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निर्माण सामग्री के दाम छू रहे आसमान, घर बनाना नहीं आसान
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संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। सीमेंट और सरिया के लगातार बढ़ रहे दामों के चलते लोगों को अपना मकान बनाने काफी कठिन हो गया है। मिस्त्री, मजदूरों की दिहाड़ी बढ़ने के साथ-साथ रेत, बजरी, सीमेंट, सरिया और बिजली सामान के दाम भी बढ़ गए हैं।
हिमाचल में सीमेंट के कारखाने हैं, उसके बावजूद यहां पर पंजाब, दिल्ली और हरियाणा से अधिक है। महंगाई के दौर में एक आम आदमी को मकान बनाना महंगा सौदा साबित हो गया है। आर्थिक दृष्टि से कमजोर लोगों के लिए वन रूम सेट बनाना भी कठिन हो गया है।
एक माह पहले तक सीमेंट के दाम 350 रुपये थे लेकिन अब चार सौ से अधिक हो गए हैं। सरियाकुछ माह पहले 5000 से 5500 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा था, अब 7500 से 8000 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है।
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ईंट के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। पांच हजार रुपये प्रति हजार ईंट अब सात हजार रुपये में मिल रही है। रेत और बजरी के दाम भी बढ़ गए हैं। 1500 रुपये में मिलने वाली ट्राली अब 2500 से तीन हजार रुपये में मिल रही है।
रेत और बजरी के कोई फिक्स दाम नहीं है। बेचने वाले को जैसा ग्राहक मिलता है, उसी आधार पर रेट लगा देते हैं। बिजली के सामन में भी 30 से 40 फीसदी बढ़ोतरी हो गई है।
भवन निर्माण करने वाले ठेकेदार रमेश कुमार ने बताया कि मिस्त्री पहले पांच सौ रुपये दिहाड़ी लेते थे लेकिन अब सात सौ रुपये देने के बाद भी नहीं मिल रहे हैं।
उद्योग विभाग का नहीं कोई नियंत्रण
उद्योग विभाग के सदस्य सचिव विनीत कुमार ने बताया कि सीमेंट और सरिये के दाम मांग और उत्पादन के आधार पर कम-ज्यादा होते हैं। विभाग का इस पर कोई नियंत्रण नहीं है।
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बद्दी (सोलन)। सीमेंट और सरिया के लगातार बढ़ रहे दामों के चलते लोगों को अपना मकान बनाने काफी कठिन हो गया है। मिस्त्री, मजदूरों की दिहाड़ी बढ़ने के साथ-साथ रेत, बजरी, सीमेंट, सरिया और बिजली सामान के दाम भी बढ़ गए हैं।
हिमाचल में सीमेंट के कारखाने हैं, उसके बावजूद यहां पर पंजाब, दिल्ली और हरियाणा से अधिक है। महंगाई के दौर में एक आम आदमी को मकान बनाना महंगा सौदा साबित हो गया है। आर्थिक दृष्टि से कमजोर लोगों के लिए वन रूम सेट बनाना भी कठिन हो गया है।
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एक माह पहले तक सीमेंट के दाम 350 रुपये थे लेकिन अब चार सौ से अधिक हो गए हैं। सरियाकुछ माह पहले 5000 से 5500 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा था, अब 7500 से 8000 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है।
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ईंट के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। पांच हजार रुपये प्रति हजार ईंट अब सात हजार रुपये में मिल रही है। रेत और बजरी के दाम भी बढ़ गए हैं। 1500 रुपये में मिलने वाली ट्राली अब 2500 से तीन हजार रुपये में मिल रही है।
रेत और बजरी के कोई फिक्स दाम नहीं है। बेचने वाले को जैसा ग्राहक मिलता है, उसी आधार पर रेट लगा देते हैं। बिजली के सामन में भी 30 से 40 फीसदी बढ़ोतरी हो गई है।
भवन निर्माण करने वाले ठेकेदार रमेश कुमार ने बताया कि मिस्त्री पहले पांच सौ रुपये दिहाड़ी लेते थे लेकिन अब सात सौ रुपये देने के बाद भी नहीं मिल रहे हैं।
उद्योग विभाग का नहीं कोई नियंत्रण
उद्योग विभाग के सदस्य सचिव विनीत कुमार ने बताया कि सीमेंट और सरिये के दाम मांग और उत्पादन के आधार पर कम-ज्यादा होते हैं। विभाग का इस पर कोई नियंत्रण नहीं है।