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Solan News: न्यूनतम किराया 10 रुपये किए जाने का एबीवीपी ने किया विरोध
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संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने सरकार की ओर से बसों में न्यूनत्तम किराया बढ़ाने का विरोध किया है। एबीवीपी पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि अधिकतर यात्रियों के पास सात रुपये के खुले पैसे नहीं होते, इससे ड्राइवर और कंडक्टर को परेशानी होती है। इसी कारण न्यूनतम किराया 10 रुपये होगा। इस निर्णय का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कड़ा विरोध किया। परिषद का कहना है कि यह फैसला विशेषकर दूरदराज से आने वाले विद्यार्थियों पर भारी पड़ेगा। अधिकतर विद्यार्थी सीमित जेब खर्च पर रहते हैं और सात रुपये का किराया उनके लिए वहन योग्य था, जबकि 10 रुपये रोज देना उनके लिए मुश्किल है। क्योंकि इससे महीने में करीब 600 रुपये अधिक खर्च पड़ेगा। एबीवीपी के विभाग संयोजक शेखर कंडारी ने कहा कि गरीब परिवारों से आने वाले छात्र पहले ही शिक्षा और रहने के खर्चों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे में यह किराया वृद्धि से उन पर और अधिक आर्थिक दबाव पड़ेगा। विद्यार्थी परिषद ने मांग की है कि सरकार इस निर्णय पर पुनर्विचार करें और विद्यार्थियों के लिए रियायती किराया सुनिश्चित करें। परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि यह फैसला वापस नहीं लिया गया तो वह आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ेगा।
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नालागढ़ (सोलन)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने सरकार की ओर से बसों में न्यूनत्तम किराया बढ़ाने का विरोध किया है। एबीवीपी पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि अधिकतर यात्रियों के पास सात रुपये के खुले पैसे नहीं होते, इससे ड्राइवर और कंडक्टर को परेशानी होती है। इसी कारण न्यूनतम किराया 10 रुपये होगा। इस निर्णय का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कड़ा विरोध किया। परिषद का कहना है कि यह फैसला विशेषकर दूरदराज से आने वाले विद्यार्थियों पर भारी पड़ेगा। अधिकतर विद्यार्थी सीमित जेब खर्च पर रहते हैं और सात रुपये का किराया उनके लिए वहन योग्य था, जबकि 10 रुपये रोज देना उनके लिए मुश्किल है। क्योंकि इससे महीने में करीब 600 रुपये अधिक खर्च पड़ेगा। एबीवीपी के विभाग संयोजक शेखर कंडारी ने कहा कि गरीब परिवारों से आने वाले छात्र पहले ही शिक्षा और रहने के खर्चों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे में यह किराया वृद्धि से उन पर और अधिक आर्थिक दबाव पड़ेगा। विद्यार्थी परिषद ने मांग की है कि सरकार इस निर्णय पर पुनर्विचार करें और विद्यार्थियों के लिए रियायती किराया सुनिश्चित करें। परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि यह फैसला वापस नहीं लिया गया तो वह आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ेगा।