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बिना पुलिस ट्रेनिंग के काम नहीं कर पाएंगी निजी सुरक्षा एजेंसियां
ब्यूरो/अमर उजाला, बद्दी सोलन
Updated Wed, 20 Apr 2016 10:24 PM IST
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बीबीएन में उद्योगों को सुरक्षा गार्ड मुहैया करवाने वाली सुरक्षा एजेंसियों को अब अपने सुरक्षा गार्ड्स को पुलिस प्रशिक्षण देना होगा।
- फोटो : Demo Pic
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नियमों को ताक पर रखकर अकुशल गार्ड्स को उद्योगों की सिक्योरिटी में तैनात करके लाखों की चांदी कूटने वाली सुरक्षा एजेंसियों पर पुलिस शिकंजा कसने जा रहा है। बीबीएन में पुलिस प्राइवेट सुरक्षा एजेंसी एक्ट 2005 को सख्ती से लागू करेगी। इसमें निहित प्रावधान के तहत औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में उद्योगों को सुरक्षा गार्ड मुहैया करवाने वाली सुरक्षा एजेंसियों को अब अपने सुरक्षा गार्ड्स को पुलिस प्रशिक्षण देना होगा।
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पुलिस ट्रेनिंग सेंटर डरोह में विशेषज्ञ ट्रेनरों द्वारा 15 दिन तक प्रशिक्षण दिया जाएगा। एक्स आर्मी और पुलिस के जवानों के लिए यह प्रशिक्षण अनिवार्य नहीं रखा गया है। निजी सुरक्षा गार्ड्स को एजेंसी में भर्ती करने से पूर्व यह प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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पुलिस प्रशासन की इस नियम को प्रभावी ढंग से लागू करने तैयारी अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। 25 अप्रैल को संपूर्ण बीबीएन की सुरक्षा एजेंसियों के साथ एक विशेष बैठक हो रही है। इस बैठक में एजेंसियों को पुलिस अपना एजेंडा पेश करने के साथ इस नई व्यवस्था में सुझाव और सहयोग भी लेने जा रही है। पुलिस ने इस मुहिम में सहयोग न देने वाली एजेंसियों के लाइसेंस रद्द भी हो सकता है।
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प्रशिक्षण के खर्च को लेकर विवाद
पुलिस द्वारा दिए जाने वाले इस 15 दिन के प्रशिक्षण को लेकर विवाद भी हो सकता है। पूर्व में भी पुलिस की ओर से इस प्रकार की गाइड लाईन जारी की गई थी। इसे एजेंसियों ने गंभीरता से नहीं लिया था। इसके चलते पुलिस अब मामले में विशेष निर्देश जारी करने की तैयारी कर रहा है। बात खर्चे पर आकर अड़ी थी।
बीबीएन में 77 से अधिक सुरक्षा एजेंसियां
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में 77 सुरक्षा एजेंसियां हैं। हालांकि पुलिस के पास भी एजेंसियों और इसमें कार्यरत सिक्योरिटी गार्ड्स का सही आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। बताया जा रहा है कि औद्योगिक जिला सोलन में फैक्ट्रियों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली कई सिक्योरिटी एजेंसियां बिना एनओसी के चल रही हैं। चंडीगढ़, दिल्ली और मुंबई में बैठे कुछ सेवानिवृत्त फौजी इन एजेंसियों के अवैध धंधे को अंजाम दे रहे हैं। इनके पास न तो पूरे कागजात और न ही प्रशिक्षित स्टाफ। वहीं सुरक्षा गार्ड्स कंपनियों को सप्लाई कर खूब कमीशन बना रहे हैं। वर्ष 2014 में ऐसी एजेंसियों पर शिकंजा कसने की कवायद शुरू हुई थी। कुछ सुरक्षा एजेंसियों को नोटिस भी जारी हुए थे। लेकिन व्यवस्था सिरे नहीं चढ़ सकी।
80 मामले सालाना चोरी के
औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में वर्ष 2015 में दर्ज हुए 750 मामलों में लगभग 80 मामले चोरी से संबंधित रहे। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक चोरी के कुल मामलों में 20 फीसदी उद्योगों से जुड़े हैं। इनमें सुरक्षा गार्ड होने के बावजूद लापरवाह रहने के चलते अधिकांश चोरियां हुई हैं। वहीं कई जगह तो सिक्योरिटी गार्ड ही आरोपी बने हैं। इसके अलावा आगजनी और अन्य आपदा के दौरान भी पुलिस प्रशिक्षण काफी काम आता है।
मई में निर्देशों के लागू होने के आसार
पुलिस द्वारा 25 अप्रैल को आयोजित बैठक में प्रशिक्षण कार्यक्रम को अंतिम रूप देने की उम्मीद है। कुछ मुद्दों को लेकर विवाद कायम हैं, जिस पर बैठक में हल निकलने की आस है। पुलिस अधीक्षक बशेर सिंह ने कहा कि उद्योगों में चोरी की घटनाओं पर नियंत्रण करने की दिशा में यह प्रयास जारी है। अगली बैठक के बाद मई तक इसे प्रभावी बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कहा कि निर्देशों को न मानने वाली एजेंसियों के लाइसेंस रद्द करने को भी संबंधित विभागों को कहा जाएगा।