लोगों ने मांगी तेंदुए को मारने की इजाजत
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तेंदुए के हमले की घटना के बाद नारग पंचायत और दयोथल के ग्रामीणों में भारी रोष है। लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने पर भी अगर वन विभाग तेंदुए को नहीं पकड़ सकता तो क्षेत्र के लाइसेंस होल्डर बंदूकधारियों को तेंदुए को मारने की इजाजत दी जाए, जिससे लोग अपनी सुरक्षा अपने आप कर सकें। स्थानीय लोगों चमन लाल, सोमलता, निशा कुमारी, यशवंत, सिता राम, देवी राम, बलवंत, आशा देवी, सीमा देवी, कुलदीप चंद, इंद्रदत्त आदि ने बताया कि तेंदुआ लोगों के मवेशियों ओर कुत्तों को आए दिन अपना शिकार बना रहा था। वहीं, रात ही नहीं बल्कि दिन के समय भी तेंदुए को देखा गया था।
इसकी शिकायत वन मंडलाधिकारी राजगढ़ से की गई, लेकिन विभाग ने लोगों की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसका परिणाम इस हादसे के रूप में सामने आया है। यहीं नही नारग और दयोथल को जोड़ने वाले इस जंगल वाले रास्ते से आए दिन हजारों ग्रामीण गुजरते हैं। साथ ही क्षेत्र की महिलाएं भी घास और मवेशियों को चराने के लिए यहां आती हैं। हादसे के बाद अब लोग इस रास्ते पर चलने से कतरा रहे हैं। मंगलवार को हादसे में घायल शीला देवी का हाल जानने के लिए भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी देवेंद्र ठाकुर और नारग पंचायत प्रधान पूनम देवी क्षेत्रीय अस्पताल पहुंचे। साथ ही पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
किसान मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी देवेंद्र ठाकुर ने कहा कि तेंदुए के आतंक की शिकायत ग्रामवासियों ने वन मंडलाधिकारी राजगढ़ को कई बार दी थी। लोगों ने विभाग से तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाने की अपील की थी, लेकिन विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को भविष्य में जनता की मांगों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने की नसीहत दी।
साथ ही प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से जल्द तेंदुए को पकड़ने के लिए टीम भेजने का आग्रह किया, जिससे कोई और इस आदमखोर का शिकार न हो पाए। किसान मोर्चा के कार्यकारिणी सदस्य नंदलाल और बीडीसी सदस्य अभिषेक ठाकुर भी घायल महिला से मिले। नारग पंचायत प्रधान पुनम ठाकुर ने बताया कि सालों से नारग पंचायत और दयोथल के ग्रामीण आवाजाही के लिए इसी रास्ते का उपयोग करते हैं, जो अधिकांश घने जंगलों से घिरा है। वहीं, तेंदुए के हमले के बाद से स्थानीय लोगों में दहशत है। लोग में खौफ इतना बढ़ गया है कि दिन के समय भी वह घरों से बाहर निकलने में डर रहे हैं।