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Solan News: उत्तराखंड की तर्ज पर 46 पहाड़ों पर बनाई कंक्रीट की बड़ी नालियां

Wed, 15 Jul 2026 11:33 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन Updated Wed, 15 Jul 2026 11:33 PM IST
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Large concrete drains constructed on 46 hills, following the Uttarakhand model.
एनएच-5 के साथ लगते पहाड़ों में बनाई जा रही नालियां। संवाद
परवाणू-शिमला फोरलेन को सुरक्षित करने के लिए अपनाई तकनीक
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मानसून के बीच हाईवे को सुरक्षित रखने का एनएचएआई का बड़ा प्रयोग
पहाड़ से नहीं रिसेगा पानी, पक्की नालियों से सीधे ड्रेनेज तक पहुंचेगा पानी
सुरेंद्र ठाकुर
धर्मपुर(सोलन)। प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही पिंजौर-सोलन नेशनल हाईवे पांच को भूस्खलन से बचाने के लिए एक बड़ा प्रयोग किया गया है। उत्तराखंड के पहाड़ों की तर्ज पर हाईवे-5 के 46 संवेदनशील पहाड़ों के शीर्ष पर कंक्रीट की नालियां बनाई गई हैं। इस नई तकनीक से अब बरसात के दिनों में पहाड़ों के दरकने का खतरा काफी हद तक कम होने की उम्मीद है। पहाड़ों के ऊपर कंक्रीट की नालियां बनाने से बारिश का पानी मिट्टी या पत्थरों में रिसने के बजाय सीधे इन नालियों के रास्ते सड़क किनारे बने जल निकासी प्रणाली तक पहुंच जाएगा।
पानी का रिसाव न होने के कारण पहाड़ों पर सुरक्षा के लिए लगाई गई हाइड्रोजन ग्रीन शीट और मैकमेश जालियां अपनी जगह पर पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी। बरसात के मौसम में एनएचएआई को इस हाईवे पर हर वर्ष भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। पहाड़ों के दरकने और अचानक पत्थर गिरने के कारण हर साल करोड़ों रुपये का नुकसान होता था साथ ही यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाती थी। हालांकि, बीते दो दिनों की बारिश में भी कुछ जगहों पर पत्थर गिरे हैं लेकिन राहत की बात यह है कि ये पत्थर उन्हीं पहाड़ों से गिरे हैं जहां अभी तक हाइड्रोजन ग्रीन शीट या मैकमेश जाली लगाने का काम नहीं हुआ है। परवाणू से सोलन हाईवे पर सबसे खतरनाक माने जाने वाले चक्कीमोड़ और अन्य संवेदनशील ढलानों को सुरक्षित करने के लिए निर्माण कंपनी पिछले दो वर्षों से लगातार जुटी हुई है। पिछली भारी बारिश में कुछ स्थानों पर हाइड्रोजन ग्रीन शीट फेल होती नजर आई थी लेकिन कंपनी ने इस बार समय रहते उन कमजोर कड़ियों को सुधार लिया है। जिन एक-दो स्थानों पर शीट को नुकसान पहुंचा था, उन्हें बदलकर अब कंक्रीट की नालियों से लैस कर दिया गया है।
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कोट
उप परियोजना प्रबंधक एसआरएम कंपनी मनोज कुमार ने बताया कि पहाड़ों को हर हाल में सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जहां भी पिछली बार नुकसान हुआ था, उसे ठीक कर दिया गया है। हमें पूरी उम्मीद है कि इस नई तकनीक और कंक्रीट नालियों के मेल से हम इस बार पहाड़ों को खिसकने से रोकने में पूरी तरह सफल होंगे।

एनएच-5 के साथ लगते पहाड़ों में बनाई जा रही नालियां। संवाद

एनएच-5 के साथ लगते पहाड़ों में बनाई जा रही नालियां। संवाद

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