नप की ढील से बिल्डरों और पीजी चलाने वालों की मौज
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टैक्स चुराने वालों पर शिकंजा कसने को तैयार की जानी वाली योजना में सरकारी जमीन का ब्योरा शामिल करना भूला नप नगर परिषद की सोलन शहर के सेटेलाइट के माध्यम से भौगोलिक जांच सर्वेक्षण करने की योजना नगर परिषद की लापरवाही के चलते अधर में फंस गई है। इस सर्वेक्षण के खाके में नगर परिषद ने निजी भूमि का ब्योरा शामिल कर लिया लेकिन सरकारी जमीन के ब्योरा प्रस्ताव में शामिल नहीं है। इस योजना को लागू करने का समय आया तो भूल याद आई और नगर परिषद सरकारी जमीन का आंकड़ा लेने के लिए हाथ पांव मारने लगी। लेकिन राजस्व विभाग से अभी तक आंकड़ा नहीं मिल सका है।
नतीजतन एक अप्रैल को वित्त वर्ष की शुरुआत में ही इस योजना के शुरू होने का राग अलाप रही नगर परिषद 4 माह बीत जाने के बाद भी इस योजना को अमलीजामा नहीं पहना सकी है। इससे मिलने वाली सुविधाओं से हजारों लोगों को वंचित रहना पड़ रहा है। शहर में अतिक्रमण करने वालों एवं टैक्स अदायगी न करने वाले बड़े अपार्टमेंट मालिकों से लेकर एजूकेशन हब में पीजी का अवैध कारोबार करने वालों पर शिकंजा नहीं कसा जा सका है। इस प्रणाली का प्रयोग मुख्यत: नक्शा बनाने, जमीन सर्वेक्षण करने, वाणिज्य कार्य, सर्विलेंस और ट्रेकिंग के लिए किया जाना है। जीआईएस के तहत सेटेलाइट मैपिंग द्वारा नगर परिषद की सारी जानकारी ऑफिस रिपोर्ट में तैयार होगी। इसमें भवनों की हकीकत का ब्योरा, जमीन, सड़कें और पानी की पाइपें आदि शामिल होना प्रस्तावित है। टैक्स वसूलने की प्रक्रिया बदलने के अलावा बिजली-पानी और सीवरेज टैक्स कलेक्शन प्रक्रिया सरल
होनी थी।
नक्शा पास करवाना भी होना था आसान
जीआईएस एप्लीकेशन की मदद से प्लाट का नक्शा पास करवाने में आसानी होगी। घर में बैठे-बैठे भवन मालिक भवन से जुड़े सभी दस्तावेजों को आसानी से इच्छुक विभाग को एक क्लिक द्वारा पहुंचा सकते थे। साथ ही टीसीपी और राजस्व विभाग भी बिना समय गवाए प्लाट से जुड़ी जानकारी आसानी से हासिल कर सकते हैं। इससे भवन बनाने वाले हजारों लोगों को सीधा फायदा मिल सकेगा।
यह फंसा है पेंच
नप के कार्यक्षेत्र में आने वाले इलाकों को सेटेलाइट मैपिंग द्वारा दर्शाया है लेकिन सरकारी जगहों की मैपिंग नहीं की है। शहर में कहां-कहां सरकारी जमीन है नप के पास इसका कोई रिकार्ड नहीं है। इसी के मध्यनजर नप ने जिला उपायुक्त को लिखित पत्र में राजस्व विभाग से शहर में लगती सरकारी भूमि के बारे में जानकारी मांगी है। इसके बाद विभाग द्वारा मिली जानकारी को जीआईएस में एड किया जाएगा।
लीकेज से पानी नहीं होगा बर्बाद
शहर में 40 प्रतिशत पानी की बर्बादी पाइपों की लीकेज से होती है। इसे ट्रेस कर पाना मुश्किल कार्य होता है। लिहाजा इस प्रणाली के माध्यम से लीकेज का पता चल सकेगा और विशेष संबंधित स्थान पर ही कार्य किया जा सकेगा। इसके साथ ही बिजली चोरी पर भी लगाम लगाने में यह मददगार होगा। नगर परिषद को भौगोलिक जांच सर्वेक्षण की मदद से शहर में किए गए भवन निर्माण से जुड़ी तमाम जानकारियां बिना समय गवाए आसानी से मिल जाएंगी। इससे नियमों को ताक पर रखकर पार्किंग की जगह कामर्शियल कांपलेक्स भवन बनाने वालों पर कार्रवाई करने में आसानी होगी।
लगेगा थोड़ा समय : बीआर नेगी
नप के ईओ बीआर नेगी ने माना कि सरकारी जमीन का आंकड़ा शामिल नहीं किया गया था। इस वजह से प्रोजेक्ट तय समय पर शुरू नहीं हो सका। अब जिला उपायुक्त की मदद से राजस्व विभाग से आंकड़े मांगे हैं। उनके आने के बाद इन आंकड़ों मैपिंग में शामिल किया जाएगा। इसमें थोड़ा समय लग सकता है।