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80 विद्यार्थियों को पढ़ा रहा मात्र एक शिक्षक
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संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। राजकीय प्राथमिक पाठशाला बघेरी एक अध्यापक के भरोसे चल रहा है। स्कूल में करीब 80 विद्यार्थी है। यदि अध्यापक ने छुट्टी जाना हो तो दूसरे स्कूल से अध्यापक को डेपुटेशन पर अध्यापक को बुलाना पड़ता है। यदि अध्यापक को इमरजेंसी पड़ जाए तो बच्चों को छुट्टी करनी पड़ती है। हालत यह है कि स्कूल में पढ़ाई करवाना तो दूर बच्चों को संभालना भी मुश्किल हो गया है। शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है। इसके बावजूद अध्यापकों की तैनाती नहीं हो पा रही है।
बघेरी स्कूल प्रबंध समिति के अध्यक्ष रामदास और पंचायत प्रधान प्रदीप सिंह ने बताया कि स्कूल में एक ही अध्यापक होने के बारे में कई बार बताया जा चुका है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
बघेरी निवासी राज कुमार ने बताया कि पहले यहां दो अध्यापक तैनात थे।
अचानक दोनों को बदल दिया। अब उनकी जगह एक महिला अध्यापक को भेजा गया है। करीब 80 बच्चों को एक अध्यापिका के लिए संभालना मुश्किल हो रहा है। वार्ड सदस्य मान कौर, बलबीर सिंह और रणजीत सिंह ने बताया कि दो साल कोरोना के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पाए। अब स्कूल में अध्यापक ही नहीं है।
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उधर, खंड प्राथमिक शिक्षा अधिकारी अनोख सिंह ने बताया कि काफी समय से नई भर्ती नहीं हुई है जिस कारण नालागढ़ शिक्षा खंड में अध्यापकों के पद खाली पड़े हैं। जैसे ही सरकार नई भर्ती करेगी, सभी पदों को भर दिया जाएगा।
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नालागढ़ (सोलन)। राजकीय प्राथमिक पाठशाला बघेरी एक अध्यापक के भरोसे चल रहा है। स्कूल में करीब 80 विद्यार्थी है। यदि अध्यापक ने छुट्टी जाना हो तो दूसरे स्कूल से अध्यापक को डेपुटेशन पर अध्यापक को बुलाना पड़ता है। यदि अध्यापक को इमरजेंसी पड़ जाए तो बच्चों को छुट्टी करनी पड़ती है। हालत यह है कि स्कूल में पढ़ाई करवाना तो दूर बच्चों को संभालना भी मुश्किल हो गया है। शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है। इसके बावजूद अध्यापकों की तैनाती नहीं हो पा रही है।
बघेरी स्कूल प्रबंध समिति के अध्यक्ष रामदास और पंचायत प्रधान प्रदीप सिंह ने बताया कि स्कूल में एक ही अध्यापक होने के बारे में कई बार बताया जा चुका है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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बघेरी निवासी राज कुमार ने बताया कि पहले यहां दो अध्यापक तैनात थे।
अचानक दोनों को बदल दिया। अब उनकी जगह एक महिला अध्यापक को भेजा गया है। करीब 80 बच्चों को एक अध्यापिका के लिए संभालना मुश्किल हो रहा है। वार्ड सदस्य मान कौर, बलबीर सिंह और रणजीत सिंह ने बताया कि दो साल कोरोना के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पाए। अब स्कूल में अध्यापक ही नहीं है।
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उधर, खंड प्राथमिक शिक्षा अधिकारी अनोख सिंह ने बताया कि काफी समय से नई भर्ती नहीं हुई है जिस कारण नालागढ़ शिक्षा खंड में अध्यापकों के पद खाली पड़े हैं। जैसे ही सरकार नई भर्ती करेगी, सभी पदों को भर दिया जाएगा।