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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   Dharmpur Railway Station completes 116 years; historic journey continues on the Kalka-Shimla rail route.

Solan News: धर्मपुर रेलवे स्टेशन ने पूरे किए 116 वर्ष, कालका–शिमला रेल मार्ग पर ऐतिहासिक सफर जारी

Fri, 03 Jul 2026 12:20 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jul 2026 12:20 AM IST
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कभी पंजाब के नाम से जाना जाता था यह स्टेशन,अब अत्याधुनिक विस्टाडोम और ट्रेन सेट की सीटी गूंजने का इंतजार
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धर्मपुर स्टेशन के अस्तित्व में आने से पहले सुक्कीजोहड़ी में हुआ करता था रेलवे स्टेशन
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर(सोलन)। विश्व धरोहर कालका-शिमला रेल सेक्शन पर स्थित ऐतिहासिक धर्मपुर रेलवे स्टेशन ने अपने गौरवमयी इतिहास के 116 वर्ष पूरे कर लिए हैं। वर्ष 1910 में वजूद में आया यह रेलवे स्टेशन कई ऐतिहासिक बदलावों और यादों को समेटे हुए है। कभी धर्मपुर पंजाब के नाम से पहचाने जाने वाले इस स्टेशन से आज अत्याधुनिक विस्टाडोम और ट्रेन सेट चलाने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। कालका-शिमला रेल लाइन पर धर्मपुर स्टेशन का सफर वर्ष 1910 में शुरू हुआ था। जब कालका से शिमला के लिए पहली ट्रेन की सीटी गूंजी थी। धर्मपुर के वरिष्ठ नागरिक गुरवचन सिंह सेठी और महेंद्र सिंगला ने बताया कि इस स्टेशन के अस्तित्व में आने से पहले सुक्कीजोहड़ी में रेलवे स्टेशन हुआ करता था। उन्होंने पुरानी यादें ताजा करते हुए बताया कि उस दौर में बसों की संख्या बेहद कम थी और उनमें भारी भीड़ रहती थी, जिसके चलते लोग ट्रेन के सफर को ही प्राथमिकता देते थे। हैरान करने वाली बात यह है कि वर्ष 1960 से पहले इस स्टेशन का नाम धर्मपुर पंजाब हुआ करता था। इसके बाद साल 1960 में यहां लगे साइन बोर्ड बदले गए और इसे धर्मपुर हिमाचल नाम दिया गया। बुजुर्गों के अनुसार, शुरुआती दौर में रेलवे स्टेशन से मालगाड़ी के जरिये आने वाले सामान को आगे ले जाने के लिए बैलगाड़ियों का इस्तेमाल किया जाता था। उस समय लोगों का पहनावा मुख्य रूप से धोती, कुर्ता और पगड़ी हुआ करता था। समय के साथ-साथ रेलवे ने ट्रेनों के रंग-रूप में भी कई बदलाव किए। वर्ष 1910 में जहां लाइट ब्राउन (हल्के भूरे) रंग की ट्रेन चलती थी, वहीं बाद में नीले और सफेद रंग की पट्टियों वाली ट्रेन पटरी पर दौड़ी और अब वर्तमान में यहां लाल रंग की ट्रेनें चलाई जा रही हैं।
बदहाली के आंसू रो रही 116 साल पुरानी धरोहरें
एक तरफ जहां स्टेशन का इतिहास बेहद समृद्ध है, वहीं दूसरी तरफ इसकी प्राचीन धरोहरें देखरेख के अभाव में दम तोड़ रही हैं। स्टेशन पर वर्ष 1910 की एक मैकेनिकल वेटिंग मशीन (वजन तोलने वाली मशीन) आज भी मौजूद है, लेकिन यह पिछले काफी समय से बंद पड़ी है। इसके अलावा, स्टेशन पर काफी पुराना ऐतिहासिक सामान कबाड़ की तरह पड़ा है। धर्मपुर हिमाचल का ऐतिहासिक लकड़ी से बना पुराना बोर्ड भी रखरखाव न होने के कारण अब गिरने की कगार पर पहुंच चुका है, जिसे सहेजने की दरकार है।
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पटरियों पर जल्द दौड़ेंगी अत्याधुनिक ट्रेन सेट और पैनोरैमिक विस्टाडोम
अतीत की यादों को समेटे इस ट्रैक को अब रेल मंत्रालय पूरी तरह से हाईटेक करने जा रहा है। पर्यटकों को विश्व स्तरीय और अत्याधुनिक सुविधाएं देने के लिए पिछले दो वर्षों से इस ट्रैक पर ट्रेन सेट और पैनोरैमिक विस्टाडोम ट्रेनों का ट्रायल चल रहा है। रेलवे सूत्रों के अनुसार, ट्रेन सेट का ट्रायल पूरी तरह सफल रहा है, जबकि पैनोरैमिक विस्टाडोम का ट्रायल भी काफी हद तक कामयाब रहा है। माना जा रहा है कि रेल मंत्रालय जल्द ही इन दोनों अत्याधुनिक ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर ट्रैक पर उतार देगा। बाहरी राज्यों से आने वाले सैलानी भी ट्रेन सेट के तीनों शानदार डिब्बों और विस्टाडोम के विहंगम दृश्यों का लुत्फ उठाने के लिए इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
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