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नहाए-खाय से बीबीएन में शुरू हुआ छठ पर्व
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संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी(सोलन)। बीबीएन में नहाए-खाय से छठ पर्व शुरू हो गया। छठ पर्व का उपवास करने वाले महिला और पुरुष 36 घंटे तक निर्जल उपवास रखेंगे। सूर्य देव की उपासना करेंगे। 30 अक्तूबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर रात भर छठ मइया का जागरण करने के बाद सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद यह व्रत पूरा होगा।
बीबीएन में तीन लाख पूर्वांचल को लोग रहते हैं। सभी लोग अपने घर नहीं जा पाते हैं। जो लोग घर नहीं जा पाते हैं, उनके लिए यहीं पर इस व्रत को विधि-विधान के साथ करने के लिए नदी-नालों के किनारे घाट तैयार किए हैं। चार दिनों तक चलने वाले इस उपवास में पहले दिन नहाय-खाय होता है।
दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर समाप्त होता है। यह सूर्य उपासना का सबसे बड़ा महापर्व है।
पूर्वांचल जन कल्याण समिति के पिंटू सिंह, हरबंस द्विवेदी और सत्या पांडे ने बताया कि शुक्रवार को नहाय-खाय से यह पर्व शुरू हुआ। पहले शरीर का शुद्धीकरण करने के बाद भोजन तैयार किया गया।
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इसमें लहसुन और प्याज नहीं डाला गया। इस दिन कद्दू और भात का विशेष महत्व होता है। शुक्रवार को चने की दाल, कद्दू, भात और रोटी बनाई गई। अर्घ्य के लिए लोगों ने सभी प्रकार की खरीदारी शुरू कर दी है।
जिन लोगों ने शुक्रवार को सामान नहीं खरीदा, वे शनिवार को खरीदारी करेंगे। अर्घ्य के लिए सूखा नारियल, पांच प्रकार के फल और एक विशेष प्रकार का गुड़ और आटे का प्रसाद ठेकुआ स्वयं तैयार किया जाएगा।
इससे अर्घ्य के दौरान सूर्य भगवान को भोग लगाया जाएगा। इस मौके पर विशेष गीत भी गाए गए। शनिवार को खरना होगा जिसमें गुड़ की खीर और रोटी तैयार की जाएगी।
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बद्दी(सोलन)। बीबीएन में नहाए-खाय से छठ पर्व शुरू हो गया। छठ पर्व का उपवास करने वाले महिला और पुरुष 36 घंटे तक निर्जल उपवास रखेंगे। सूर्य देव की उपासना करेंगे। 30 अक्तूबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर रात भर छठ मइया का जागरण करने के बाद सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद यह व्रत पूरा होगा।
बीबीएन में तीन लाख पूर्वांचल को लोग रहते हैं। सभी लोग अपने घर नहीं जा पाते हैं। जो लोग घर नहीं जा पाते हैं, उनके लिए यहीं पर इस व्रत को विधि-विधान के साथ करने के लिए नदी-नालों के किनारे घाट तैयार किए हैं। चार दिनों तक चलने वाले इस उपवास में पहले दिन नहाय-खाय होता है।
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दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर समाप्त होता है। यह सूर्य उपासना का सबसे बड़ा महापर्व है।
पूर्वांचल जन कल्याण समिति के पिंटू सिंह, हरबंस द्विवेदी और सत्या पांडे ने बताया कि शुक्रवार को नहाय-खाय से यह पर्व शुरू हुआ। पहले शरीर का शुद्धीकरण करने के बाद भोजन तैयार किया गया।
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इसमें लहसुन और प्याज नहीं डाला गया। इस दिन कद्दू और भात का विशेष महत्व होता है। शुक्रवार को चने की दाल, कद्दू, भात और रोटी बनाई गई। अर्घ्य के लिए लोगों ने सभी प्रकार की खरीदारी शुरू कर दी है।
जिन लोगों ने शुक्रवार को सामान नहीं खरीदा, वे शनिवार को खरीदारी करेंगे। अर्घ्य के लिए सूखा नारियल, पांच प्रकार के फल और एक विशेष प्रकार का गुड़ और आटे का प्रसाद ठेकुआ स्वयं तैयार किया जाएगा।
इससे अर्घ्य के दौरान सूर्य भगवान को भोग लगाया जाएगा। इस मौके पर विशेष गीत भी गाए गए। शनिवार को खरना होगा जिसमें गुड़ की खीर और रोटी तैयार की जाएगी।