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मटर की बुआई शुरू करें मध्य ऋतु वाले किसान
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। नौणी विश्वविद्यालय में मटर की फसल को लेकर किसानों को जरूरी हिदायतें दी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जो किसान मध्य ऋतु में मटर की बुआई करने जा रहे हैं, वे नवंबर माह की शुरुआती समय तक खेत तैयार करने का कार्य को पूरा कर लें।
मटर की फसल प्रदेश में रबी मौसम की मुख्य नकदी फसल हैं और ये सभी क्षेत्रों में सफलता से उगाई जाती है। मटर की अच्छी किस्मों से 8-16 क्विंटल तक उत्पादन प्रति बीघा लिया जा सकता है।
प्रदेश में मटर की फसल 23,900 हेक्टेयर क्षेत्र है जो प्रदेश में क्षेत्रफल की दृष्टि से सर्वाधिक है। प्रदेश में 2.71 लाख मीट्रिक टन उत्पादन प्रति वर्ष मटर का उत्पादन हो रहा है।
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कृषि उपनिदेशक डॉ. डीपी गौतम ने बताया कि मटर की खेती हिमाचल के मैदानी क्षेत्रों से लेकर लाहौल, किन्नौर, चंबा के कोल्ड डेजर्ट कहे जाने वाले क्षेत्रों में भी सफलतार्पूक की जा रही है।
जिले में सितंबर माह से अगेती मटर का बिजाई कार्य शुरू हो गया है। अब मध्य ऋतु की किस्मों के लिए किसान तैयारी कर रहे हैं। नवंबर में रोपाई का कार्य शुरू हो जाएगा।
यह है बुआई का समय
क्षेत्र अगेती किस्में मध्य ऋतु की किस्में
निचले पर्वतीय क्षेत्र सितंबर-अक्तूबर नवंबर
मध्य पर्वतीय क्षेत्र सितंबर (पहला पखवाड़ा) नवंबर
ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र मार्च-जून अक्तूबर-नवंबर
कितना लगाएं बीज
शीघ्र पकने वाली किस्मों के लिए 10 से 12 किलोग्राम प्रति बीघा। मध्य और देर से पकने वाली किस्मों के लिए 5-6 किलोग्राम प्रति बीघा लगाना चाहिए। अगेती किस्मों के लिए 30 गुणा 7.5 सेंटीमीटर और मध्य और देर से पकने वाली किस्मों की 60 गुणा 7.5 सेमी की दूरी रखें।
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सोलन। नौणी विश्वविद्यालय में मटर की फसल को लेकर किसानों को जरूरी हिदायतें दी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जो किसान मध्य ऋतु में मटर की बुआई करने जा रहे हैं, वे नवंबर माह की शुरुआती समय तक खेत तैयार करने का कार्य को पूरा कर लें।
मटर की फसल प्रदेश में रबी मौसम की मुख्य नकदी फसल हैं और ये सभी क्षेत्रों में सफलता से उगाई जाती है। मटर की अच्छी किस्मों से 8-16 क्विंटल तक उत्पादन प्रति बीघा लिया जा सकता है।
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प्रदेश में मटर की फसल 23,900 हेक्टेयर क्षेत्र है जो प्रदेश में क्षेत्रफल की दृष्टि से सर्वाधिक है। प्रदेश में 2.71 लाख मीट्रिक टन उत्पादन प्रति वर्ष मटर का उत्पादन हो रहा है।
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कृषि उपनिदेशक डॉ. डीपी गौतम ने बताया कि मटर की खेती हिमाचल के मैदानी क्षेत्रों से लेकर लाहौल, किन्नौर, चंबा के कोल्ड डेजर्ट कहे जाने वाले क्षेत्रों में भी सफलतार्पूक की जा रही है।
जिले में सितंबर माह से अगेती मटर का बिजाई कार्य शुरू हो गया है। अब मध्य ऋतु की किस्मों के लिए किसान तैयारी कर रहे हैं। नवंबर में रोपाई का कार्य शुरू हो जाएगा।
यह है बुआई का समय
क्षेत्र अगेती किस्में मध्य ऋतु की किस्में
निचले पर्वतीय क्षेत्र सितंबर-अक्तूबर नवंबर
मध्य पर्वतीय क्षेत्र सितंबर (पहला पखवाड़ा) नवंबर
ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र मार्च-जून अक्तूबर-नवंबर
कितना लगाएं बीज
शीघ्र पकने वाली किस्मों के लिए 10 से 12 किलोग्राम प्रति बीघा। मध्य और देर से पकने वाली किस्मों के लिए 5-6 किलोग्राम प्रति बीघा लगाना चाहिए। अगेती किस्मों के लिए 30 गुणा 7.5 सेंटीमीटर और मध्य और देर से पकने वाली किस्मों की 60 गुणा 7.5 सेमी की दूरी रखें।