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Solan News: डोडापोस्त के साथ पकड़े गए आरोपी को नहीं मिली जमानत
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बिलासपुर की विशेष न्यायाधीश-2 नविश भारद्वाज की अदालत ने याचिका की खारिज, कहा-बीमारी राहत का आधार नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। 61 किलोग्राम डोडापोस्त (पॉपी स्ट्रॉ) बरामदगी मामले में गिरफ्तार किए आरोपी को नियमित जमानत नहीं मिल सकी। बिलासपुर की विशेष न्यायाधीश-2 नविश भारद्वाज की अदालत ने व्यावसायिक मात्रा में मादक पदार्थ बरामद होने और रिकॉर्ड पर उपलब्ध प्रथम दृष्टया साक्ष्यों का हवाला देते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गंभीर बीमारी का हवाला इस मामले में जमानत का आधार नहीं बनता, क्योंकि उपचार उपलब्ध कराना जेल प्रशासन की जिम्मेदारी है। विशेष न्यायाधीश-2 नविश भारद्वाज की अदालत ने एक जुलाई को सुनाए आदेश में कहा कि एनडीपीएस अधिनियम के तहत व्यावसायिक मात्रा के मामलों में जमानत देने के लिए धारा-37 की सख्त शर्तें लागू होती हैं। ऐसे मामलों में अदालत तभी राहत दे सकती है, जब प्रथम दृष्टया यह संतोष हो कि आरोपी दोषी नहीं है और जमानत पर छूटने के बाद अपराध नहीं करेगा। मौजूदा मामले में ऐसी परिस्थितियां सामने नहीं आईं। अभियोजन पक्ष के अनुसार 15 जनवरी 2026 को सदर थाना पुलिस ने पट्टा में फोरलेन पर मनाली की ओर से आने वाले वाहनों की जांच के लिए नाकाबंदी कर रखी थी। सुबह करीब साढ़े दस बजे एक वाहन को जांच के लिए रोका गया। पुलिस को वाहन चालक और उसके साथ बैठे व्यक्ति की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। तलाशी के दौरान सब्जियों की खाली प्लास्टिक क्रेटों के नीचे छिपाकर रखे गए चार जूट और एक प्लास्टिक बैग बरामद हुए। इलेक्ट्रॉनिक कांटे से वजन करने पर इनमें कुल 61 किलोग्राम डोडापोस्त मिला। इसके बाद पुलिस ने मौके पर कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर एनडीपीएस अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। जमानत याचिका में बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि आरोपी से कोई बरामदगी नहीं हुई है। वह केवल वाहन में बैठा था और उसे मादक पदार्थ के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। जांच पूरी हो चुकी है और अब उसकी हिरासत की आवश्यकता नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि आरोपी गैंग्रीन से पीड़ित है और पीजीआई चंडीगढ़ और एम्स बिलासपुर में उसका उपचार चल चुका है, इसलिए उसे नियमित चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत है।
राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि बरामद मादक पदार्थ व्यावसायिक मात्रा का है और आरोपी लंबी दूरी तक वाहन में सफर कर रहा था। ऐसे में उसे केवल यात्री मानकर राहत नहीं दी जा सकती। अभियोजन ने यह भी आशंका जताई कि जमानत मिलने पर आरोपी साक्ष्यों और गवाहों को प्रभावित कर सकता है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि इस स्तर पर यह मानने का कोई आधार नहीं है कि आरोपी को बरामद मादक पदार्थ की जानकारी नहीं थी। प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री आरोपी की संलिप्तता की ओर संकेत करती है। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी की बीमारी का उपचार और नियमित चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराना जेल प्रशासन का दायित्व है, इसलिए केवल स्वास्थ्य संबंधी आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती। इन सभी तथ्यों को देखते हुए विशेष न्यायाधीश-2 की अदालत ने नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश में की गई टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के निस्तारण तक सीमित हैं और मुकदमे के अंतिम निर्णय को प्रभावित नहीं करेंगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। 61 किलोग्राम डोडापोस्त (पॉपी स्ट्रॉ) बरामदगी मामले में गिरफ्तार किए आरोपी को नियमित जमानत नहीं मिल सकी। बिलासपुर की विशेष न्यायाधीश-2 नविश भारद्वाज की अदालत ने व्यावसायिक मात्रा में मादक पदार्थ बरामद होने और रिकॉर्ड पर उपलब्ध प्रथम दृष्टया साक्ष्यों का हवाला देते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गंभीर बीमारी का हवाला इस मामले में जमानत का आधार नहीं बनता, क्योंकि उपचार उपलब्ध कराना जेल प्रशासन की जिम्मेदारी है। विशेष न्यायाधीश-2 नविश भारद्वाज की अदालत ने एक जुलाई को सुनाए आदेश में कहा कि एनडीपीएस अधिनियम के तहत व्यावसायिक मात्रा के मामलों में जमानत देने के लिए धारा-37 की सख्त शर्तें लागू होती हैं। ऐसे मामलों में अदालत तभी राहत दे सकती है, जब प्रथम दृष्टया यह संतोष हो कि आरोपी दोषी नहीं है और जमानत पर छूटने के बाद अपराध नहीं करेगा। मौजूदा मामले में ऐसी परिस्थितियां सामने नहीं आईं। अभियोजन पक्ष के अनुसार 15 जनवरी 2026 को सदर थाना पुलिस ने पट्टा में फोरलेन पर मनाली की ओर से आने वाले वाहनों की जांच के लिए नाकाबंदी कर रखी थी। सुबह करीब साढ़े दस बजे एक वाहन को जांच के लिए रोका गया। पुलिस को वाहन चालक और उसके साथ बैठे व्यक्ति की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। तलाशी के दौरान सब्जियों की खाली प्लास्टिक क्रेटों के नीचे छिपाकर रखे गए चार जूट और एक प्लास्टिक बैग बरामद हुए। इलेक्ट्रॉनिक कांटे से वजन करने पर इनमें कुल 61 किलोग्राम डोडापोस्त मिला। इसके बाद पुलिस ने मौके पर कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर एनडीपीएस अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। जमानत याचिका में बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि आरोपी से कोई बरामदगी नहीं हुई है। वह केवल वाहन में बैठा था और उसे मादक पदार्थ के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। जांच पूरी हो चुकी है और अब उसकी हिरासत की आवश्यकता नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि आरोपी गैंग्रीन से पीड़ित है और पीजीआई चंडीगढ़ और एम्स बिलासपुर में उसका उपचार चल चुका है, इसलिए उसे नियमित चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत है।
राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि बरामद मादक पदार्थ व्यावसायिक मात्रा का है और आरोपी लंबी दूरी तक वाहन में सफर कर रहा था। ऐसे में उसे केवल यात्री मानकर राहत नहीं दी जा सकती। अभियोजन ने यह भी आशंका जताई कि जमानत मिलने पर आरोपी साक्ष्यों और गवाहों को प्रभावित कर सकता है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि इस स्तर पर यह मानने का कोई आधार नहीं है कि आरोपी को बरामद मादक पदार्थ की जानकारी नहीं थी। प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री आरोपी की संलिप्तता की ओर संकेत करती है। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी की बीमारी का उपचार और नियमित चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराना जेल प्रशासन का दायित्व है, इसलिए केवल स्वास्थ्य संबंधी आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती। इन सभी तथ्यों को देखते हुए विशेष न्यायाधीश-2 की अदालत ने नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश में की गई टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के निस्तारण तक सीमित हैं और मुकदमे के अंतिम निर्णय को प्रभावित नहीं करेंगी।
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