{"_id":"5c374775bdec2273427443b9","slug":"81547126645-solan-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीएसटी में करोड़ों की धोखाधड़ी के आरोपी उद्योगपतियों की जमानत याचिका खारिज","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
जीएसटी में करोड़ों की धोखाधड़ी के आरोपी उद्योगपतियों की जमानत याचिका खारिज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
सोलन। सूबे में जीएसटी में करोड़ों की धोखाधड़ी के सामने आए पहले मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश सोलन ने वीरवार को कालाअंब के दोनों उद्योगपतियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। याचिका खारिज होने के बाद दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। दोनों उद्योगपतियों को दिसंबर माह के पहले हफ्ते में गिरफ्तार किया गया था। दोनों उद्योगपतियों पर 150 करोड़ रुपये के फर्जी बिल बनाने के आरोप हैं। बैटरी उद्योग से जुड़े दोनों उद्योगपतियों ने कागजों में दिल्ली और कानपुर में कार्यरत छह बड़ी फर्मों से खरीद-फरोख्त दिखाई थी।
जांच में इनका कोई अस्तित्व नहीं पाया गया। जांच में इन फार्मों के मालिक दिखाए गए लोग असल में कामगार, हेल्पर और चालक पाए गए। मामले की जांच में बड़े पैमाने पर फर्जी बिलों का खुलासा हुआ है। मामले की पुष्टि दक्षिण प्रवर्तन जोन परवाणू के संयुक्त निदेशक डॉ. सुनील कुमार ने की है। उन्होंने बताया कि प्रवर्तन जोन परवाणू इस मामले में जल्द ही और गिरफ्तारियां करेगा। उन्होंने बताया कि जीएसटी में हुई ठगी को कोर्ट ने आर्थिकी को खतरनाक तरीके से प्रभावित करने वाला कदम करार देते हुए याचिका को खारिज कर दिया। साथ ही दोनों आरोपियों को आगामी 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इस केस की पैरवी जिला उप न्यायवादी कपिल मोहन गौतम ने की।
विज्ञापन
यह है पूरा मामला
औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में बैटरी उद्योग से जुड़े दो उद्योगपतियों पर चालक, हेल्पर और कामगारों को कंपनी का मालिक बताकर जीएसटी में करोड़ों रुपये की ठगी का आरोप लगा था। इसके बाद कर एवं आबकारी विभाग के दक्षिण जोन प्रवर्तन कार्यालय परवाणू की टीम ने गिरफ्तार कर लिया। शुरूआती जांच में दोनों उद्योगपतियों पर 15 करोड़ रुपये के जीएसटी की देनदारी पाई गई। उद्योगपतियों ने दिल्ली व कानपुर से सामान की खरीद-फरोख्त दर्शाई थी। जब प्रवर्तन विभाग की टीम ने छानबीन की तो उन्हें वहां ऐसी कोई फर्म नहीं मिली। विभागीय टीम ने उन लोगों को ढूंढ निकाला जिन्हें मालिक बताया गया था। उनमें से एक 13 हजार रुपये मासिक पर टैक्सी चालक, दूसरा ट्रेडिंग कंपनी में चार हजार रुपये का हेल्पर और तीसरा कारखाने का कर्मचारी निकला। तीनों फार्मों में उद्योगपतियों ने दो महीने के अंतराल में 60 करोड़ रुपये की खरीद दर्शाई थी।
विज्ञापन