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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   Parents had to buy the entire set for one book

Solan News: एक किताब के लिए अभिभावकों लेना पड़ा रहा पूरा सेट

Fri, 16 Feb 2024 11:47 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन Updated Fri, 16 Feb 2024 11:47 PM IST
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अधिकतर स्टेशनरी कारोबारी नहीं दे रहे एक-दो किताबें
सेट खोलकर चुनिंदा किताबें देने के लिए कर रहे इंकार
स्कूलों ने भी किताबों के लिए तय कर रखी है अपनी दुकान
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले में जहां अभिभावक कॉपी-किताबों के बढ़े दाम से परेशान हैं, वहीं अब एक और कारण उन्हें परेशान कर रहा है। कुछ स्कूलों की पुस्तकें चुनिंदा दुकानों पर ही मिल रही हैं। यहां भी अभिभावकों को एक किताब चाहिए तो नहीं दी जा रही। पूरा सेट ही लेना पड़ रहा है। इसके अलावा कॉपियां लेने में भी परेशान किया जा रहा है।

किताबों के साथ पूरे वर्ष की कॉपियां भी अभिभावकों जबरन थोपी जा रही है। जिसमें बुक सेलरों का कहना है कि उन्हें स्कूल प्रबंधन से पूरा सेट देने को कहा है। अधिकतर स्कूलों की ओर से किसी निश्चित दुकान पर पुस्तकें खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। अभिभावकों को पुस्तक उसी दुकान से खरीदना मजबूरी बन गई है। इसका कारण यह है कि हर दुकान पर पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। इसका फायदा पुस्तक विक्रेताओं द्वारा भी उठाया जा रहा है। स्कूल की ओर से चलाए जा रहे प्रकाशक की सभी किताबें एक ही दुकान पर मिल जाएं, ऐसा संभव नहीं होता। स्कूल जिस पुस्तक विक्रेता से सांठगांठ कर रहे हैं। उसी जगह पर सभी किताबें उपलब्ध होती हैं। यह विक्रेता पूरा सेट तैयार करके रखते हैं। अगर किसी छात्र को एक या दो किताबों की आवश्यकता होती है। तब भी दुकानदार पूरा सेट देने की बात करता है। जबकि शहर की अन्य दुकानों पर वह किताब मिलना मुश्किल है। अभिभावक कल्पना शर्मा, भूपेंद्र, राकेश शर्मा, रजनीश, पूनम, मंजू समेत अन्य का कहना है कि अगर हमने किताबों के सेट में कुछ किताब पुराने विद्यार्थियों से ले ली हैं और कुछ नई खरीदनी हो तो उस पर किताबों का पूरा सेट खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। किताबों के सेट में स्कूल का हवाला देकर दुकानदार खरीदने को मजबूर कर रहे हैं। हालांकि कुछ अभिभावक तो इस समस्या से अवगत तो कराते हैं। लेकिन खुले रूप से कुछ कहने में अपने आपको असहज महसूस करते हैं। उनके अनुसार स्कूल प्रबंधक उनके बच्चे के साथ भेदभाव कर सकता है या उसके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर सकता है। इसलिए जेब पर बोझ बढ़ने के बाद भी अभिभावक मजबूर दिखाई दे रहे हैं।
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