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Solan Municipal Corporation : प्रियंका गांधी की रैली से पहले सोलन नगर निगम में कांग्रेस पार्षदों का ड्रामा, पार्टी के मेयर-डिप्टी मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव किया पेश
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उपायुक्त सोलन कृतिका कुल्हरी को अविश्वास प्रस्ताव सौंपते पार्षद।
- फोटो : SOLAN
सोलन। प्रियंका गांधी की रैली से पूर्व जिला में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह समेत कई बड़े नेताओं की उपस्थिति के बीच नगर निगम सोलन में हाई वोल्टेज ड्रामा हो गया। एक सप्ताह से डिप्टी मेयर के पद को लेकर जुटी कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए भाजपा ने चार कांग्रेसी पार्षदों को साथ लेकर मेयर और डिप्टी मेयर के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर दिया। बुधवार दोपहर को भाजपा के साथ और कांग्रेस के चार पार्षदों ने उपायुक्त सोलन को अविश्वास प्रस्ताव सौंप दिया।
बताया जा रहा है कि डीसी को अविश्वास प्रस्ताव देने के बाद पार्षद अज्ञात स्थान पर चले गए हैं। नियमानुसार अब मेयर पूनम ग्रोवर को बहुमत साबित करने के लिए एक माह के भीतर बैठक बुलाने का मौका देंगी। यदि बहुमत साबित नहीं कर पाईं तो ग्रोवर को इस्तीफा देना होगा। बता दें कि नगर निगम सोलन में कांग्रेस को बहुमत मिलने के बाद आपस में पदों को लेकर समझौता किया गया था। यह समझौता पार्टी के बड़े नेताओं के सामने हुआ।
समझौते के अनुसार नगर निगम के डिप्टी मेयर पद पर 5 साल में कांग्रेस के चार पार्षदों को मौका दिया जाना था। इसमें प्रत्येक डिप्टी मेयर का कार्यकाल 15 माह तय किया था। सबसे पहले वार्ड नंबर 14 से पार्षद राजीव कौड़ा को कांग्रेस ने अपनी ओर से डिप्टी मेयर का उम्मीदवार बनाया। 15 माह का समय बीतने के बाद दूसरे दावेदारों के दबाव पर राजीव ने पार्टी स्तर पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
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इसके बाद दूसरे दावेदार कांग्रेस विधायक कर्नल (रि.) धनीराम शांडिल के पास पहुंचे। बैठक में वार्ड-7 की कांग्रेसी पार्षद पूजा के नाम पर लगभग सहमति बन गई, लेकिन वार्ड-11 के पार्षद अभय ने अपनी दावेदारी भी पेश कर दी, जिससे मामला उलझ गया। इसके बाद कांग्रेस के चार पार्षद वार्ड-7 से पूजा, 10 से ईशा, 4 से संगीता और 17 से सरदार सिंह ठाकुर ने भाजपा पार्षदों के साथ मिलकर अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया।
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बताया जा रहा है कि डीसी को अविश्वास प्रस्ताव देने के बाद पार्षद अज्ञात स्थान पर चले गए हैं। नियमानुसार अब मेयर पूनम ग्रोवर को बहुमत साबित करने के लिए एक माह के भीतर बैठक बुलाने का मौका देंगी। यदि बहुमत साबित नहीं कर पाईं तो ग्रोवर को इस्तीफा देना होगा। बता दें कि नगर निगम सोलन में कांग्रेस को बहुमत मिलने के बाद आपस में पदों को लेकर समझौता किया गया था। यह समझौता पार्टी के बड़े नेताओं के सामने हुआ।
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समझौते के अनुसार नगर निगम के डिप्टी मेयर पद पर 5 साल में कांग्रेस के चार पार्षदों को मौका दिया जाना था। इसमें प्रत्येक डिप्टी मेयर का कार्यकाल 15 माह तय किया था। सबसे पहले वार्ड नंबर 14 से पार्षद राजीव कौड़ा को कांग्रेस ने अपनी ओर से डिप्टी मेयर का उम्मीदवार बनाया। 15 माह का समय बीतने के बाद दूसरे दावेदारों के दबाव पर राजीव ने पार्टी स्तर पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
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इसके बाद दूसरे दावेदार कांग्रेस विधायक कर्नल (रि.) धनीराम शांडिल के पास पहुंचे। बैठक में वार्ड-7 की कांग्रेसी पार्षद पूजा के नाम पर लगभग सहमति बन गई, लेकिन वार्ड-11 के पार्षद अभय ने अपनी दावेदारी भी पेश कर दी, जिससे मामला उलझ गया। इसके बाद कांग्रेस के चार पार्षद वार्ड-7 से पूजा, 10 से ईशा, 4 से संगीता और 17 से सरदार सिंह ठाकुर ने भाजपा पार्षदों के साथ मिलकर अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया।