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सरकार ये कैसा विकास: मथान में न सड़क न पानी
ब्यूरो, सोलन
Updated Thu, 23 Feb 2017 12:20 AM IST
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प्रकृति ने जिसे संवारने में कोई कसर नहीं छोड़ी उस जमीन के लोग आज सरकारों की उपेक्षा के चलते मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
- फोटो : अमर उजाला
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प्रकृति ने जिसे संवारने में कोई कसर नहीं छोड़ी उस जमीन के लोग आज सरकारों की उपेक्षा के चलते मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। यहां के हालात देखकर यही लगता है कि नेताओं के भाषणों से निकलने वाले विकास के शब्द मंचों तक ही सीमित हैं। सुबाथू मार्ग पर सोलन से 13 किलोमीटर दूर देवठी पंचायत की अंतिम बाउंडरी से छूते मथान गांव की हालत कुछ ऐसी ही है।
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दुर्गम पहाड़ के शीर्ष पर बसे मथान गांव के सामने राजधानी शिमला और जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट का मनोहारी नजारा नजर आता है। गांव के पिछली तरफ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कसौली का साफ अद्भुत दृश्य है। दिल खोलकर प्रकृति के संवारे इस गांव में अभी तक सड़क नहीं पहुंची है।
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लिहाजा पर्यटकों की पहुंच से गांव कोसों दूर है। यहां न तो कोई स्वास्थ्य केंद्र है न ही पीने के पानी का बंदोबस्त। स्कूली बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए पैदल सफर करना पड़ता है। रोगियों के अलावा पैदावार को सड़क तक पहुंचना मुश्किल और चुनौती भरा है। गांव के अंतिम छोर तक पहुंचने के लिए चार से पांच किमी तक का सफर करना पड़ता है।
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लोग पारंपरिक विधि से बारिश के पानी की एक-एक बूंद को सिंचाई और अन्य कार्यों के लिए संजोकर रखते हैं। खेती कीटनाशक के बिना आर्गेनिक तरीके से करते हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो सीजन में प्रतिदिन 100 कैरेट से अधिक टमाटर,
60-70 बैग शिमला मिर्च समेत 12 माह तक अनेक सब्जियों की यहां पैदावार होती है। प्रकृति ने इस गांव को भरपूर सौंदर्य और जमीन को शिमला और कसौली की ठंडी फिजाओं से मिलने वाली उपजाऊ नमी से नवाजा है। कम पानी में भी यह जमीन सोना उगलती है। लेकिन फसलों को मंडियों तक पहुंचाने में किसानों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।
सड़क का सर्वे, पूरा काम अधूरा
लोगों के मुताबिक लघेचघाट-मथान-शरद-गवालसर सड़क का सर्वे हो चुका है। लेकिन जमीन का पेच इसके आड़े आ रहा है। कुछ नेताओं के मुताबिक अगर लोग एकजुट होकर गांव को विकास की तरफ ले जाने की सोच रखते हैं तो महज 200 मीटर जमीन के हिस्से की गिफ्ट डीड न होने से सड़क का काम रुका पड़ा है।
रोपवे बने आधुनिक, सोसायटी के अधीन हो
सीजन में टनों के हिसाब से सब्जी को रोड तक पहुंचाना किसानों के लिए कठिन चुनौती है। पंचायत ने अरसे पहले यहां रोपवे का निर्माण किया है। कुछ अरसा बंद रहने के बाद कुछ ग्रामीणों ने इसे अपने दम पर शुरू किया। इसमें एक समय पर 50 से
70 किलो सामान 10 से पंद्रह सेकेंड में सड़क किनारे पहुंच जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक मार्ग का दूसरा विकल्प यह रोपवे हो सकता है अगर इसे बिजली के संचालित करके आधुनिक बनाया जाए। इसके लिए सोसाइटी बनाई जाए और सरकारी अफसर इसका अध्यक्ष बने। बाकायदा रोपवे के प्रयोग के लिए राशि भी वसूली जाए।
ग्रामीणों की जुबानी
पूर्व प्रधान नरेश कुमार ने कहा कि सिर्फ 200 मीटर भूमि के पीछे सड़क का काम रुका पड़ा है। पंद्रह साल वह प्रधान रहे। उन्होंने एड़ी चोटी का जोर सड़क पहुंचाने के लिए लगाया लेकिन कामयाब नहीं हो सके। बिशन सिंह का कहना है कि क्षेत्र विकसित होना चाहिए। शिमला, चायल और कसौली का अद्भुत नजारा यहां दिखता है।
इसे इक्को टूरिज्म के नजरिये से भी विकसित किया जा सकता है। रोशन लाल ठाकुर ने कहा कि गांव में सड़क किस दिशा से भी आए वह गांव के विकास के लिए अच्छा है। सड़क निर्माण एक लंबा कार्य है। नेताओं की घोषणा मात्र से सड़क नहीं बनती। लायक राम का कहना है कि यहां खेती पारंपरिक आर्गेनिक तरीके से होती है। यह आर्गेनिक सिटी के रूप में विकसित हो सकती है।
ग्रामीणों से करेंगे बात : चौहान
कसौली विधानसभा से कांग्रेस नेता एवं खादी बोर्ड के उपाध्यक्ष रमेश चौहान ने कहा कि शायद पंचायत का यही एक ऐसा गांव है जो सड़क से अछूता है। सड़क पहुंचाने के लिए ग्रामीणों से बात की जाएगी। कोई विवाद है तो ग्रामीण उसे मिल बैठकर सुलझा सकते हैं। रोपवे, स्वच्छ पानी और स्वास्थ्य उपकेंद्र की मांग पूरी करने की कोशिश होगी।
सड़क के लिए है फंड : विधायक
विधायक डॉ. राजीव सहजल ने कहा कि इस गांव की सड़क के लिए एमपी फंड से पैसा दिया है। पंचायत के पास खुद का भी कुछ पैसा है। लेकिन जमीनी पेच के चलते सड़क का काम अधूरा पड़ा है। पानी के लिए टैंक बनाए गए हैं। गांव को विकसित करने के हर संभव प्रयत्न होंगे। लोगों को समझाया जाएगा।
ग्रामीण गिफ्ट डीड को राजी नहीं : लोनिवि
लोनिवि कसौली के अधिशासी अभियंता संदीप कुमार सोबती ने बताया कि लघेचघाट-मथान-शरद-गवालसर सड़क का सर्वे हो चुका है। इसमें कार्य आगे इसलिए नहीं हो सका क्योंकि 75 फीसदी सड़क का निर्माण स्थानीय लोगों की जमीन पर होगा। इसके लिए ग्रामीण राजी नहीं है। जब तक लोग गिफ्ट डीड के तहत जमीन नही देंगे विभाग काम नहीं कर सकेगा।
प्रशासन करेगा हर संभव मदद : डीसी
डीसी डॉ. राकेश कंवर ने कहा कि ग्रामीणों को अगर सड़क चाहिए तो जमीन गिफ्ट दें। प्रशासन अपने स्तर पर सड़क निर्माण में तेजी लाएगा और फंडिंग का प्रावधान करेगा। रोपवे, पानी और अन्य समस्याओं को लेकर यदि स्थानीय लोग उनके पास आते हैं तो संबधित विभागों से संपर्क करके एस्टिमेट तैयार करवाए जाएंगे।