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शहर में ऑटो रिक्शा के पहिए थमे, हजारों लोग परेशान
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
Updated Thu, 02 Jun 2016 10:25 PM IST
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सोलन में चालान के विरोध और भाड़ा बढ़ाने की मांग को लेकर ऑटो यूनियन ने वीरवार सुबह अचानक आटो खड़े कर दिए।
- फोटो : अमर उजाला
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चालान के विरोध और भाड़ा बढ़ाने की मांग को लेकर ऑटो यूनियन ने वीरवार सुबह अचानक आटो खड़े कर दिए। रूटों का बहिष्कार करते हुए आपातकाल और जरूरी सेवाओं पर ही आटो चलाए गए। इसमें शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आटो चले।
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बिना पूर्व सूचना के इस तरह के निर्णय से राहगिरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सोलन शहर में करीब 300 आटो विभिन्न रूटों पर चलते हैं। जन परिवहन में ऑटो शहर में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। यूनियन का कहना है कि मांगों को लेकर वह डीसी से भी मिले। डीसी ने उन्हें जल्द किराये बढ़ाने पर उचित फैसला लेने का आश्वासन दिया। यूनियन के प्रधान जयदत्त शर्मा ने कहा कि डीजल की आए दिन कीमतें बढ़ रही हैं। लेकिन भाड़े में बढ़ोतरी नहीं की जा रही है।
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ऊपर से चालान और तय सवारियों की शर्त से उन्हें शहर में आटो दौड़ाना घाटे का सौदा लग रहा है। संचालकों बैंकों की किश्त और परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो गया है। इस दौरान बिशन सिंह, महासचिव जोगेंद्र शर्मा, ईश्वर ठाकुर, सीता राम, राम सिंह, रवि गुप्ता, रविंद्र शर्मा, दिनेश शर्मा, अचल शर्मा, राजेंद्र कुमार और संदीप शर्मा मौजूद रहे।
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2008 से नहीं बढ़ा किराया
आटो यूनियन का कहना है कि प्रशासन ने वर्ष 2008 में किराया बढ़ाया था। इसके बाद अब तक किराया नहीं बढ़ाया गया है। डीजल की कीमतें कई गुणा बढ़ी हैं। लिहाजा प्रशासन से आटो किराया बढ़ाने की मांग की जा रही है। आठ सालों से आटो किराया न बढने से संचालकों को आर्थिक हानि हो रही है।
नियम तोड़ने में कई बार
विवादों में रही है यूनियन
शहर में जाम पैदा करने, मनमर्जी से किराया वसूलने और ओवरलोडिंग को लेकर आटो संचालकों की भूमिका संदेह में रही है। यातायात नियमों को धता बताकर सवारियां ढोने को लेकर भी यूनियन विवादों में रही है। हालांकि समय-समय पर पुलिस द्वारा चालान कर कार्रवाई की जाती रही हैं। लेकिन कुछ लोग आटो चलाने के नियमों की अनुपालना नहीं करते। शहरी और ग्रामीण रूटों के परमिट अलग हैं। पहचान के लिए ऑटो की अलग कलर कोडिंग का नियम भी दरकिनार किया जा रहा है। रूटों को सबलेट करने के मामले भी कई बार उठते रहे हैं।