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प्रधान एसोसिएशन के चुनाव में पहाड़ी क्षेत्र की अनदेखी का आरोप
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नालागढ़(सोलन)। नालागढ़ विकास खंड के तहत पंचायत प्रधान एसोसिएशन के चुनाव पर कुछ प्रधानों ने आपत्ति जताई है। आरोप है कि इस चुनाव में पहाड़ी क्षेत्र की रामशहर तहसील के अंतर्गत पंचायत प्रधानों की अनदेखी की गई और कार्यकारिणी में किसी को भी स्थान नहीं दिया है।
कुछ लोगों का कहना है पूरे प्रदेश में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित कर दिया था। ऐसे में इस चुनाव को टाला जा सकता है लेकिन ऐसा नहीं करना दुर्भाग्यपूर्ण है। क्यार कनैतां पंचायत के प्रधान रघुराज पराशर ने आरोप लगाया कि प्रधानों को केवल आपस में मिलने के लिए सूचना दी गई थी।
इसमें चुनाव किए जाने की कोई सूचना नहीं थी। इस कारण अनेक प्रधान बैठक में शामिल नहीं हुए। उनका अनुमान था कि सरकार से घोषित तीन दिन के राजकीय शोक के कारण के कार्यक्रम स्थगित हो सकता है। वीरभद्र सिंह छह बार प्रदेश के मुख्यमंत्री और दो बार केंद्र में मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं तो उनके प्रति इतना तो सम्मान बनता है।
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ये नहीं हुए बैठक में शामिल
ग्राम पंचायत रामशहर की प्रधान कृष्णा शर्मा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के निधन के बाद छियाछी, मनलोग कलां, घड़याच, नंड, कोइडी, सरोर, बधोखरी, कोहू, रतवाड़ी, मटूली पंचायतों के प्रधान बैठक में शामिल नहीं हुए। इसका लाभ उठाकर उपस्थित लोगों ने आपस में पदों की बांट कर ली। मटूली पंचायत के प्रधान कमल किशोर ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र के प्रधानों की अनदेखी की गई। ग्राम पंचायत सरौर के प्रधान धर्मपाल चंदेल ने कहा कि राजकीय शोक घोषित होने के बाद कार्यक्रम को रद्द कर देना चाहिए था।
उधर, पंचायत प्रधान परिषद के अध्यक्ष पुनीत कौशल ने बताया कि यह कार्यक्रम पहले से निर्धारित था। पूर्व मुख्यमंत्री के अचानक निधन होने से इसे रद्द नहीं किया जा सका। पहाड़ी पंचायतों के प्रधानों को इस चुनाव में प्रतिनिधित्व दिया गया। पहाड़ी पंचायत साई के प्रधान को वरिष्ठ उपप्रधान और लग के प्रधान को उपप्रधान और मलेनी के प्रधान को कोषाध्यक्ष चुना गया।
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कुछ लोगों का कहना है पूरे प्रदेश में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित कर दिया था। ऐसे में इस चुनाव को टाला जा सकता है लेकिन ऐसा नहीं करना दुर्भाग्यपूर्ण है। क्यार कनैतां पंचायत के प्रधान रघुराज पराशर ने आरोप लगाया कि प्रधानों को केवल आपस में मिलने के लिए सूचना दी गई थी।
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इसमें चुनाव किए जाने की कोई सूचना नहीं थी। इस कारण अनेक प्रधान बैठक में शामिल नहीं हुए। उनका अनुमान था कि सरकार से घोषित तीन दिन के राजकीय शोक के कारण के कार्यक्रम स्थगित हो सकता है। वीरभद्र सिंह छह बार प्रदेश के मुख्यमंत्री और दो बार केंद्र में मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं तो उनके प्रति इतना तो सम्मान बनता है।
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ये नहीं हुए बैठक में शामिल
ग्राम पंचायत रामशहर की प्रधान कृष्णा शर्मा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के निधन के बाद छियाछी, मनलोग कलां, घड़याच, नंड, कोइडी, सरोर, बधोखरी, कोहू, रतवाड़ी, मटूली पंचायतों के प्रधान बैठक में शामिल नहीं हुए। इसका लाभ उठाकर उपस्थित लोगों ने आपस में पदों की बांट कर ली। मटूली पंचायत के प्रधान कमल किशोर ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र के प्रधानों की अनदेखी की गई। ग्राम पंचायत सरौर के प्रधान धर्मपाल चंदेल ने कहा कि राजकीय शोक घोषित होने के बाद कार्यक्रम को रद्द कर देना चाहिए था।
उधर, पंचायत प्रधान परिषद के अध्यक्ष पुनीत कौशल ने बताया कि यह कार्यक्रम पहले से निर्धारित था। पूर्व मुख्यमंत्री के अचानक निधन होने से इसे रद्द नहीं किया जा सका। पहाड़ी पंचायतों के प्रधानों को इस चुनाव में प्रतिनिधित्व दिया गया। पहाड़ी पंचायत साई के प्रधान को वरिष्ठ उपप्रधान और लग के प्रधान को उपप्रधान और मलेनी के प्रधान को कोषाध्यक्ष चुना गया।