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थ्योरी में ग्रामीण और प्रेक्टिकल में शहरी क्षेत्र के बच्चे आगे
ब्यूरो, सोलन
Updated Thu, 16 Feb 2017 10:21 PM IST
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जिला सोलन में ग्रामीण स्तर पर सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी थ्योरी में शहर के निजी और सरकारी स्कूलों के छात्रों से आगे हैं।
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जिला सोलन में ग्रामीण स्तर पर सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी थ्योरी में शहर के निजी और सरकारी स्कूलों के छात्रों से आगे हैं। प्रेक्टिकल विषयों में ग्रामीण स्कूलों के विद्यार्थी मात खा रहे हैं। लिहाजा आगामी शैक्षणिक सत्र में जिला के ग्रामीण स्कूलों में प्रेक्टिकल विषयों पर फोकस होगा। शहरों में थ्योरी पर ध्यान दिया जाएगा।
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शिक्षकों की ट्रेनिंग में इस बिंदु का खास ध्यान रखा जाएगा। यह खुलासा सर्व शिक्षा अभियान द्वारा इंटर एक्सचेंज योजना में विद्यार्थियों की असेसमेंट से हुआ है। सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) ने इस योजना के प्रथम चरण में मांगल और बेरल के ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को शहर के एक प्राइवेट स्कूल में यह कार्यक्रम आरंभ किया था।
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इसमें छठी और सातवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं को लिया गया। इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवेश के बच्चों को शहरी परिवेश से जोड़ना रहा। कार्यक्रम के तहत ग्रामीण और शहरी विद्यार्थियों की रोजाना हर विषय की पढ़ाई एकसाथ करवाई गई। यही नहीं इस योजना के तहत आए शिक्षकों को भी कक्षा में बिठाया गया। अंत में सभी छात्र-छात्राओं का टेस्ट भी लिया गया। इसके तहत यह खुलासा हुआ है।
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अब गांवों की पाठशालाओं में
पढ़ेंगे शहरी स्कूलों के बच्चे
सोलन। इंटर एक्सचेंज योजना के तहत सोलन के गर्ल्स स्कूल की आठवीं कक्षा की 10 और छात्र स्कूल से आठवीं कक्षा के 10 विद्यार्थियों का चयन किया गया है। यह 20 फरवरी और 25 फरवरी तक धुंधन के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित मांगल स्कूल में जाकर शिक्षा हासिल करेंगे।
प्रथम चरण में इस योजना के अच्छे परिणाम मिले हैं। इस योजना का मकसद ग्रामीण और शहरी शिक्षा प्रणाली को विद्यार्थियों से रूबरू करवाना है। योजना के तहत ग्रामीण और शहरी शिक्षक इन 6 दिनों में दोनों परिवेश के तहत बच्चों को पढ़ाई में उपयोगी अच्छी चीजों को ग्रहण करेंगे। इससे भविष्य में शहरी और दूरदराज के क्षेत्रों के बच्चों की पढ़ाई में पेश आने वाली दिक्कतों को कम किया जा सके। जहां बदलाव की जरूरत होगी वहीं सिखाने के तरीकों में शिक्षकों द्वारा बदलाव किए जाएंगे।
सीखाने के तरीकों में बदलाव
इंटर एक्सचेंज अभियान योजना के प्रथम चरण में ग्रामीण और शहरी स्कूलों के शिक्षकों ने एक-दूसरे के पढ़ाई के अच्छे तरीके को अपनाया। साथ ही छात्रों को पढ़ाने के तरीकों में भी बदलाव किए। इसके अच्छे परिणाम इन छात्रों ने अपनी परीक्षा में दिए। इसके चलते एसएसए, आरएमएसए और शिक्षा विभाग ने अगले चरण की योजना बनाई है।
ग्रामीण और शहरी विद्यार्थियों का होगा टेस्ट
योजना के तहत कार्यक्रम के अंत में ग्रामीण और शहरी विद्यार्थियों का टेस्ट साथ-साथ करवाया जाएगा। इसके ग्रामीण परिवेश के विद्यार्थी जीतते हैं तो वहां का पैटर्न शहरी स्कूलों में लागू करने की योजना बनाई जाएगी। अगर शहर के विद्यार्थी जीते तो ग्रामीण परिवेश में शहर की प्रणाली लागू होगी। इस तरह के पहले एक्सचेंज में ब्वॉयज स्कूल सोलन और अर्की के स्कूल को लिया है।
पहली बार इंटर एक्सचेंज कार्यक्रम : प्राचार्य
जिला परियोजना अधिकारी एवं डाइट के प्राचार्य तरविंद्र कौर नेगी ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि शिक्षा में गुणवत्ता और इसे अधिक रोचक बनाने के लिए प्रदेश में पहली बार ऐसी इंटर एक्सचेंज अभियान योजना आरंभ की है। इसमें गांव के बच्चों को शहर के स्कूलों में और शहरी स्कूलों के विद्यार्थियों को गांव में पढ़ने का मौका मिल रहा है। इसका मकसद ग्रामीण और शहरी शिक्षा प्रणाली को विद्यार्थियों से रूबरू करवाना है। कहा कि इस योजना के तहत विद्यार्थियों का एक टेस्ट भी लिया जाएगा।