हिमाचल प्रदेश: सैंपल फेल होने के बाद 96 दवा इकाइयों में उत्पादन पर रोक, लोगों को दी गई ये सलाह; जानें
हिमाचल प्रदेश में दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 96 दवा विनिर्माण इकाइयों में पूरी फैक्टरी या विशिष्ट सेक्शन में उत्पादन पर रोक लगाई गई है।
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हिमाचल प्रदेश में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर औषधि नियंत्रक प्रशासन ने मरीजों और आम जनता से ड्रग अलर्ट में मानक गुणवत्ता से कम घोषित दवाओं के संबंधित बैच का इस्तेमाल न करने की अपील की है। प्रदेश के राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने कहा कि जिन दवा कंपनियों की दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरतीं, उन्हें सुधारात्मक और निवारक कार्रवाई के सत्यापन तक दवाओं का निर्माण करने की अनुमति नहीं दी जाती। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 96 दवा विनिर्माण इकाइयों में पूरी फैक्टरी या विशिष्ट सेक्शन में उत्पादन पर रोक लगा दी गई है।
संबंधित मामलों में कानून के प्रावधानों के अनुसार विनिर्माण लाइसेंस निलंबित या रद्द करने की कार्रवाई की जाती है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की ओर से जारी सितंबर के ड्रग अलर्ट में देशभर के 330 दवा सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इनमें से 92 सैंपल हिमाचल प्रदेश के दवा निर्माताओं से संबंधित हैं। ड्रग कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार प्रदेश में 92 सैंपलों में से 70 में दवाओं की मात्रा और घुलने की क्षमता जैसे महत्वपूर्ण गुणवत्ता मानकों में कमी पाई गई, जबकि 22 सैंपलों में लेबलिंग सहित अन्य छोटी खामियां सामने आईं।
डॉ. मनीष ने बताया कि जिन क्षेत्रों से दवाओं के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे जाते हैं, वहां के संबंधित अधिकारियों की ओर से भी कानूनी कार्रवाई की जाती है। घटिया दवाओं के निर्माण और वितरण के प्रति जीरो टॉलरेंस है।
जुलाई के ड्रग अलर्ट में देशभर के 239 नमूनों में से हिमाचल के 82 सैंपल शामिल थे। अगस्त में देशभर के 220 नमूनों में से 64 हिमाचल से संबंधित थे, जबकि सितंबर में 330 में से 92 सैंपल प्रदेश के दवा निर्माताओं के हैं। स्वास्थ्य सचिव के अनुसार, घरेलू आपूर्ति में प्रदेश की लगभग 33 प्रतिशत हिस्सेदारी के मुकाबले एनएसक्यू नमूनों का अनुपात जुलाई के 34 प्रतिशत से घटकर सितंबर में 28 प्रतिशत रह गया है। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि मीडिया मरीजों और आम जनता को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने लोगों से सीडीएससीओ की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी ड्रग अलर्ट देखने और उसमें दर्ज दवाओं के नाम व बैच नंबर की जांच करने की अपील की, ताकि गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली दवाओं के संबंधित बैचों का इस्तेमाल रोका जा सके।