{"_id":"5d616d138ebc3e93de122d67","slug":"nalagarh-scrub-typhus-outbreak-solan-news-sml304954935","type":"story","status":"publish","title_hn":"नालागढ़ अस्पताल में स्क्रब टायफस का मरीज दाखिल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नालागढ़ अस्पताल में स्क्रब टायफस का मरीज दाखिल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नालागढ़ (सोलन)। औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में डेंगू ने पहले ही 32 लोगों को बीमार कर रखा है। इस पर अब स्क्रब टायफस के रोगी भी सामने आ गए हैं। उपमंडल के सबसे बड़े नालागढ़ अस्पताल में एक मरीज इस बीमारी से उपचाराधीन है। ओपीडी में इस रोग से ग्रस्त मरीज आ रहे हैं जिनकी स्क्रीनिंग करके दवाएं दी जा रही हैं।
चिकित्सकों के मुताबिक किसी भी प्रकार की बुखार की स्थिति में सिर्फ पैरासिटामोल दवा का ही उपयोग करें। अन्य किसी भी प्रकार की दवा का सेवन न करें। बुखार व अन्य किसी लक्ष्ण के पाए जाने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। बरसात में आमतौर पर तेज बुखार से पीड़ित रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। यह बुखार स्क्रब टायफस भी हो सकता है। यह रोग एक जीवाणु विशेष रिकेटशिया से संक्रमित पिस्सू (माइट) के काटने से फैलता है। जो खेतों, झाड़ियों और घास में रहने वाले चूहों में पनपता है।
नालागढ़ अस्पताल के एमडी मेडिसिन डॉ. आनंद घिल्डियाल ने कहा कि यह बुखार स्क्रब टायफस हो सकता है। यदि किसी को तेज बुखार जो 104 से 105 डिग्री तक जा सकता है। जोड़ों में दर्द, कंपकंपी के साथ बुखार, शरीर में ऐंठन, अकड़न या शरीर टूटा हुआ लगना, अधिक संक्रमण में गर्दन बाजुओं के नीचे कूल्हों के उपर गिल्टियां होना इसके प्रमुख लक्षण है और ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।
विज्ञापन
बीएमओ नालागढ़ डॉ. केडी जस्सल ने कहा कि स्क्रब टायफस से ग्रसित एक मरीज अस्पताल में उपचाराधीन हैं जबकि अन्य मरीजों की स्क्रीनिंग कर उन्हें दवा दी जा रही है।
विज्ञापन
चिकित्सकों के मुताबिक किसी भी प्रकार की बुखार की स्थिति में सिर्फ पैरासिटामोल दवा का ही उपयोग करें। अन्य किसी भी प्रकार की दवा का सेवन न करें। बुखार व अन्य किसी लक्ष्ण के पाए जाने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। बरसात में आमतौर पर तेज बुखार से पीड़ित रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। यह बुखार स्क्रब टायफस भी हो सकता है। यह रोग एक जीवाणु विशेष रिकेटशिया से संक्रमित पिस्सू (माइट) के काटने से फैलता है। जो खेतों, झाड़ियों और घास में रहने वाले चूहों में पनपता है।
विज्ञापन
नालागढ़ अस्पताल के एमडी मेडिसिन डॉ. आनंद घिल्डियाल ने कहा कि यह बुखार स्क्रब टायफस हो सकता है। यदि किसी को तेज बुखार जो 104 से 105 डिग्री तक जा सकता है। जोड़ों में दर्द, कंपकंपी के साथ बुखार, शरीर में ऐंठन, अकड़न या शरीर टूटा हुआ लगना, अधिक संक्रमण में गर्दन बाजुओं के नीचे कूल्हों के उपर गिल्टियां होना इसके प्रमुख लक्षण है और ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।
विज्ञापन
बीएमओ नालागढ़ डॉ. केडी जस्सल ने कहा कि स्क्रब टायफस से ग्रसित एक मरीज अस्पताल में उपचाराधीन हैं जबकि अन्य मरीजों की स्क्रीनिंग कर उन्हें दवा दी जा रही है।