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फोम उद्योग में आग बुझाने को नहीं था पानी, आग बुझाने के उपकरण भी नहीं

Thu, 31 Jan 2019 06:54 PM IST
pravinder guleria pravinder guleria
Updated Thu, 31 Jan 2019 06:54 PM IST
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फोम उद्योग में आग बुझाने को नहीं था पानी, आग बुझाने के उपकरण भी नहीं

सुरेंद्र शर्मा

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बद्दी (सोलन)। औद्योगिक केंद्र बीबीएन में नियमों की अनदेखी का बड़ा खुलासा फोम उद्योग की घटना के बाद हुआ है। उद्योगों को अग्निशमन विभाग की एनओसी लेना अनिवार्य है और हर दो साल के बाद इसे दोबारा पंजीकृत करवाना आवश्यक है। लेकिन, बड़ी तादाद में उद्योगपति या एनओसी लेते ही नहीं हैं या फिर एनओसी को दोबारा पंजीकृत करवाने नहीं आते। इस वजह से ज्यादातर उद्योग अग्निकांड जैसी घटनाओं से सुरक्षित नहीं हैं। बीबीएन में करीब ढाई हजार उद्योग काम कर रहे हैं। इनमें सूक्ष्म उद्योग तो एक से दो कमरों में संचालित हो रहे हैं जहां आग की संभावनाएं कम रहती हैं। हालांकि लघु और मध्यम उद्योगों में आग लगने की संभावनाएं ज्यादा हैं।

फोम उद्योग में लगी आग के दौरान उद्योग प्रबंधन के पास पर्याप्त संसाधन और प्रबंध न होने की बात सामने आई है। इस वजह से सब कुछ फायर विभाग के कंधों पर आना पड़ा। प्रत्येक उद्योग के प्लॉट के आकार के अनुसार उद्योग में आग से निपटने के प्रबंध करने पड़ते हैं। उसी हिसाब से उपकरण लगाकर और पानी की पर्याप्त मात्रा स्टोरेज करके रखना जरूरी है। आग से निपटने के लिए जब तक फायर की गाड़ी आती है, तब तक प्रारंभिक बचाव के लिए उद्योगों के अपने संसाधन और प्रबंध काम आते हैं लेकिन यहां पर यह नाकाफी पाए गए।
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इसी कारण से दो गाड़ी नालागढ़ और दो गाड़ी बद्दी से आई। लेकिन, जब तक ये पहुंचतीं और आग पर काबू पातीं, तब तक सब कुछ आग की चपेट में आ चुका था। हैरानी की बात यह है कि अग्निशमन विभाग की गाड़ियां 12 किलोमीटर दूर बद्दी से पानी लेने आती रहीं। मानपुरा में न कंपनी के पास पानी का कोई व्यापक प्रबंध था और न ही एनएच पर सरकार ने कोई प्रबंध कर रखे हैं।
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एनओसी लेने में रुचि नहीं दिखाते उद्योगपति : देवेंद्र
अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र कुमार ने बताया कि विभाग के पास दो से ढाई हजार उद्योग पंजीकृत हैं जिसके लिए एनओसी लेनी पड़ती है। इसके लिए सभी उद्योगों को दो साल के बाद नवीनीकरण करवाना पड़ता है। लेकिन नेशनल बिल्डिंग कोड 2095 के तहत 200 गज के प्लॉट पर पांच लाख रुपये और बड़े उद्योग में उपकरण लगाने के लिए इससे और ज्यादा खर्चा आता है। छोटे उद्योग राशि को वहन करने की क्षमता में नहीं होते और इससे गुरेज करते हैं। हालांकि सभी बड़े और मल्टी नेशनल उद्योग ही ये औपचारिकताएं पूरी कर पाते हैं। मध्यम उद्योग एक बार एनओसी लेने के बाद उसके नवीनीकरण करवाने के लिए कम दिलचस्पी दिखाते हैं। सबको रिमाइंडर भी भेजते हैं और गाइड भी करते हैं।

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