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महिलाओं से घरेलू हिंसा का नब्बे फीसदी कारण नशा

Fri, 24 Dec 2021 11:27 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 24 Dec 2021 11:27 PM IST
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Drugs and intoxication root cause of domestic voilence in 90 percent cases
सोलन आईटीआई में अमर उजाला अपराजिता कार्यक्रम के दौरान मौजूद मुख्यतिथि अध्यापक व छात्राएं। संवा? - फोटो : SOLAN
सोलन। महिला थाना सह प्रभारी सीता नेगी ने कहा कि आमतौर पर घरेलू हिंसा का 90 फीसदी कारण नशा है। नशे की वजह से महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं। सब इंस्पेक्टर सीता नेगी शुक्रवार को अमर उजाला फाउंडेशन ने राजकीय आईटीआई सोलन में आयोजित अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि बोल रहीं थीं।
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उन्होंने इस मौके पर प्रशिक्षु छात्राओं को घरेलू हिंसा के अलावा, पोक्सो, ह्यूमन ट्रैफिकिंग एक्ट सहित महिला अधिकारों के प्रति जागरूक किया। इस मौके पर आईटीआई प्रधानाचार्य ललित कुमार सहित स्टाफ मौजूद रहा।
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उन्होंने बताया कि पोक्सो एक्ट में कोई भी नाबालिग लड़का-लड़की आते हैं जो अपराध का शिकार हुए हों। इस एक्ट में मुकदमा दर्ज होने पर आरोपी को उम्र भर की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा धमकी देने, लड़कियों को लगातार घूरना या छेड़ने पर भी सजा का प्रावधान है।
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पुलिस भर्ती के लिए हाइट फिक्स क्यों : पल्लवी
प्रशिक्षु छात्रा पल्लवी ठाकुर ने कार्यक्रम के दौरान पूछा कि पुलिस भर्ती के लिए हाइट पांच या 5.2 क्यों फिक्स की गई है। छोटी हाइट की लड़कियां भी पुलिस में जाना चाहती हैं। इस पर महिला थाना की उप प्रभारी ने बताया कि यह सरकारी नियमों के अनुसार होती है। अगर लड़कियां पुलिस में जाना चाहती हैं तो वे अलाइड या सिविल सर्विस की तैयारी कर सकती हैं।
किस प्रकार करें भर्ती की तैयारी : भावना
भावना ठाकुर ने सवाल किया कि पुलिस भर्ती कि तैयारी किस प्रकार की जा सकती है। सीता नेगी ने कहा कि पुलिस भर्ती के लिए पहले ग्राउंड टेस्ट होता है। जिसे पास करने के बाद ही लिखित परीक्षा होती है। ग्राउंड टेस्ट में दौड़, ऊंची कूद, लंबी कूद होती है।
भर्ती में क्यों है अलग-अलग पैमाना : आकृति
आकृति चौहान ने पूछा कि भर्ती में जनरल और अनुसूचित जाति के लिए अलग-अलग पैमाना क्यों है। एसआई सीता ने बताया कि यह प्रावधान संविधान के अनुसार बनाए गए हैं। इन्हें बदलना काफी कठिन है। संसद में कानून पास होने के बाद ही बदलाव होता है।
साइबर क्राइम में जल्दी इंसाफ क्यों नहीं : दिव्या
प्रशिक्षु छात्रा दिव्या ठाकुर ने प्रश्न किया कि साइबर क्राइम में जल्दी इंसाफ क्यों नहीं मिलता। सीता नेगी ने बताया कि सभी केस में तथ्य जुटाए जाते हैं। इसमें कई बार समय लगता है। साइबर क्राइम सेल अलग से कार्य कर रहा है और आरोपी पकड़े जा रहे हैं।
दुष्कर्म की फाइल बंद क्यों होती है : चंचल
चंचल चौहान ने कहा कि दुष्कर्म की फाइल बंद क्यों की जाती है। थाना उप प्रभारी ने बताया कि यदि महिला कोर्ट में 164 सीआरपीसी के तहत बयान दर्ज करवाकर कह दे कि उसके साथ कुछ नहीं हुआ है। इस आधार पर फाइल बंद होती है।
नाबालिग को सजा का क्या प्रावधान : मीनाक्षी
मीनाक्षी ने पूछा कि अगर कोई नाबालिग लड़का या लड़की कोई अपराध करें तो इसमें सजा का प्रावधान है या नहीं। सीता नेगी ने कहा कि उन्हें शेल्टर होम में भेजा जाता है और सजा का भी प्रावधान है।

आपराधिक घटनाओं में नहीं साधनी चाहिए चुप्पी : ललित
आईटीआई प्रधानाचार्य ललित कुमार ने कहा कि अगर लड़कियों और महिलाओं के साथ सच मेें आपराधिक घटनाएं घटित होती हैं तो उसके लिए चुप्पी नहीं साधनी चाहिए और अपराधी को सजा दिलानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यहां ध्यान देने की आवश्यकता है कि कोई निर्दोष व्यक्ति न फंसे क्योंकि एक बयान किसी की जिंदगी डुबो सकता है। उन्होंने कहा कि आईटीआई में भी कमेटी का गठन किया गया है।
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