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Solan News: दाड़लाघाट औद्योगिक नगर में 5000 से अधिक वाहनों के लिए पार्किंग व्यवस्था नाकाफी
Sat, 26 Sep 2026 12:16 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sat, 26 Sep 2026 12:16 AM IST
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दाड़लाघाट बाजार में सड़क किनारे खड़े वाहन। (संवाद)
-अभियान-
-पार्किंग का संकट-
दो ट्रक यार्ड की संयुक्त क्षमता 1000 से 1200 ट्रक, छोटे वाहनों के लिए पर्याप्त पार्किंग नहीं
सड़कों के किनारे खड़े रहते हैं वाहन, रोजाना लगता है जाम, वाहनों में चोरियां भी होती रहती
राजेश गुप्ता
दाड़लाघाट(सोलन)। अदाणी समूह के अंबुजा सीमेंट के दो बड़े औद्योगिक संस्थानों वाले दाड़लाघाट क्षेत्र में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके मुकाबले पार्किंग व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। स्थानीय स्तर पर परिवहन सहकारी सभाओं, वाहन यूनियनों और अन्य उपलब्ध जानकारी के अनुसार दाड़लाघाट क्षेत्र में 5000 से अधिक छोटे-बड़े वाहन हैं। इनमें परिवहन सहकारी सभाओं से जुड़े ट्रक, विभिन्न यूनियनों के वाहन, टैक्सियां, छोटे मालवाहक वाहन और निजी वाहन शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या के बावजूद छोटे वाहनों के लिए पर्याप्त और व्यवस्थित सार्वजनिक पार्किंग उपलब्ध नहीं है।
दाड़लाघाट में करीब 9 परिवहन सहकारी सभाएं हैं, जिनके माध्यम से लगभग 3000 से 3500 ट्रक संचालित होते हैं। कंपनी की ओर से सुल्ली गेट के समीप दो ट्रक यार्ड बनाए गए हैं, लेकिन दोनों यार्ड की संयुक्त क्षमता करीब 1000 से 1200 ट्रकों की ही है। ऐसे में ट्रकों की संख्या और उपलब्ध यार्ड क्षमता के बीच बड़ा अंतर है। यार्ड में जगह नहीं मिलने पर कई ट्रकों को सड़क किनारे या अन्य स्थानों पर खड़ा करना पड़ता है।
वहीं, छोटे वाहनों के लिए चौधरी कॉम्प्लेक्स में एक प्रमुख निजी पार्किंग है। इसके अलावा कुछ स्थानीय स्तर की छोटी व्यवस्थाएं हैं, लेकिन दाड़लाघाट बाजार और आसपास आने वाले वाहनों की संख्या के हिसाब से यह पर्याप्त नहीं हैं। स्थानीय स्तर पर प्रतिदिन आने-जाने और खड़े होने वाले टैक्सी, छोटे मालवाहक और निजी वाहनों की संख्या भी करीब 1000 से 2000 के बीच होने का अनुमान है।
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दाड़लाघाट में अंबुजा चौक से पीएनबी एटीएम, एसबीआई बैंक से जालपा मंदिर, कंसवाला रोड से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दाड़लाघाट तथा आईटीआई से स्यार सहित पुराने बस स्टैंड तक सड़क किनारे वाहन खड़े होने से यातायात प्रभावित होता है। कई जगह दुकानों के सामने भी वाहन खड़े रहते हैं। बाजार, बैंक, सरकारी व निजी कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों और औद्योगिक गतिविधियों के कारण क्षेत्र में पूरे दिन वाहनों की आवाजाही बनी रहती है।
स्थानीय स्तर पर उपलब्ध वाहन संख्या के आंकड़े अनुमानित हैं। इनके आधिकारिक आंकड़े संबंधित विभागों या परिवहन संस्थाओं से सत्यापित किए जाने की आवश्यकता है। पार्किंग की समस्या के समाधान के लिए छोटे वाहनों के लिए अलग व्यवस्थित पार्किंग, ट्रक यार्ड की क्षमता बढ़ाने और प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगर को विकसित करने की मांग उठ रही है।
इनसेट
दाड़लाघाट में पार्किंग का कोई प्रावधान नहीं
टैक्सी और छोटे मालवाहक वाहनों के लिए दाड़लाघाट में पार्किंग का कोई प्रावधान नहीं है। नतीजन सड़कों के किनारे वाहन खड़े करने पड़ते हैं, जिससे चोरियों व टूट-फूट का भी डर बना रहता है। यहां ट्रकों के साथ छोटे वाहनों की संख्या भी काफी अधिक है। ऐसे में उनके लिए भी अलग-अलग व्यवस्थित पार्किंग होनी चाहिए। निर्धारित स्थान मिलने से वाहन सड़कों पर खड़े नहीं होंगे और बाजार में यातायात व्यवस्था भी बेहतर हो सकेगी। -अनिल शर्मा, सचिव टैक्सी यूनियन दाड़लाघाट
इनसेट
सरकार पर्याप्त क्षमता की पार्किंग बनाए
पार्किंग की समस्या गंभीर है। सरकार को टैक्सी चालकों, मालवाहक वाहन संचालकों और आम लोगों के लिए अलग-अलग या पर्याप्त क्षमता वाली पार्किंग विकसित करनी चाहिए। मौजूदा समय में पार्किंग की व्यवस्था न होने से सड़कों के किनारे ट्रक व अन्य वाहन खड़े रहते हैं। जिससे यहां पर जाम में छोटे बच्चों, महिलाओं व बुजुर्गों को निकलना मुश्किल हो जाता है। -संतराम पंवर, समाजसेवी दाड़लाघाट
इनसेट
लगातार बढ़ रहे ट्रकों के लिए पार्किंग नहीं
दाड़लाघाट में ट्रकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उन्हें खड़ा करने के लिए उपलब्ध पार्किंग और ट्रक यार्ड पर्याप्त नहीं हैं। यार्ड में जगह नहीं मिलने पर कई बार ट्रक सड़क किनारे या अन्य स्थानों पर खड़े करने पड़ते हैं। कंपनी के दोनों ट्रक यार्ड की क्षमता बढ़ाने के साथ दाड़लाघाट में बड़े स्तर पर ट्रांसपोर्ट नगर विकसित किया जाना चाहिए, ताकि ट्रकों को व्यवस्थित तरीके से खड़ा करने की सुविधा मिल सके और सड़क किनारे पार्किंग की समस्या कम हो। - दिनेश शर्मा, ट्रक ऑपरेटर
इनसेट
औद्योगिक क्षेत्र होने के बाद भी पार्किंग नहीं
औद्योगिक क्षेत्र होने के बावजूद दाड़लाघाट में पार्किंग की व्यवस्था विकसित नहीं हो पाई है। इससे दुकानदारों के साथ वाहन चालकों को भी परेशानी होती है, क्योंकि उनकी दुकान के आगे भी कई बार ट्रक खड़े जाते हैं और ग्राहक तक नहीं आते। सरकार को इस समस्या का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करना चाहिए। - हेमराज गौतम, उप प्रधान व्यापार मंडल, दाड़लाघाट
इनसेट
पार्किंग के वाहन सबसे बड़ी चुनौती
पार्किंग के लिए उपयुक्त जमीन की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती है। पुराने पुलिस थाने के साथ लगती सरकारी जमीन को यदि पंचायत राज विभाग के अधीन किया जा सके तो वहां पार्किंग विकसित करने की संभावनाएं बन सकती हैं। इसके लिए सरकार को पत्र भेजने सहित अन्य स्तरों पर भी प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पंचायत इस दिशा में प्रयासरत है और जल्द-से-जल्द पार्किंग निर्माण को लेकर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। - श्याम सिंह चौधरी, दाड़लाघाट पंचायत
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-पार्किंग का संकट-
दो ट्रक यार्ड की संयुक्त क्षमता 1000 से 1200 ट्रक, छोटे वाहनों के लिए पर्याप्त पार्किंग नहीं
सड़कों के किनारे खड़े रहते हैं वाहन, रोजाना लगता है जाम, वाहनों में चोरियां भी होती रहती
राजेश गुप्ता
दाड़लाघाट(सोलन)। अदाणी समूह के अंबुजा सीमेंट के दो बड़े औद्योगिक संस्थानों वाले दाड़लाघाट क्षेत्र में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके मुकाबले पार्किंग व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। स्थानीय स्तर पर परिवहन सहकारी सभाओं, वाहन यूनियनों और अन्य उपलब्ध जानकारी के अनुसार दाड़लाघाट क्षेत्र में 5000 से अधिक छोटे-बड़े वाहन हैं। इनमें परिवहन सहकारी सभाओं से जुड़े ट्रक, विभिन्न यूनियनों के वाहन, टैक्सियां, छोटे मालवाहक वाहन और निजी वाहन शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या के बावजूद छोटे वाहनों के लिए पर्याप्त और व्यवस्थित सार्वजनिक पार्किंग उपलब्ध नहीं है।
दाड़लाघाट में करीब 9 परिवहन सहकारी सभाएं हैं, जिनके माध्यम से लगभग 3000 से 3500 ट्रक संचालित होते हैं। कंपनी की ओर से सुल्ली गेट के समीप दो ट्रक यार्ड बनाए गए हैं, लेकिन दोनों यार्ड की संयुक्त क्षमता करीब 1000 से 1200 ट्रकों की ही है। ऐसे में ट्रकों की संख्या और उपलब्ध यार्ड क्षमता के बीच बड़ा अंतर है। यार्ड में जगह नहीं मिलने पर कई ट्रकों को सड़क किनारे या अन्य स्थानों पर खड़ा करना पड़ता है।
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वहीं, छोटे वाहनों के लिए चौधरी कॉम्प्लेक्स में एक प्रमुख निजी पार्किंग है। इसके अलावा कुछ स्थानीय स्तर की छोटी व्यवस्थाएं हैं, लेकिन दाड़लाघाट बाजार और आसपास आने वाले वाहनों की संख्या के हिसाब से यह पर्याप्त नहीं हैं। स्थानीय स्तर पर प्रतिदिन आने-जाने और खड़े होने वाले टैक्सी, छोटे मालवाहक और निजी वाहनों की संख्या भी करीब 1000 से 2000 के बीच होने का अनुमान है।
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दाड़लाघाट में अंबुजा चौक से पीएनबी एटीएम, एसबीआई बैंक से जालपा मंदिर, कंसवाला रोड से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दाड़लाघाट तथा आईटीआई से स्यार सहित पुराने बस स्टैंड तक सड़क किनारे वाहन खड़े होने से यातायात प्रभावित होता है। कई जगह दुकानों के सामने भी वाहन खड़े रहते हैं। बाजार, बैंक, सरकारी व निजी कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों और औद्योगिक गतिविधियों के कारण क्षेत्र में पूरे दिन वाहनों की आवाजाही बनी रहती है।
स्थानीय स्तर पर उपलब्ध वाहन संख्या के आंकड़े अनुमानित हैं। इनके आधिकारिक आंकड़े संबंधित विभागों या परिवहन संस्थाओं से सत्यापित किए जाने की आवश्यकता है। पार्किंग की समस्या के समाधान के लिए छोटे वाहनों के लिए अलग व्यवस्थित पार्किंग, ट्रक यार्ड की क्षमता बढ़ाने और प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगर को विकसित करने की मांग उठ रही है।
इनसेट
दाड़लाघाट में पार्किंग का कोई प्रावधान नहीं
टैक्सी और छोटे मालवाहक वाहनों के लिए दाड़लाघाट में पार्किंग का कोई प्रावधान नहीं है। नतीजन सड़कों के किनारे वाहन खड़े करने पड़ते हैं, जिससे चोरियों व टूट-फूट का भी डर बना रहता है। यहां ट्रकों के साथ छोटे वाहनों की संख्या भी काफी अधिक है। ऐसे में उनके लिए भी अलग-अलग व्यवस्थित पार्किंग होनी चाहिए। निर्धारित स्थान मिलने से वाहन सड़कों पर खड़े नहीं होंगे और बाजार में यातायात व्यवस्था भी बेहतर हो सकेगी। -अनिल शर्मा, सचिव टैक्सी यूनियन दाड़लाघाट
इनसेट
सरकार पर्याप्त क्षमता की पार्किंग बनाए
पार्किंग की समस्या गंभीर है। सरकार को टैक्सी चालकों, मालवाहक वाहन संचालकों और आम लोगों के लिए अलग-अलग या पर्याप्त क्षमता वाली पार्किंग विकसित करनी चाहिए। मौजूदा समय में पार्किंग की व्यवस्था न होने से सड़कों के किनारे ट्रक व अन्य वाहन खड़े रहते हैं। जिससे यहां पर जाम में छोटे बच्चों, महिलाओं व बुजुर्गों को निकलना मुश्किल हो जाता है। -संतराम पंवर, समाजसेवी दाड़लाघाट
इनसेट
लगातार बढ़ रहे ट्रकों के लिए पार्किंग नहीं
दाड़लाघाट में ट्रकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उन्हें खड़ा करने के लिए उपलब्ध पार्किंग और ट्रक यार्ड पर्याप्त नहीं हैं। यार्ड में जगह नहीं मिलने पर कई बार ट्रक सड़क किनारे या अन्य स्थानों पर खड़े करने पड़ते हैं। कंपनी के दोनों ट्रक यार्ड की क्षमता बढ़ाने के साथ दाड़लाघाट में बड़े स्तर पर ट्रांसपोर्ट नगर विकसित किया जाना चाहिए, ताकि ट्रकों को व्यवस्थित तरीके से खड़ा करने की सुविधा मिल सके और सड़क किनारे पार्किंग की समस्या कम हो। - दिनेश शर्मा, ट्रक ऑपरेटर
इनसेट
औद्योगिक क्षेत्र होने के बाद भी पार्किंग नहीं
औद्योगिक क्षेत्र होने के बावजूद दाड़लाघाट में पार्किंग की व्यवस्था विकसित नहीं हो पाई है। इससे दुकानदारों के साथ वाहन चालकों को भी परेशानी होती है, क्योंकि उनकी दुकान के आगे भी कई बार ट्रक खड़े जाते हैं और ग्राहक तक नहीं आते। सरकार को इस समस्या का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करना चाहिए। - हेमराज गौतम, उप प्रधान व्यापार मंडल, दाड़लाघाट
इनसेट
पार्किंग के वाहन सबसे बड़ी चुनौती
पार्किंग के लिए उपयुक्त जमीन की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती है। पुराने पुलिस थाने के साथ लगती सरकारी जमीन को यदि पंचायत राज विभाग के अधीन किया जा सके तो वहां पार्किंग विकसित करने की संभावनाएं बन सकती हैं। इसके लिए सरकार को पत्र भेजने सहित अन्य स्तरों पर भी प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पंचायत इस दिशा में प्रयासरत है और जल्द-से-जल्द पार्किंग निर्माण को लेकर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। - श्याम सिंह चौधरी, दाड़लाघाट पंचायत

दाड़लाघाट बाजार में सड़क किनारे खड़े वाहन। (संवाद)

दाड़लाघाट बाजार में सड़क किनारे खड़े वाहन। (संवाद)

दाड़लाघाट बाजार में सड़क किनारे खड़े वाहन। (संवाद)

दाड़लाघाट बाजार में सड़क किनारे खड़े वाहन। (संवाद)