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Solan News: धोबटन गांव में 50 किसानों को प्राकृतिक खेती के बताए लाभ
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संवाद न्यूज एजेंसी
दाड़लाघाट (सोलन)।
धोबटन गांव में एक प्राकृतिक खेती जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इसमें क्षेत्र के 30 किसानों ने भाग लिया। इस शिविर का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती के लाभों से अवगत करवाना था। यह परियोजना नाबार्ड और अंबुजा फाउंडेशन के सहयोग से चलाई जा रही है। शिविर में कृषि विभाग के नियुक्त मास्टर ट्रेनर ने किसानों को प्राकृतिक खेती की बारीकियों से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बिना भी अच्छी पैदावार कैसे संभव है। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश से आए बाहरी संसाधन विशेषज्ञ हरि कृष्णा ने किसानों को प्री मानसून ड्राई सोइंग (सूखी बुवाई) तकनीक के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इस तकनीक के फायदे गिनाए, जैसे कम पानी की आवश्यकता और मानसून से पहले ही फसल तैयार करने की सुविधा, जिससे किसानों को जलवायु परिवर्तन के जोखिमों से निपटने में मदद मिलेगी। शिविर में भाग लेने वाले किसानों ने इस पहल की सराहना की और कहा कि ऐसी जानकारी उनके लिए बेहद उपयोगी है। इस तरह के आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने और किसानों को आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
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दाड़लाघाट (सोलन)।
धोबटन गांव में एक प्राकृतिक खेती जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इसमें क्षेत्र के 30 किसानों ने भाग लिया। इस शिविर का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती के लाभों से अवगत करवाना था। यह परियोजना नाबार्ड और अंबुजा फाउंडेशन के सहयोग से चलाई जा रही है। शिविर में कृषि विभाग के नियुक्त मास्टर ट्रेनर ने किसानों को प्राकृतिक खेती की बारीकियों से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बिना भी अच्छी पैदावार कैसे संभव है। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश से आए बाहरी संसाधन विशेषज्ञ हरि कृष्णा ने किसानों को प्री मानसून ड्राई सोइंग (सूखी बुवाई) तकनीक के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इस तकनीक के फायदे गिनाए, जैसे कम पानी की आवश्यकता और मानसून से पहले ही फसल तैयार करने की सुविधा, जिससे किसानों को जलवायु परिवर्तन के जोखिमों से निपटने में मदद मिलेगी। शिविर में भाग लेने वाले किसानों ने इस पहल की सराहना की और कहा कि ऐसी जानकारी उनके लिए बेहद उपयोगी है। इस तरह के आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने और किसानों को आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।