टेयर जमीन सिंचाई सुविधा से वंचित
सिंचाई के बिना जमीन हुई बंजर, फसलें नहीं लगा पाए किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। बीबीएन की आधा दर्जन पंचायतों को सिंचाई सुविधा मुहैया कराने वाली राज कूहल को अभी तक विभाग ने चालू नहीं किया है। इससे पहले धान लगाने के लिए जलशक्ति विभाग इसे चालू कर देता था। इससे किसान जून में धान की फसल लगा देते थे, लेकिन इस वर्ष जिन लोगों के पास ट्यूबवेल हैं, उन्होंने तो फसल लगा दी है। जो कूहल पर निर्भर थे वह अब बारिश का इंतजार कर रहे हैं। डेढ़ साल से कूहल बंद है। लोगों ने कूहल की कब्जे करने शुरू कर दिए हैं।
60 के दशक में बीबीएन के लोगों को बंजर जमीन को उपजाऊ करने के लिए तत्कालीन नालागढ़ रिहासत के राजा ने इस कूहल का निर्माण कराया था। किशनपुरा से सरसा खड्ड से पानी रोक कर इस कूहल को चलाया जाता था। यह कूहल किशनपुरा, मानपुरा, सनेड़, खेड़ा, निक्कूवाल, गागुवाल, किरपालपुर व राजपुरा पंचायतों के सैकड़ों किसानों को सिंचाई की सुविधा मुहैया कराती रही। इस कूहल से 7 पंचायतों की 1200 हेक्टेयर जमीन सिंचित होती थी।
औद्योगिक क्षेत्र बनने से पहले यहां के लोगों की आर्थिकी इसी राज कूहल पर टिकी थी। देखरेख के अभाव में कूहल अस्तित्व खोती रही। अब हालात यह है कि पहले साल में कुछ दिनों के लिए यह कूहल चल जाती थी लेकिन अब पिछले डेढ़ साल से बंद पड़ी है।
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सनेड़ पंचायत के पूर्व प्रधान कमल, किशनपुरा के पूर्व प्रधान राम सिंह, वर्तमान प्रधान सूरजन सैणी, जगतार हीरा, प्रदीप ठाकुर, अवतार सिंह, किरपालपुर की प्रधान सरोज देवी ने बताया कि पहले जलशक्ति विभाग इस कूहल को खरीफ की फसल को लगाने के लिए चालू कर देता था लेकिन अब इस बार अभी तक चालू नहीं हो पाई है। इससे दर्जनों किसान धन की फसल नहीं लगा पाए हैं।
जल शक्ति विभाग के अधिशासी अभियंता दिनेश कुमार भारद्वाज ने बताया कि सरसा खड्ड का पानी सूखने चलते यह कूहल बंद पड़ी है। सर्दियों में इसे चलाया था। इससे रबी की फसल को लोगों को सिंचाई सुविधा मिलती थी लेकिन अब कूहल पर लोगों ने अवैध कब्जे कर लिए हैं। विभाग के पास कूहल चलाने के लिए अलग से बजट का प्रावधान नहीं है।
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सिंचाई के बिना जमीन हुई बंजर, फसलें नहीं लगा पाए किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। बीबीएन की आधा दर्जन पंचायतों को सिंचाई सुविधा मुहैया कराने वाली राज कूहल को अभी तक विभाग ने चालू नहीं किया है। इससे पहले धान लगाने के लिए जलशक्ति विभाग इसे चालू कर देता था। इससे किसान जून में धान की फसल लगा देते थे, लेकिन इस वर्ष जिन लोगों के पास ट्यूबवेल हैं, उन्होंने तो फसल लगा दी है। जो कूहल पर निर्भर थे वह अब बारिश का इंतजार कर रहे हैं। डेढ़ साल से कूहल बंद है। लोगों ने कूहल की कब्जे करने शुरू कर दिए हैं।
60 के दशक में बीबीएन के लोगों को बंजर जमीन को उपजाऊ करने के लिए तत्कालीन नालागढ़ रिहासत के राजा ने इस कूहल का निर्माण कराया था। किशनपुरा से सरसा खड्ड से पानी रोक कर इस कूहल को चलाया जाता था। यह कूहल किशनपुरा, मानपुरा, सनेड़, खेड़ा, निक्कूवाल, गागुवाल, किरपालपुर व राजपुरा पंचायतों के सैकड़ों किसानों को सिंचाई की सुविधा मुहैया कराती रही। इस कूहल से 7 पंचायतों की 1200 हेक्टेयर जमीन सिंचित होती थी।
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औद्योगिक क्षेत्र बनने से पहले यहां के लोगों की आर्थिकी इसी राज कूहल पर टिकी थी। देखरेख के अभाव में कूहल अस्तित्व खोती रही। अब हालात यह है कि पहले साल में कुछ दिनों के लिए यह कूहल चल जाती थी लेकिन अब पिछले डेढ़ साल से बंद पड़ी है।
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सनेड़ पंचायत के पूर्व प्रधान कमल, किशनपुरा के पूर्व प्रधान राम सिंह, वर्तमान प्रधान सूरजन सैणी, जगतार हीरा, प्रदीप ठाकुर, अवतार सिंह, किरपालपुर की प्रधान सरोज देवी ने बताया कि पहले जलशक्ति विभाग इस कूहल को खरीफ की फसल को लगाने के लिए चालू कर देता था लेकिन अब इस बार अभी तक चालू नहीं हो पाई है। इससे दर्जनों किसान धन की फसल नहीं लगा पाए हैं।
जल शक्ति विभाग के अधिशासी अभियंता दिनेश कुमार भारद्वाज ने बताया कि सरसा खड्ड का पानी सूखने चलते यह कूहल बंद पड़ी है। सर्दियों में इसे चलाया था। इससे रबी की फसल को लोगों को सिंचाई सुविधा मिलती थी लेकिन अब कूहल पर लोगों ने अवैध कब्जे कर लिए हैं। विभाग के पास कूहल चलाने के लिए अलग से बजट का प्रावधान नहीं है।