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Solan News: कुनिहार में सूखे पेड़ बने मुसीबत, स्कूलों के पास मंडरा रहा खतरा
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कुनिहार में सुखे पेड़ हादसों को दे रहे न्यौता। संवाद
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बाजारों, बस स्टैंड में सूखी टहनियों का गिरना जारी, शिकायतों के बाद भी विभाग बेखबर
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार (सोलन)। कुनिहार क्षेत्र में सूखे और जर्जर हो चुके पेड़ राहगीरों और स्थानीय निवासियों के लिए मुसीबत बन गए हैं। रिहायशी इलाकों, व्यस्त बाजारों और स्कूलों के समीप खड़े ये पेड़ किसी भी वक्त बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं। हैरानी की बात यह है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद संबंधित विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है। कई पेड़ अंदर से खोखले हो चुके हैं और हल्की सी आंधी या बारिश भी इन्हें धराशायी करने के लिए काफी है। मुख्य सड़कों, बस स्टैंड और मंदिरों के पास इन पेड़ों की सूखी टहनियां गिरना अब आम बात हो गई है। जर्जर टहनियां न केवल पैदल चलने वालों और वाहन चालकों के लिए जोखिम बनी हुई हैं, बल्कि बिजली की लाइनों के ऊपर लटकने के कारण शॉर्ट सर्किट और आग लगने का खतरा भी बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि फाइलों में उलझी प्रक्रिया के कारण उनकी जान जोखिम में डाली जा रही है। मामले में विभागों की आपसी खींचतान भी सामने आई है। वन विभाग के डीएफओ राज कुमार ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि इसकी जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग की है।
ग्रामीणों ने दी जन आंदोलन की चेतावनी
अरविंद जोशी, कामेश्वर, अरुण, नीरज और फकरुद्दीन सहित दर्जनों ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इन पेड़ों को जल्द नहीं हटाया गया, तो वे जन आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि क्या प्रशासन तभी जागेगा जब कोई बड़ी अनहोनी हो जाएगी।
कोट
क्षेत्र में कई सूखे पेड़ गिरने की कगार पर हैं। इन्हें काटने के लिए अनुमति लेने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू कर दी जाएगी।
-मनसा राम, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी कुनिहार
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार (सोलन)। कुनिहार क्षेत्र में सूखे और जर्जर हो चुके पेड़ राहगीरों और स्थानीय निवासियों के लिए मुसीबत बन गए हैं। रिहायशी इलाकों, व्यस्त बाजारों और स्कूलों के समीप खड़े ये पेड़ किसी भी वक्त बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं। हैरानी की बात यह है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद संबंधित विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है। कई पेड़ अंदर से खोखले हो चुके हैं और हल्की सी आंधी या बारिश भी इन्हें धराशायी करने के लिए काफी है। मुख्य सड़कों, बस स्टैंड और मंदिरों के पास इन पेड़ों की सूखी टहनियां गिरना अब आम बात हो गई है। जर्जर टहनियां न केवल पैदल चलने वालों और वाहन चालकों के लिए जोखिम बनी हुई हैं, बल्कि बिजली की लाइनों के ऊपर लटकने के कारण शॉर्ट सर्किट और आग लगने का खतरा भी बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि फाइलों में उलझी प्रक्रिया के कारण उनकी जान जोखिम में डाली जा रही है। मामले में विभागों की आपसी खींचतान भी सामने आई है। वन विभाग के डीएफओ राज कुमार ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि इसकी जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग की है।
ग्रामीणों ने दी जन आंदोलन की चेतावनी
अरविंद जोशी, कामेश्वर, अरुण, नीरज और फकरुद्दीन सहित दर्जनों ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इन पेड़ों को जल्द नहीं हटाया गया, तो वे जन आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि क्या प्रशासन तभी जागेगा जब कोई बड़ी अनहोनी हो जाएगी।
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कोट
क्षेत्र में कई सूखे पेड़ गिरने की कगार पर हैं। इन्हें काटने के लिए अनुमति लेने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू कर दी जाएगी।
-मनसा राम, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी कुनिहार