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Solan News: जमीन के पेंच में फंसा नंड पशु औषधालय, नए भवन का इंतजार
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नंड में जर्जर हालत में पशु औषधालय का भवन -सवाद।
नंड पंचायत में 1959 में स्थापित संस्थान आज भी किराये के भवन में चल रहा
10 साल पहले भवन को पीडब्ल्यूडी ने असुरक्षित किया घोषित
एचआर धीमान
नालागढ़ (सोलन)। नंड पंचायत में पशुपालन विभाग की बड़ी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। वर्ष 1959 में स्थापित और 1984 में पशु औषधालय का दर्जा प्राप्त करने वाले इस संस्थान की जमीन आज तक विभाग के नाम स्थानांतरित नहीं हो सकी है। सरकारी प्रक्रिया में मामला उलझा होने के कारण न तो जर्जर भवन की मरम्मत हो पा रही है और न ही नए भवन का निर्माण शुरू हो सका है। लोक निर्माण विभाग करीब एक दशक पहले इस भवन को असुरक्षित घोषित कर चुका है।
नंड पशु औषधालय करीब आधा दर्जन पंचायतों के पशुपालकों के लिए प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां के अधिकांश परिवार पशुपालन और कृषि पर निर्भर हैं, लेकिन भवन की बदहाल स्थिति के कारण उन्हें पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
पशु औषधालय 2,000 रुपये प्रतिमाह किराये के एक निजी भवन में संचालित हो रहा है। यहां पशुओं के उपचार के लिए पर्याप्त स्थान और आवश्यक सुविधाओं का अभाव है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 1998 में भवन की मरम्मत के लिए लोक निर्माण विभाग से संपर्क किया गया था। इसी दौरान पता चला कि जिस भूमि पर भवन बना है, वह पशुपालन विभाग के नाम दर्ज ही नहीं है। तब से यह मामला विभिन्न विभागों और सरकारी फाइलों में लंबित है।
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भूमि मिलते ही नए भवन का निर्माण शुरू होगा
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. विवेक लांबा ने बताया कि भूमि विभाग के नाम स्थानांतरित करने का प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन है। वर्ष 2023 में जलशक्ति विभाग, लोक निर्माण विभाग, बिजली बोर्ड और वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मांगे गए थे, जो अभी प्राप्त नहीं हुए हैं। उन्होंने बताया कि पंचायत की ओर से विभाग को भूमि उपलब्ध कराने की पहल की गई है। भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होते ही नए भवन के निर्माण की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
पंचायत ने भेजा प्रस्ताव
नंड पंचायत की प्रधान सपना देवी ने बताया कि पंचायत ने भूमि विभाग के नाम करने के लिए संबंधित कार्यालय को प्रस्ताव भेज दिया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में पुराने भवन को पूरी तरह असुरक्षित घोषित कर दिया गया था। एनओसी और भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए भवन के निर्माण के लिए बजट की मांग की जाएगी।
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10 साल पहले भवन को पीडब्ल्यूडी ने असुरक्षित किया घोषित
एचआर धीमान
नालागढ़ (सोलन)। नंड पंचायत में पशुपालन विभाग की बड़ी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। वर्ष 1959 में स्थापित और 1984 में पशु औषधालय का दर्जा प्राप्त करने वाले इस संस्थान की जमीन आज तक विभाग के नाम स्थानांतरित नहीं हो सकी है। सरकारी प्रक्रिया में मामला उलझा होने के कारण न तो जर्जर भवन की मरम्मत हो पा रही है और न ही नए भवन का निर्माण शुरू हो सका है। लोक निर्माण विभाग करीब एक दशक पहले इस भवन को असुरक्षित घोषित कर चुका है।
नंड पशु औषधालय करीब आधा दर्जन पंचायतों के पशुपालकों के लिए प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां के अधिकांश परिवार पशुपालन और कृषि पर निर्भर हैं, लेकिन भवन की बदहाल स्थिति के कारण उन्हें पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
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पशु औषधालय 2,000 रुपये प्रतिमाह किराये के एक निजी भवन में संचालित हो रहा है। यहां पशुओं के उपचार के लिए पर्याप्त स्थान और आवश्यक सुविधाओं का अभाव है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 1998 में भवन की मरम्मत के लिए लोक निर्माण विभाग से संपर्क किया गया था। इसी दौरान पता चला कि जिस भूमि पर भवन बना है, वह पशुपालन विभाग के नाम दर्ज ही नहीं है। तब से यह मामला विभिन्न विभागों और सरकारी फाइलों में लंबित है।
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भूमि मिलते ही नए भवन का निर्माण शुरू होगा
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. विवेक लांबा ने बताया कि भूमि विभाग के नाम स्थानांतरित करने का प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन है। वर्ष 2023 में जलशक्ति विभाग, लोक निर्माण विभाग, बिजली बोर्ड और वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मांगे गए थे, जो अभी प्राप्त नहीं हुए हैं। उन्होंने बताया कि पंचायत की ओर से विभाग को भूमि उपलब्ध कराने की पहल की गई है। भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होते ही नए भवन के निर्माण की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
पंचायत ने भेजा प्रस्ताव
नंड पंचायत की प्रधान सपना देवी ने बताया कि पंचायत ने भूमि विभाग के नाम करने के लिए संबंधित कार्यालय को प्रस्ताव भेज दिया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में पुराने भवन को पूरी तरह असुरक्षित घोषित कर दिया गया था। एनओसी और भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए भवन के निर्माण के लिए बजट की मांग की जाएगी।