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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   Lady in Jabal-Jhamrot pioneering natural farming, doubled income also

प्राकृतिक खेती अपनाने से बंद हो गए किसानों के दवा खाते

Sun, 08 May 2022 10:42 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 08 May 2022 10:42 PM IST
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आदित्य सोफत
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सोलन। प्रदेश में महिलाएं हर क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने में कामयाबी हासिल कर रही हैं। ऐसा ही कार्य जाबल-झमलोट पंचायत के गांव कोटी की रहने वाली राधा ने कर दिखाया। शीतल ग्रुप से प्राकृतिक खेती की बारे में पता चलने के बाद राधा ने एक बीघा जमीन पर प्राकृतिक खेती शुरू की।
परिणाम यह रहा कि फसल की अच्छी पैदावार हुई और खर्च न के बराबर। घरवालों ने राधा की मेहनत देखकर अन्य खेतों में प्राकृतिक खेती शुरू कर दी। परिणामस्वरूप बाजार से आने वाले रसायन और कीटनाशक दवाओं का खर्च बंद हो गया। कीटनाशक दवाओं और रसायनों को महंगे दामों पर खरीद के लिए लगाए खाते भी बंद हो गए।
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राधा अन्य 20 महिलाओं को भी प्राकृतिक खेती के लिए प्रशिक्षित कर रही हैं जिससे वे भी इस खेती को अपनाकर खर्च कम कर सकें। राधा ने बताया कि इससे पहले वह अन्य किसानों की तरह खेत में फर्टीलाइजर और केमिकल का प्रयोग करती थी।
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इससे पैदावार तो अच्छी हो जाती थी लेकिन खर्च अधिक होता था। एक बीघा जमीन पर नकदी फसलों को उगाने के लिए करीब 20 से 25 हजार रुपये का खर्चा आता था। कई बार पौधों को कीड़े लगने से बचाने के लिए महंगे दामों पर कीटनाशक मंगवाने पड़ते थे।
इस खर्चे को फसलों को बेचने के बाद चुकाना पड़ता था। इसके चलते राशन की दुकानों की तरह दवा केंद्रों में भी उधारी का खाता बनाना पड़ता था। जैसे ही फसल बिकती थी, तब इस खाते को बंद करते थे। अब यह खाता प्राकृतिक खेती ने हमेशा के लिए ही बंद कर दिया है। इससे पैदावार तो बढ़ी ही है और आमदनी भी दोगुना हो गई है।
खतरा भी हो गया दूर
राधा का कहना है कि प्राकृतिक खेती से स्किन और अन्य बीमारियों का खतरा भी दूर हो गया है। इसी के साथ बनाई गई कीटनाशक दवाओं के अधिक छिड़काव से कोई साइड इफेक्ट होते हैं। रसायनिक खादों और कीटनाशक दवाओं के प्रयोग से स्किन एलर्जी हो जाती थी। अधिक छिड़काव से पौधे भी खराब रहने का डर रहता था। अब यह खतरा पूरी तरह दूर हो गया है।
500-700 रुपये में तैयार हो जाती है खाद
प्राकृतिक खाद को तैयार करने के लिए मात्र 500-700 रुपये का खर्च आता है। खाद तैयार करने के लिए गोबर, गोमूत्र के अलावा बेसन, गुड़ और तंबाकू पाउडर की आवश्यकता होती है। इस खाद का छिड़काव आवश्यकतानुसार किया जाता है। गांव में अन्य लोग इस खाद को खरीदने भी आते हैं।

बगीचे में भी प्राकृतिक खेती से तैयार हो गया नींबू
राधा की मेहनत बगीचे में भी रंग लाई है। बगीचे में प्राकृतिक खेती से पहले तो नींबू तैयार किए गए और अब संतरा, मौसमी और अमरूद भी तैयार किए हैं। पहले चरण में नींबू की खेती पर किए प्रशिक्षण का फायदा मिला। बीते सालों से यह पैदावार दो क्विंटल से अधिक हो रही है।
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