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एक हजार उद्योगों के पास नहीं अग्निशमन विभाग की एनओसी
Updated Sat, 16 Jun 2018 10:09 PM IST
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परवाणू (सोलन)। औद्योगिक नगर परवाणू में करीब 50 फीसदी उद्योगों के पास अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं है। एक हजार छोटे और बड़े उद्योग ऐसे हैं जिन्होंने आज तक कभी अग्निशमन विभाग से उद्योगों की जांच नहीं करवाई। न ही एनओसी हासिल की। इन उद्योगों के पास आग से निपटने के पर्याप्त उपकरण भी नहीं हैं। इसके चलते हादसे के दौरान उद्योगों को भारी नुकसान झेलना पड़ता है। इतना ही नहीं अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाणपत्र न होने की सूरत में कई बार उद्योगों को बीमा राशि का भुगतान भी नहीं हो पाता है। उद्योग स्थापित करने के दौरान प्रबंधन को अग्निशमन विभाग से एनओसी प्रमाणपत्र हासिल करना होता है। इसके लिए अग्निशमन विभाग के पास आवेदन किया जाता है और आवेदन के अनुसार उद्योगों पर लागू शर्तेें पूरी करनी होती हैं।
अग्निशमन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर उद्योगों का मुआयना करते हैं और उसके बाद विभाग को एनओसी प्रदान कर दी जाती है। यह एनओसी दो सालों के लिए वैद्य है। एनओसी के दौरान जो खामियां उजागर होती हैं उन्हें भी अग्निशमन विभाग दुरुस्त करवाते हैं। हालांकि सरकार की तरफ से अभी तक अग्निशमन विभाग को औचक निरीक्षण या दबिश के अधिकार नहीं मिले हैं। अग्निशमन विभाग सिर्फ उद्योग के आवेदन पर ही निरीक्षण करके प्रबंधन को एनओसी प्रदान करने का अधिकार रखता है। यही कारण है कि परवाणू में बड़ी संख्या में उद्योग अग्निशमन विभाग की एनओसी हासिल ही नहीं करते हैं।
निरीक्षण की इजाजत नहीं है : विभाग
परवाणू अग्निशमन विभाग के प्रभारी कश्मीर सिंह ने कहा कि एनओसी तभी प्रदान की जा सकती है जब कोई विभाग के पास आवेदन करे। विभाग को यह अधिकार नहीं है कि वह उद्योगों का औचक निरीक्षण कर उनकी खामियां निकाले। बताया कि 50 प्रतिशत उद्योग ही अपनी इच्छा से एनओसी हासिल करने के लिए आवेदन करते हैं जबकि अन्य इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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बीमा राशि दिलाने में सहायक है एनओसी
अग्निशमन विभाग की एनओसी उद्योगों के नुकसान का बीमा दिलाने में अहम भूमिका अदा करती है। उद्योग में आग लगने की सूरत में बीमा कंपनी अन्य प्रमाणपत्रों के साथ ही अग्निशमन विभाग की एनओसी की भी मांग करती है। यदि एनओसी न ली हो तो बीमा राशि का भुगतान नहीं किया जाता है। ऐसा पूर्व में भी कई उद्योगों के साथ हो चुका है।
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अग्निशमन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर उद्योगों का मुआयना करते हैं और उसके बाद विभाग को एनओसी प्रदान कर दी जाती है। यह एनओसी दो सालों के लिए वैद्य है। एनओसी के दौरान जो खामियां उजागर होती हैं उन्हें भी अग्निशमन विभाग दुरुस्त करवाते हैं। हालांकि सरकार की तरफ से अभी तक अग्निशमन विभाग को औचक निरीक्षण या दबिश के अधिकार नहीं मिले हैं। अग्निशमन विभाग सिर्फ उद्योग के आवेदन पर ही निरीक्षण करके प्रबंधन को एनओसी प्रदान करने का अधिकार रखता है। यही कारण है कि परवाणू में बड़ी संख्या में उद्योग अग्निशमन विभाग की एनओसी हासिल ही नहीं करते हैं।
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निरीक्षण की इजाजत नहीं है : विभाग
परवाणू अग्निशमन विभाग के प्रभारी कश्मीर सिंह ने कहा कि एनओसी तभी प्रदान की जा सकती है जब कोई विभाग के पास आवेदन करे। विभाग को यह अधिकार नहीं है कि वह उद्योगों का औचक निरीक्षण कर उनकी खामियां निकाले। बताया कि 50 प्रतिशत उद्योग ही अपनी इच्छा से एनओसी हासिल करने के लिए आवेदन करते हैं जबकि अन्य इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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बीमा राशि दिलाने में सहायक है एनओसी
अग्निशमन विभाग की एनओसी उद्योगों के नुकसान का बीमा दिलाने में अहम भूमिका अदा करती है। उद्योग में आग लगने की सूरत में बीमा कंपनी अन्य प्रमाणपत्रों के साथ ही अग्निशमन विभाग की एनओसी की भी मांग करती है। यदि एनओसी न ली हो तो बीमा राशि का भुगतान नहीं किया जाता है। ऐसा पूर्व में भी कई उद्योगों के साथ हो चुका है।