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Solan News: सूखे की मार, पौधों की रोपाई का ठप पड़ा काम
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नौणी विवि में बिक चुके 70 फीसदी पौधे, बारिश न होने से बागवानों के हाथ खाली
70 फीसदी बिक चुके कीवी और अन्य गुठलीदार पौधे
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन हिमाचल प्रदेश में जारी लंबे सूखे ने किसान-बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश और बर्फबारी न होने के कारण प्रदेश में फलदार पौधों की रोपाई का काम पूरी तरह ठप पड़ गया है। बागवानों ने डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय (नौणी विवि) से पौधे तो खरीद लिए हैं, लेकिन मिट्टी में नमी न होने के कारण वे इन्हें बगीचों में नहीं लगा पा रहे हैं। वहीं, कई बागवान बारिश के इंतजार में अभी पौधों की खरीदारी से ही परहेज कर रहे हैं। नौणी विश्वविद्यालय के आंकड़ों के अनुसार, इस बार बागवानों का रुझान पारंपरिक सेब के बजाय गुठलीदार फलों की ओर अधिक दिख रहा है। विवि ने अपनी नर्सरियों में करीब 2 लाख पौधे बिक्री के लिए रखे थे, जिनमें से कीवी, जापानी फल और अन्य गुठलीदार (स्टोन फ्रूट्स) फलों के 70 फीसदी पौधे बिक चुके हैं। विवि के विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश होने के बाद इन पौधों की मांग में और भी बड़ा उछाल आ सकता है।
सेब की मांग में आई गिरावट
डॉ. जितेंद्र चौहान अध्यक्ष फल विज्ञान विभाग, नौणी विवि ने बताया कि सूखे के कारण इस बार सेब के पौधों की बिक्री स्टोन फ्रूट्स के मुकाबले कम रही है। बागवान अब उन फलों की ओर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं जो कम नमी में भी खुद को ढाल सकें या जिनकी बाजार में मांग बढ़ रही है।
बागवानों के लिए विशेष सलाह
जड़ों के विकास के लिए यह आवश्यक है कि उन्हें फैलने के लिए जरूरी स्थान और आहार मिले। इसलिए नियत स्थान पर एक घन मीटर का गड्ढा बनाएं। गड्ढे की मिट्टी को 10-12 दिन तक खुला रहने दें ताकि धूप लग सके। इससे हानिकारक जीवाणु तथा कीड़े नष्ट हो जाते हैं। पौधा लगाने से लगभग 15-20 दिन पहले गड्ढा मिट्टी से भरें और 20-30 किलोग्राम गली सड़ी गोबर की खाद तथा आधा किलोग्राम सुपर फास्फेट भी डालें। इसके उपरांत पानी डालें ताकि मिट्टी ठीक ढंग से बैठ जाए।
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कोट
सूखे की वजह से इस बार सेब के पौधों की बिक्री पर असर पड़ा है, लेकिन कीवी और जापानी फल की भारी मांग है। जैसे ही बारिश होगी, पौधों की रोपाई और बिक्री दोनों में तेजी आएगी।
-डॉ. जितेंद्र चौहान, अध्यक्ष, फल विज्ञान विभाग, नौणी विवि
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70 फीसदी बिक चुके कीवी और अन्य गुठलीदार पौधे
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन हिमाचल प्रदेश में जारी लंबे सूखे ने किसान-बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश और बर्फबारी न होने के कारण प्रदेश में फलदार पौधों की रोपाई का काम पूरी तरह ठप पड़ गया है। बागवानों ने डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय (नौणी विवि) से पौधे तो खरीद लिए हैं, लेकिन मिट्टी में नमी न होने के कारण वे इन्हें बगीचों में नहीं लगा पा रहे हैं। वहीं, कई बागवान बारिश के इंतजार में अभी पौधों की खरीदारी से ही परहेज कर रहे हैं। नौणी विश्वविद्यालय के आंकड़ों के अनुसार, इस बार बागवानों का रुझान पारंपरिक सेब के बजाय गुठलीदार फलों की ओर अधिक दिख रहा है। विवि ने अपनी नर्सरियों में करीब 2 लाख पौधे बिक्री के लिए रखे थे, जिनमें से कीवी, जापानी फल और अन्य गुठलीदार (स्टोन फ्रूट्स) फलों के 70 फीसदी पौधे बिक चुके हैं। विवि के विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश होने के बाद इन पौधों की मांग में और भी बड़ा उछाल आ सकता है।
सेब की मांग में आई गिरावट
डॉ. जितेंद्र चौहान अध्यक्ष फल विज्ञान विभाग, नौणी विवि ने बताया कि सूखे के कारण इस बार सेब के पौधों की बिक्री स्टोन फ्रूट्स के मुकाबले कम रही है। बागवान अब उन फलों की ओर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं जो कम नमी में भी खुद को ढाल सकें या जिनकी बाजार में मांग बढ़ रही है।
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बागवानों के लिए विशेष सलाह
जड़ों के विकास के लिए यह आवश्यक है कि उन्हें फैलने के लिए जरूरी स्थान और आहार मिले। इसलिए नियत स्थान पर एक घन मीटर का गड्ढा बनाएं। गड्ढे की मिट्टी को 10-12 दिन तक खुला रहने दें ताकि धूप लग सके। इससे हानिकारक जीवाणु तथा कीड़े नष्ट हो जाते हैं। पौधा लगाने से लगभग 15-20 दिन पहले गड्ढा मिट्टी से भरें और 20-30 किलोग्राम गली सड़ी गोबर की खाद तथा आधा किलोग्राम सुपर फास्फेट भी डालें। इसके उपरांत पानी डालें ताकि मिट्टी ठीक ढंग से बैठ जाए।
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सूखे की वजह से इस बार सेब के पौधों की बिक्री पर असर पड़ा है, लेकिन कीवी और जापानी फल की भारी मांग है। जैसे ही बारिश होगी, पौधों की रोपाई और बिक्री दोनों में तेजी आएगी।
-डॉ. जितेंद्र चौहान, अध्यक्ष, फल विज्ञान विभाग, नौणी विवि