सोलन। एटक में श्रम संहिताओं के विरोध में केंद्र सरकार के प्रति रोष पनपने लगा है। जिसको लेकर बुधवार को धरना-प्रदर्शन किया गया। वहीं पुराना डीसी चौक से लेकर माल रोड तक रैली निकाली और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। इस मौके पर सदस्यों ने श्रम कानूनों की प्रतियों को जलाया। अध्यक्ष जगदीश चंद्र भारद्वाज ने कहा कि पिछले सौ वर्षों में जो कानून मजदूर वर्ग ने कड़े संघर्षों और बलिदानों के बाद अपने हित में बनवाए थे, जिन्हें केंद्रीय सरकार ने समाप्त कर दिया है।
कानूनों को समाप्त करके चार श्रम संहिताएं बना दी हैं, जो कि पूरी तरह से उद्योगपतियों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, कॉरपोरेट का संरक्षण करते हैं। जिस संस्थान में 50 तक मजदूर कार्य करते हैं, वहां पर सरकार ने इन श्रम संहिताओं को लागू नहीं किया है। करोड़ों मजदूरों को बंधुआ बनाने का काम सरकार ने कर दिया है। उन्हें हर प्रकार के सेवा लाभों से वंचित कर दिया है। औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947, कारखाना अधिनियम 1948, ट्रेड यूनियन एक्ट 1926, औद्योगिक रोजगार स्थायी आदेश (कानून) 1946, वेतन भुगतान अधिनियम 1948, वेतन भुगतान अधिनियम 1936, मातृत्व लाभ अधिनियम, कामगार मुआवजा अधिनियम, अंतर राज्य प्रवासी मजदूर कानून, दुकान एवं प्रतिष्ठान वाणिज्य अधिनियम, बाल मजदूरी विरुद्ध कानून, समान काम समान वेतन कानून, अर्थात उन सभी कानूनों को समाप्त कर चार संहिताएं बड़े घरानों के हित में बना दी हैं। 80 प्रतिशत कामगार सभी प्रकार के कानूनों और लाभों से वंचित कर दिए गए हैं। सरकार 1 अप्रैल से नई श्रम संहिताओं को लागू करने की अधिसूचना जारी कर रही है। जिसका ट्रेड यूनियन पुरजोर विरोध करती है। उन्होंने सरकार को अनिश्चितकालीन (काम रोको) हड़ताल पूरे देश में करने के लिए चेताया है। ट्रेड यूनियन केंद्र सरकार के मजदूर, कर्मचारी और किसान विरोधी बजट की निंदा करती है। इस मौके पर भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।