{"_id":"67dc1823de0568e6d901fc36","slug":"demand-of-asha-workers-solan-news-c-176-1-ssml1040-139931-2025-03-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Solan News: मानदेय में 300 रुपये बढ़ोतरी आशा वर्करों के साथ भद्दा मजाक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Solan News: मानदेय में 300 रुपये बढ़ोतरी आशा वर्करों के साथ भद्दा मजाक
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडी स्वास्थ्य खंड की आशा वर्करों ने जताया रोष
मानदेय में वृद्धि करने और नियमितीकरण के लिए नीति बनाने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी(सोलन)। मुख्यमंत्री ने जो बजट पेश किया है, उसमें आशा कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई है। स्वास्थ्य खंड चंडी के तहत कार्यरत आशा कार्यकर्ताओं अंजू, सुरेखा, मीना, निशा, संतोष कुमारी, पूनम और मूर्ति ने बताया कि मात्र 300 रुपये मासिक मानदेय में बढ़ोतरी करना उनके साथ भद्दा मजाक है। उन्होंने कहा कि आशा वर्करों ने कोरोनाकाल में अपने परिवार को छोड़कर सेवाएं दी थीं। कभी भी सरकार को अपने कार्यों से नाखुश नहीं किया। हिमाचल में आपदा के समय सभी आशा कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर सरकार के राहत कोष में 1.25 लाख का सहयोग दिया। हिमाचल को टीवी मुक्त करने के लिए 100 दिनों के अभियान में आशाओं ने घर-घर जाकर लोगों के बलगम की जांच करवाई, एक्सरे करवाए और रोगियों के इलाज में पूर्ण सहयोग दिया। आशा कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत से आज मातृत्व और शिशु मृत्यु दर में बहुत कमी आई है। जबकि प्रदेश सरकार ने आशा वर्करों के कार्यों को अनदेखा किया। उन्होंने कहा कि मात्र 300 का मानदेय बढ़ाकर मजाक किया गया है। उन्होंने मांग उठाई कि महंगाई के अनुरूप उनके मानदेय में वृद्धि की जाए और नियमितीकरण के लिए नीति बनाई जाए।
विज्ञापन
मानदेय में वृद्धि करने और नियमितीकरण के लिए नीति बनाने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी(सोलन)। मुख्यमंत्री ने जो बजट पेश किया है, उसमें आशा कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई है। स्वास्थ्य खंड चंडी के तहत कार्यरत आशा कार्यकर्ताओं अंजू, सुरेखा, मीना, निशा, संतोष कुमारी, पूनम और मूर्ति ने बताया कि मात्र 300 रुपये मासिक मानदेय में बढ़ोतरी करना उनके साथ भद्दा मजाक है। उन्होंने कहा कि आशा वर्करों ने कोरोनाकाल में अपने परिवार को छोड़कर सेवाएं दी थीं। कभी भी सरकार को अपने कार्यों से नाखुश नहीं किया। हिमाचल में आपदा के समय सभी आशा कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर सरकार के राहत कोष में 1.25 लाख का सहयोग दिया। हिमाचल को टीवी मुक्त करने के लिए 100 दिनों के अभियान में आशाओं ने घर-घर जाकर लोगों के बलगम की जांच करवाई, एक्सरे करवाए और रोगियों के इलाज में पूर्ण सहयोग दिया। आशा कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत से आज मातृत्व और शिशु मृत्यु दर में बहुत कमी आई है। जबकि प्रदेश सरकार ने आशा वर्करों के कार्यों को अनदेखा किया। उन्होंने कहा कि मात्र 300 का मानदेय बढ़ाकर मजाक किया गया है। उन्होंने मांग उठाई कि महंगाई के अनुरूप उनके मानदेय में वृद्धि की जाए और नियमितीकरण के लिए नीति बनाई जाए।