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Solan News: नौणी विवि के मौसम विभाग का अलर्ट अगले पांच दिन भारी बारिश की चेतावनी
Fri, 10 Jul 2026 11:32 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Fri, 10 Jul 2026 11:32 PM IST
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किसानों और बागवानों के लिए विशेष एडवाइजरी भी की जारी
उफान पर आ सकते हैं नदी-नाले, आम जनता को सुरक्षित रहने की सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिला सोलन में आगामी दिनों में मौसम के कड़े तेवर देखने को मिल सकते हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग और नौणी विवि के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा केंद्र द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार, अगले पांच दिनों तक जिले में मौसम पूरी तरह परिवर्तनशील बना रहेगा। विभाग ने 10 से 14 जुलाई तक जिले के अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम और कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा होने की संभावना जताई है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 10 जुलाई को जिले के चुनिंदा स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है, जबकि 11 से 13 जुलाई के दौरान मध्यम से बहुत भारी वर्षा होने की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग ने आम लोगों और पर्यटकों के लिए विशेष हिदायत जारी करते हुए कहा है कि भारी वर्षा के दौरान नदियों, खड्डों, नालों और निचले क्षेत्रों से पूरी तरह दूर रहें। अचानक होने वाली मूसलाधार बारिश से जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है, जो जान-माल के लिए घातक साबित हो सकता है। वहीं लगातार बारिश और खेतों में जलभराव के कारण फसलों में मृदा कटाव, फफूंदजनित रोगों और खड़ी फसलों के गिरने का खतरा बढ़ गया है। इसके लिए विशेषज्ञों ने सलाह दी है।
इनसेट
सभी फसलों में फिलहाल सिंचाई और किसी भी प्रकार के कीटनाशकों, फफूंदनाशकों के छिड़काव का कार्य स्थगित रखें। खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने के लिए घासयुक्त जल निकास मार्ग और नालियों की उचित व्यवस्था करें। खेतों में पानी रुकने न दें। मक्का की नवोदित (शुरुआती) फसल में जलभराव होने से पूरी फसल बर्बाद हो सकती है। टमाटर की फसल में पौधों को गिरने से बचाने के लिए तुरंत स्टेकिंग प्रदान करें। मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारियों को रोकने के लिए पौधों की निचली पत्तियों को जमीन की सतह से 10–15 सेंटीमीटर ऊपर तक हटा दें।
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इनसेट
सेब के बगीचे अत्यधिक नमी के कारण सेब में स्कैब और अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा रोग फैलने का खतरा है। ऐसे में छिड़काव करने के बजाय पेड़ों की निचली टहनियों की हल्की छंटाई करें, ताकि बगीचे में हवा का संचार सही बना रहे। शिमला मिर्च में सर्कोस्पोरा पत्ती धब्बा रोग की नियमित निगरानी करें और संक्रमित पत्तियों को नष्ट कर दें। खीरे व अन्य बेलदार फसलों में जड़ सड़न से बचाव के लिए जल निकासी सुनिश्चित करें।
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उफान पर आ सकते हैं नदी-नाले, आम जनता को सुरक्षित रहने की सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिला सोलन में आगामी दिनों में मौसम के कड़े तेवर देखने को मिल सकते हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग और नौणी विवि के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा केंद्र द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार, अगले पांच दिनों तक जिले में मौसम पूरी तरह परिवर्तनशील बना रहेगा। विभाग ने 10 से 14 जुलाई तक जिले के अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम और कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा होने की संभावना जताई है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 10 जुलाई को जिले के चुनिंदा स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है, जबकि 11 से 13 जुलाई के दौरान मध्यम से बहुत भारी वर्षा होने की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग ने आम लोगों और पर्यटकों के लिए विशेष हिदायत जारी करते हुए कहा है कि भारी वर्षा के दौरान नदियों, खड्डों, नालों और निचले क्षेत्रों से पूरी तरह दूर रहें। अचानक होने वाली मूसलाधार बारिश से जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है, जो जान-माल के लिए घातक साबित हो सकता है। वहीं लगातार बारिश और खेतों में जलभराव के कारण फसलों में मृदा कटाव, फफूंदजनित रोगों और खड़ी फसलों के गिरने का खतरा बढ़ गया है। इसके लिए विशेषज्ञों ने सलाह दी है।
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सभी फसलों में फिलहाल सिंचाई और किसी भी प्रकार के कीटनाशकों, फफूंदनाशकों के छिड़काव का कार्य स्थगित रखें। खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने के लिए घासयुक्त जल निकास मार्ग और नालियों की उचित व्यवस्था करें। खेतों में पानी रुकने न दें। मक्का की नवोदित (शुरुआती) फसल में जलभराव होने से पूरी फसल बर्बाद हो सकती है। टमाटर की फसल में पौधों को गिरने से बचाने के लिए तुरंत स्टेकिंग प्रदान करें। मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारियों को रोकने के लिए पौधों की निचली पत्तियों को जमीन की सतह से 10–15 सेंटीमीटर ऊपर तक हटा दें।
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सेब के बगीचे अत्यधिक नमी के कारण सेब में स्कैब और अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा रोग फैलने का खतरा है। ऐसे में छिड़काव करने के बजाय पेड़ों की निचली टहनियों की हल्की छंटाई करें, ताकि बगीचे में हवा का संचार सही बना रहे। शिमला मिर्च में सर्कोस्पोरा पत्ती धब्बा रोग की नियमित निगरानी करें और संक्रमित पत्तियों को नष्ट कर दें। खीरे व अन्य बेलदार फसलों में जड़ सड़न से बचाव के लिए जल निकासी सुनिश्चित करें।